बड़वानी जिले में किडनी संबंधी बीमारियों में तेजी से वृद्धि हो रही है। जिला अस्पताल के डायलिसिस सेंटर के आंकड़े चिंताजनक स्थिति दर्शाते हैं। मार्च 2026 तक 1300 से अधिक डायलिसिस सेशन किए जा चुके हैं, और वर्तमान में हर महीने औसतन 450 से ज्यादा मरीजों को डायलिसिस की आवश्यकता पड़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च रक्तचाप (बीपी) और मधुमेह (शुगर) के मरीजों द्वारा बरती जा रही लापरवाही इस समस्या का प्रमुख कारण है। कई मरीज नियमित जांच के बिना लंबे समय तक एक ही दवा का सेवन करते रहते हैं, जिससे किडनी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके अतिरिक्त, सिरदर्द या बदन दर्द जैसी सामान्य समस्याओं में बिना डॉक्टरी सलाह के पेनकिलर और एंटीबायोटिक्स का अत्यधिक सेवन भी बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन दवाओं का अनियंत्रित उपयोग धीरे-धीरे किडनी की कार्यक्षमता को समाप्त कर देता है। स्थिति की गंभीरता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि कई मरीजों को सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस करवाना पड़ रहा है। यह प्रक्रिया न केवल मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ाती है, बल्कि उनके जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित करती है। पहले किडनी की बीमारी मुख्य रूप से बुजुर्गों में देखी जाती थी, लेकिन अब 20 से 50 वर्ष आयु वर्ग के युवा भी बड़ी संख्या में इसका शिकार हो रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, युवाओं में बढ़ती नशे की लत, शराब, तंबाकू और अन्य मादक पदार्थों का सेवन किडनी फेलियर का एक प्रमुख कारण बन रहा है। जंक फूड का अधिक सेवन, अनियमित दिनचर्या और शारीरिक गतिविधियों की कमी भी इस जोखिम को बढ़ा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को साल में कम से कम एक बार फुल बॉडी चेकअप कराना चाहिए। बीपी और शुगर के मरीजों के लिए हर तीन महीने में किडनी फंक्शन टेस्ट कराना अत्यंत आवश्यक है, ताकि बीमारी का शुरुआती चरण में ही पता लगाया जा सके। जिले में डायलिसिस के आंकड़े
2023 में 30-31 मरीजों के कुल 3820 डायलिसिस सेशन
2024 में 33-35 मरीजों के 4668 सेशन
2025 में 36-38 मरीजों के 5204 सेशन
2026 में मार्च तक ही 40 मरीजों के 1300 से अधिक सेशन इन आंकड़ों से साफ है कि किडनी रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है। पिछले 6 महीनों का रिकॉर्ड “साइलेंट किलर” बीमारी
जिला चिकित्सालय के मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. जोसफ सुलिया के अनुसार किडनी की बीमारी एक “साइलेंट किलर” है, क्योंकि इसके लक्षण तब सामने आते हैं जब किडनी 60 से 70 प्रतिशत तक खराब हो चुकी होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराना और स्वयं दवा का डोज तय करना मरीजों के लिए घातक साबित हो रहा है।
उन्होंने बताया कि शरीर में सूजन आना, भूख कम लगना, पेशाब में बदलाव या कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते जांच और सही इलाज से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन लापरवाही बरतने पर स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। रखें सावधानियां बिना डॉक्टर की सलाह दवा न लें
बीपी और शुगर को नियंत्रित रखें
नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं
नशे और जंक फूड से दूरी बनाएं
किसी भी लक्षण पर तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें यदि समय रहते लोग सतर्क नहीं हुए, तो आने वाले वर्षों में बड़वानी में किडनी रोग एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन सकता है।
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