थनैला रोग ने घटाया दूध? गर्भावस्था के आखिरी 48 घंटे ऐसे करें गायों की देखभाल, बाल्टी भर-भर देंगी दूध

थनैला रोग ने घटाया दूध? गर्भावस्था के आखिरी 48 घंटे ऐसे करें गायों की देखभाल, बाल्टी भर-भर देंगी दूध


Last Updated:

Mastitis Disease In Cow: पशुपालक के मुताबिक थनैला रोग दुधारू पशुओं में साफ-सफाई की कमी और गलत देखभाल से होती है. गर्भकाल के अंतिम 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं. इस दौरान कैल्शियम की अधिक मात्रा नुकसानदायक हो सकती है.

Mastitis Disease In Cow: मध्य प्रदेश के सीधी जिले में बड़ी संख्या में किसान दुधारू पशुओं की डेयरी खोलकर व्यवसाय कर रहे हैं. दुग्ध उत्पादन के जरिए कई परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, लेकिन पशुओं की देखरेख में होने वाली छोटी सी लापरवाही कभी-कभी बड़े नुकसान का कारण बन जाती है. इन्हीं समस्याओं में एक गंभीर समस्या है थनैला रोग, जो खासतौर पर पशु के बच्चे को जन्म देने के बाद देखने को मिलता है और दूध उत्पादन में भारी गिरावट ला देता है. थनैला रोग होने पर पशु के थन में सूजन, गांठ, दर्द और संक्रमण की स्थिति बन जाती है. कई बार दूध में खून या मवाद भी निकलने लगता है. यदि समय पर उपचार न हो तो यह रोग लंबे समय तक बना रह सकता है, जिससे दूध उत्पादन लगातार घटता जाता है.

पशुपालक संतोष कुमार मिश्रा ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि थनैला रोग अक्सर गायों में देखा जाता है. पशु के बच्चा देने से पहले से की गई सही तैयारी इस बीमारी से बचाव में बेहद कारगर साबित हो सकता है. संतोष ने बताया कि गाय जब बच्चा देने वाली होती है, तो 48 घंटे पहले बाहर से दिया जाने वाला कैल्शियम बंद कर देना चाहिए. अधिक कैल्शियम देने से मिल्क फीवर और जेड गिरने जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं, जो थनैला रोग को जन्म दे सकती हैं.

थनैला रोग किन कारणों से होता है?
संतोष कुमार मिश्रा ने बताया कि थनैला रोग कई कारणों से हो सकता है, जैसे थनों की चिमक्कन, साफ-सफाई की कमी और बथान की खराब स्थिति. इस रोग के लक्षणों में थनों का आकार बढ़ना, सूजन आना, गांठ पड़ना, पशु का बेचैन रहना और दूध का रास्ता संकरा हो जाना शामिल है. घरेलू उपचार के बारे में उन्होंने बताया कि थनों पर अरंडी के तेल से हल्की मालिश करना लाभदायक होता है. इसके अलावा नीम के पत्तों को उबालकर ठंडा पानी थनों पर डालने या सेखाई करने से भी सूजन कम होती है. रोगी पशु को कुछ दिनों तक आधा किलो गुड़ और आधा किलो देने से भी फायदा मिलता है. यह उपचार 3 से 4 दिनों तक जारी रखा जा सकता है. हरी धनिया की पट्टी खिलाना भी उपयोगी माना जाता है. इस दौरान रोगी पशु का दूध रोज निकालते रहना चाहिए, भले ही उसमें खून क्यों न आ रहा हो.

पशुपालक संतोष मिश्रा नेकहा केवल महंगी अंग्रेजी दवाओं पर निर्भर न रहें, बल्कि देसी उपायों के साथ-साथ नजदीकी पशु चिकित्सक से परामर्श जरूर लें. सही समय पर देखभाल, साफ-सफाई और विशेषज्ञ सलाह से थनैला रोग पर काबू पाया जा सकता है.

About the Author

Deepti Sharma

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें

homelifestyle

थनैला रोग ने घटाया दूध? गर्भावस्था के अंतिम 48 घंटे ऐसे करें देखभाल



Source link