छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में विस्थापितों का आंदोलन तेज हो गया है। आंदोलन के नौवें दिन और सामूहिक भूख हड़ताल के 48 घंटे पूरे होने पर सोमवार सुबह हजारों आदिवासी, महिलाएं और बच्चे केन नदी में उतर गए। उन्होंने शरीर पर गीली मिट्टी लपेटकर ‘मिट्टी सत्याग्रह’ शुरू किया। प्रदर्शनकारियों ने ‘जल, जंगल, जमीन’ के नारे लगाए और स्पष्ट किया कि वे इस भूमि के मूल निवासी हैं। उनका कहना है कि उचित मुआवजा और पुनर्वास के बिना वे विस्थापन स्वीकार नहीं करेंगे। कुछ बुजुर्गों ने बताया कि यदि उन्हें जबरन बेदखल किया गया, तो वे इसी मिट्टी में दफन होना पसंद करेंगे। बिना अन्न विरोध प्रदर्शन कर रहे
भीषण गर्मी और खुले आसमान के नीचे ‘आकाश सत्याग्रह’ भी जारी है। हजारों लोग जमीन पर लेटकर बिना अन्न ग्रहण किए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। भूख हड़ताल के कारण कई महिलाओं की तबीयत बिगड़ने लगी है। मौके पर पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से चिंता बढ़ गई है। प्रशासन पर अनदेखी का आरोप
जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि 48 घंटों से लोगों के घरों में चूल्हे नहीं जले हैं, फिर भी प्रशासन ने अब तक कोई ठोस पहल नहीं की है। भटनागर का आरोप है कि नियमों और कानूनों (धारा 11, 15, 18) की अनदेखी कर विस्थापितों को जबरन हटाने का प्रयास किया जा रहा है। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही कोई उच्च अधिकारी मौके पर पहुंचकर समाधान नहीं करता है, तो आंदोलन और तेज होगा। फिलहाल केन नदी के किनारे स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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