बरगी बांध से कटनी, सतना होते हुए रीवा तक जाने वाली दाईं नहर टूटने के 57 दिन बाद भी पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो सकी है। मरम्मत अधूरी होने से नहर से पानी का प्रवाह प्रभावित है, जिससे किसानों को रबी फसलों की सिंचाई में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का दावा है कि नहर को केवल औपचारिक रूप से चालू किया गया है। जहां 20 घन मीटर पानी छोड़ा जाना चाहिए, वहां अभी सिर्फ 7 घन मीटर पानी ही छोड़ा जा रहा है, जो जरूरत के हिसाब से काफी कम है। अधिकारियों का दावा फेल, खेतों तक नहीं पहुंच रहा पानी नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने दावा किया था कि कुछ ही दिनों में नहर पूरी तरह ठीक कर दी जाएगी, लेकिन डेढ़ महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। नहर किनारे के किसानों का कहना है कि इस बार रबी सीजन में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है, जिससे फसल प्रभावित हो रही है। बरगी बांध में पानी कम, लेकिन संकट नहीं सोमवार सुबह तक बरगी बांध का जलस्तर 416 मीटर दर्ज किया गया, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 1 मीटर कम है। वर्तमान में बांध 48.43% भरा हुआ है। बांध प्रभारी आरआर रोहित के मुताबिक, पानी की कमी नहीं है, लेकिन पिछले साल की तुलना में करीब 8% कम पानी है, जिसे 15 जून तक मैनेज किया जाएगा। इसके बाद मानसून का पानी आने लगेगा। प्रदेश की लाइफलाइन है बरगी बांध गर्मियों में बरगी बांध पर पूरे प्रदेश की नजर रहती है, क्योंकि यह नर्मदा नदी पर बना पहला बड़ा बांध है। इसके भरने से आगे के बांधों में पानी पहुंचना आसान हो जाता है। जबलपुर शहर की करीब 85% पेयजल सप्लाई नर्मदा से होती है और गर्मियों में इसका बड़ा हिस्सा बरगी बांध से छोड़े गए पानी पर निर्भर करता है। नहर की धीमी मरम्मत और कम जल प्रवाह ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अब सवाल यही है कि पूरी क्षमता से पानी कब छोड़ा जाएगा, ताकि खेतों तक राहत पहुंच सके।
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