Last Updated:
15,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय रन और 33 शतकों के साथ, एडम गिलक्रिस्ट ने निचले क्रम को ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी ताकत बना दिया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि 15,000 से ज्यादा रन बनाने वाले इस दिग्गज का शानदार करियर महज एक छूटे हुए कैच के अहसास से खत्म हो गया था.
एक ड्रॉप कैच की वजह से एडम गिलक्रिस्ट ने ले लिया था क्रिकेट से रिटायरमेंट
नई दिल्ली. क्रिकेट के मैदान पर कई खिलाड़ी आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन कुछ ऐसे होते हैं जो खेल खेलने के तरीके को ही बदल देते हैं. ऑस्ट्रेलिया के महान विकेटकीपर-बल्लेबाज एडम गिलक्रिस्ट एक ऐसे ही नाम हैं. उन्होंने न केवल विकेटकीपिंग के मानकों को ऊंचा किया, बल्कि एक विस्फोटक बल्लेबाज के रूप में सातवें नंबर पर आकर मैच का रुख पलटने की कला भी सिखाई. 2009 में गिलक्रिस्ट अपनी कप्तानी में संन्यास के बाद डेक्कन चार्जर्स को आईपीएल जिताया था.
गिलक्रिस्ट से पहले विकेटकीपरों को मुख्य रूप से केवल उनके दस्ताने के काम के लिए चुना जाता था. ‘गिली’ ने इस धारणा को ध्वस्त कर दिया और उन्होंने दिखाया कि एक विकेटकीपर दुनिया का सबसे खतरनाक बल्लेबाज भी हो सकता है. 15,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय रन और 33 शतकों के साथ, एडम गिलक्रिस्ट ने निचले क्रम को ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी ताकत बना दिया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि 15,000 से ज्यादा रन बनाने वाले इस दिग्गज का शानदार करियर महज एक छूटे हुए कैच के अहसास से खत्म हो गया था.
वह एक कैच और संन्यास का फैसला
साल 2008 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी का एडिलेड टेस्ट चल रहा था। भारत के दिग्गज बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण क्रीज पर थे. इसी दौरान एडम गिलक्रिस्ट से लक्ष्मण का एक आसान सा कैच छूट गया. एक ऐसा खिलाड़ी जिसने अपने करियर में परिंदों की तरह उड़कर कैच लपके थे, उसके लिए यह एक साधारण गलती नहीं थी. गिलक्रिस्ट को उसी पल अहसास हुआ कि उनके ‘रिफ्लेक्सेस’ (प्रतिक्रिया समय) धीमे पड़ गए हैं.
मैच के बाद उन्होंने अपने साथी खिलाड़ी मैथ्यू हेडन से कहा, “मेरा समय पूरा हो गया है, गिलक्रिस्ट ने माना कि अगर वह अपना शत-प्रतिशत नहीं दे पा रहे हैं, तो उन्हें मैदान पर रहने का कोई हक नहीं है. एक कैच छूटने के ग्लानि और अपनी गिरती फुर्ती के आत्म-साक्षात्कार ने 13 साल के सुनहरे करियर पर पूर्णविराम लगा दिया.
आंकड़ों में महानता
एडम गिलक्रिस्ट की उपलब्धियां किसी सपने जैसी हैं वे उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने 1999, 2003 और 2007 के लगातार तीन विश्व कप जीते. 2007 के फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ उनकी 149 रनों की पारी आज भी क्रिकेट इतिहास की महानतम पारियों में गिनी जाती है. 400 से ज्यादा मैचों में उन्होंने कुल 905 शिकार (कैच और स्टंपिंग) किए, जो उन्हें मार्क बाउचर के बाद दुनिया का दूसरा सबसे सफल विकेटकीपर बनाता है. गिलक्रिस्ट अपनी ‘वॉकिंग’ (आउट होने पर अंपायर के फैसले का इंतजार किए बिना खुद क्रीज छोड़ देना) की आदत के लिए जाने जाते थे, जो आधुनिक क्रिकेट में दुर्लभ है.
एडम गिलक्रिस्ट का संन्यास लेना खेल के प्रति उनकी ईमानदारी का सबसे बड़ा सबूत था. उन्होंने हारने के डर से नहीं, बल्कि खुद के तय किए गए ऊंचे मानकों से समझौता न करने के कारण क्रिकेट को अलविदा कहा. आज भी जब एक ‘आदर्श विकेटकीपर-बल्लेबाज’ की बात होती है, तो जेहन में सबसे पहला नाम एडम गिलक्रिस्ट का ही आता है वे केवल एक क्रिकेटर नहीं थे, वे उस ऑस्ट्रेलियाई युग की रीढ़ थे जिसने विश्व क्रिकेट पर राज किया.