इनके आगे जामताड़ा भी फेल! एक ही चेहरे पर 450 से ज्यादा सिम, पुलिस भी है दंग

इनके आगे जामताड़ा भी फेल! एक ही चेहरे पर 450 से ज्यादा सिम, पुलिस भी है दंग


Balaghat Sim card Scam News: बीते कुछ सालों में साइबर फ्रॉड के तरीके लगातार बदलते जा रहे हैं, लेकिन बालाघाट से जो मामला सामने आया है, वो वाकई हैरान कर देने वाला है. यहां सिर्फ 5 लोगों के चेहरों का इस्तेमाल करके 450 फर्जी सिम कार्ड एक्टिवेट कर दिए गए.

इस पूरे खेल का खुलासा तब हुआ जब 2023 में डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्यूनिकेशन ने AI बेस्ड फेसियल रिकग्निशन सिस्टम से जांच शुरू की. पता चला कि एक ही चेहरे से कई अलग-अलग नाम और पते पर सिम जारी किए जा रहे हैं.

तीन साल तक चलता रहा फर्जीवाड़ा
जांच में सामने आया कि ये फर्जी सिम का खेल करीब 3 साल से चल रहा था. सिर्फ बालाघाट ही नहीं, बल्कि इसके तार मंडला, डिंडौरी, भोपाल और उत्तर प्रदेश तक जुड़े हुए थे. बालाघाट पुलिस ने जब गहराई से जांच की तो पता चला कि यहां से सिम भोपाल भेजे जाते थे और वहां से आगे दूसरे राज्यों में बेचे जाते थे.

एक महिला ने बनाई 70 से ज्यादा फर्जी पहचान
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि आरोपी प्रियंका पटले ने अपने ही चेहरे का इस्तेमाल कर 70 से ज्यादा अलग-अलग पहचान बना लीं. कभी उसने पति का नाम बदल दिया, तो कभी बुजुर्ग महिला के आधार कार्ड पर अपनी फोटो लगा दी. कई लोगों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने कभी कोई सिम नहीं खरीदा, लेकिन उनके नाम पर सिम चल रहे थे.

सिस्टम की भी बड़ी लापरवाही
जांच में ये भी सामने आया कि सिर्फ आरोपी ही नहीं, बल्कि कुछ पॉइंट ऑफ सेल एजेंट और टेलीकॉम कंपनियों की भी लापरवाही इसमें शामिल रही. ई-केवाईसी जैसे सख्त सिस्टम को भी बायपास कर दिया गया और फर्जी डॉक्यूमेंट्स को आसानी से अप्रूव कर दिया गया. साफ है कि लालच में नियमों को नजरअंदाज किया गया.

पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी
बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा के निर्देशन में एसआईटी बनाई गई, जिसने इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया. अब तक तीन आरोपियों महेंद्र पटले, प्रियंका पटले और खुमेश गौतम को गिरफ्तार किया जा चुका है. इसके अलावा 19 अन्य संदिग्धों की पहचान की गई है और उनकी तलाश जारी है.

ऐसे फ्रॉड से कैसे बचें
पुलिस ने लोगों से सावधान रहने की अपील की है. कभी भी अपने पहचान पत्र किसी अनजान व्यक्ति को न दें. अगर देना जरूरी हो, तो उस पर साइन करके और उद्देश्य लिखकर ही दें. साथ ही कोशिश करें कि दस्तावेज सीधे आपके घर पर ही डिलीवर हों, ताकि बीच में उनका गलत इस्तेमाल न हो सके.



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