नई दिल्ली. आईपीएल 2026 की शुरुआत ने साफ कर दिया है कि इस सीजन में रन बनाना जितना आसान है, उतना ही मुश्किल हो गया है गेंदबाजों के लिए अपनी उपयोगिता साबित करना. छोटे मैदान, फ्लैट पिच और आक्रामक बल्लेबाजी के बीच 200+ का स्कोर भी सुरक्षित नहीं दिख रहा लेकिन इसी बीच एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है क्या फ्रेंचाइज़ी को खिलाड़ियों की पूरी उपलब्धता और भूमिका के बारे में पहले से साफ जानकारी मिल रही है? कैमरन ग्रीन का मामला इसी बहस को और तेज करता है.
आईपीएल के पहले दो दिनों में ही 200 से ज्यादा के स्कोर बेहद आसानी से चेज़ होते दिखे. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने 202 रन का लक्ष्य 16 ओवर से पहले हासिल कर लिया, जबकि मुंबई इंडियंस (MI) ने कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के खिलाफ 220 रन का विशाल स्कोर 19.1 ओवर में चेज़ कर लिया. सच यही है कि इस आईपीएल में अच्छी बल्लेबाजी पिचों और छोटे बाउंड्री के चलते कोई भी स्कोर सुरक्षित नहीं है. बेंगलुरु और मुंबई जैसे मैदानों में बाउंड्री 60 मीटर से भी कम है, जहां मिसहिट शॉट भी आसानी से छक्के में बदल रहे हैं.
ग्रीन का गोलमाल समझिए
ऐसे में यह हैरानी की बात नहीं कि इन हाई-स्कोरिंग मुकाबलों में भी गेंदबाजों को ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ मिला. बल्लेबाजों के अनुकूल परिस्थितियों में अच्छी गेंदबाजी सोने के बराबर होती है और यही बात हमें कैमरन ग्रीन के मुद्दे तक ले जाती है. अजिंक्य रहाणे ने साफ कहा कि ग्रीन ने गेंदबाजी क्यों नहीं की, यह सवाल क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (CA) से पूछा जाना चाहिए. यही वह बिंदु है जहां केकेआर खुद को ठगा हुआ महसूस कर सकता है. केकेआर ने ग्रीन को 25.2 करोड़ रुपये की भारी कीमत में खरीदा पहली बात, यह कीमत बहुत ज्यादा थी. दूसरी बात, अगर इस कीमत को सही ठहराने का कोई आधार है, तो वह ग्रीन की ऑलराउंड क्षमता है. वह बल्लेबाजी से मैच जिता सकते हैं और गेंदबाजी में चार ओवर का योगदान दे सकते हैं. शार्दुल ठाकुर की तरह, जिन्होंने मुंबई के लिए तीन विकेट लिए, ग्रीन भी उसी तरह की गति से गेंदबाजी करते हैं और अपनी लंबाई का फायदा उठाकर उछाल पैदा कर सकते हैं.
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने धोखे में रखा
जब मुंबई इंडियंस पावरप्ले में आक्रामक बल्लेबाजी कर रही थी, तब केकेआर को ग्रीन से गेंदबाजी में योगदान की जरूरत थी लेकिन यह विकल्प उनके पास नहीं था यही वह जगह है जहां सवाल उठते हैं क्या केकेआर को पहले से बताया गया था कि ग्रीन हर मैच में गेंदबाजी नहीं करेंगे? क्या पूरी पारदर्शिता बरती गई थी? अगर यह जानकारी पहले होती, तो क्या केकेआर 25 करोड़ रुपये खर्च करता? यहीं पर खिलाड़ियों और क्रिकेट बोर्ड्स को पूरी सच्चाई सामने रखनी चाहिए. जैसे बेन डकेट ने आखिरी समय में नाम वापस लेकर दिल्ली कैपिटल्स को मुश्किल में डाल दिया, वैसे ही ग्रीन का गेंदबाजी न करना भी टीम के साथ अन्याय जैसा है. रहाणे के बयान से साफ था कि यह केकेआर का फैसला नहीं था, बल्कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने ग्रीन को गेंदबाजी से रोका था.
सैलरी में कटौती होनी चाहिए
मैच के बाद क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने भी बयान जारी कर इसकी पुष्टि की. उन्होंने कहा, “कैमरन को लोअर बैक इंजरी है, जिसे मैनेज किया जा रहा है, लेकिन फिलहाल उन्हें गेंदबाजी से दूर रहना होगा. वह भारत में अपनी गेंदबाजी लोड को धीरे-धीरे बढ़ा रहे हैं और उम्मीद है कि 10–12 दिनों में वापसी करेंगे. केकेआर को इसकी जानकारी पहले से दी गई थी. ऐसी स्थिति में यह जरूरी हो जाता है कि केकेआर को बीसीसीआई के पास अपील करने का अधिकार मिले और ग्रीन की सैलरी में अनुपातिक कटौती की जाए. वह टीम के साथ पूरी भूमिका निभाने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें पूरी रकम मिलना भी सही नहीं है. आईपीएल कोई मुफ्त का मंच नहीं है, बल्कि यह एक बेहद प्रतिस्पर्धी टूर्नामेंट है, जहां हर खिलाड़ी को अपनी कीमत साबित करनी होती है.
ग्रीन को एक ऑलराउंडर के तौर पर खरीदा गया था अगर वह केवल आधा काम कर पा रहे हैं, तो उन्हें आधी सैलरी ही मिलनी चाहिए. ऐसे मामलों में सख्त नियम और पारदर्शिता बेहद जरूरी है, ताकि फ्रेंचाइज़ी को नुकसान न उठाना पड़े. केकेआर और अजिंक्य रहाणे के पास नाराज होने की पूरी वजह है. यह सौदे का हिस्सा नहीं था और जब टीम पहले से हर्षित राणा और आकाश दीप जैसे गेंदबाजों की गैरमौजूदगी से जूझ रही हो, तब ग्रीन का गेंदबाजी न करना टीम के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है.