पता चला बेटी ने 10वीं में रचा इतिहास, मां नहीं रोक पाई आंसू, सीने से लगाया

पता चला बेटी ने 10वीं में रचा इतिहास, मां नहीं रोक पाई आंसू, सीने से लगाया


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मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले की शिवानी कुशवाहा ने 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 7वां स्थान हासिल किया है. जैसे ही बेटी के रिजल्ट का पता चला. मां की आंखों में खुशी के आंसू झलक आए. शिवानी के पिता ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी को मजदूरी करके पढ़ाया है. उनकी बेटी ने 500 में से 493 अंक हासिल किए हैं. पुलिस इस मामले की गहन जांच कर रहा है.

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बेटी की सफलता पर मां नहीं रोक सकी अपने आंसू

कभी-कभी सफलता सिर्फ अंक नहीं होती, वो होती है संघर्ष, त्याग और सपनों की कहानी. जब उस सफलता के साथ मां की आंखों से आंसू बहते हैं, तो वो आंसू सिर्फ खुशी नहीं, बल्कि सालों की मेहनत का परिणाम होते हैं. हम बात कर रहे हैं मध्यप्रदेश के सबसे छोटे से जिले निवाड़ी की उस बेटी की, जिसने सिर्फ परीक्षा पास नहीं की, बल्कि अपने माता-पिता के सपनों को हकीकत में बदल दिया. यह कहानी है निवाड़ी जिले के छोटे से गांव कुडार कुअरपुरा की, जहां एक मां की आंखों से बहते आंसू आज पूरे प्रदेश को भावुक कर रहे हैं. शिवानी कुशवाहा ने मध्य प्रदेश की 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 500 में से कुल 493 अंक हासिल किए. प्रदेश की मेरिट लिस्ट में उन्होंने 7वां स्थान पाया और इतिहास रच दिया.

शिवानी की मां नहीं रोक पाईं आंसू
पीएम श्री कन्या विद्यालय की छात्रा शिवानी कुशवाहा की सफलता की खबर घर पहुंची, उसकी मां खुद को रोक नहीं पाईं. आंखों में आंसू थे, लेकिन ये दर्द के नहीं बल्कि गर्व और खुशी के. शिवानी की मां फूलादेवी कुशवाहा ने बताया कि हमारे परिवार में आज तक इतनी बड़ी सफलता किसी को नहीं मिली, मुझे अपनी बेटी पर गर्व है. उनकी आवाज कांप रही थी, लेकिन उस कांपती आवाज में सालों का संघर्ष साफ झलक रहा था.

शिवानी के पिता राजाराम कुशवाहा ने बताया कि उनकी एक बेटी है और एक बेटा है. उन्होंने कहा कि बच्ची को शिक्षा के लिए वंचित ना रहना पड़े. इसलिये मेहनत मजदूरी कर उसे पढ़ाया ताकि वो आगे बढ़े. शिवानी के पिताजी ने कहा कि वो खेती किसानी करते है, लेकिन उन्होंने बेटी को पढ़ने के लिये प्रेरित किया. उन्होंने बताया कि शिक्षकों से मिलकर बच्ची की पढ़ाई की जानकारी समय समय पर लेता रहता था. उन्होंने शिक्षकों का आभार व्यक्त किया है. पिता की यही सोच, आज उनकी बेटी को प्रदेश की टॉप लिस्ट तक ले आई.

शिक्षकों को दिया श्रेय
शिवानी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने शिक्षकों को दिया. शिवानी ने कहा कि जैसे-जैसे शिक्षकों ने पढ़ाया. मैंने वैसे-वैसे पढ़ाई की. उन्होंने कहा कि हॉस्टल में रहने के दौरान जब भी समय मिलता था. वह लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ाई करती थी. अब उसका अगला लक्ष्य यूपीएससी की तैयारी करना है. शिवानी की यह सफलता इस बात का भी प्रमाण है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी बड़े सपने देख सकते हैं और उन्हें पूरा कर सकते हैं.

छोटे जिले से बड़ा कमाल
जिला शिक्षा अधिकारी उन्मेष श्रीवास्तव ने बताया कि निवाड़ी जैसे छोटे से जिले से 5 बच्चों ने मध्यप्रदेश की प्राविण्य सूची में अपना परचम लहराया है. उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में गरीब बच्चे पढ़ते है. उन्हें बहुत ज्यादा सुविधाएं नहीं होती हैं. इस साल दसवी और बारवहीं का परीक्षा परिणाम 66 प्रतिशत रहा. यह साबित करता है कि प्रतिभा, किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती. यह सिर्फ एक छात्रा की सफलता नहीं है, यह एक मां के आंसुओं की जीत है, एक पिता के संघर्ष की जीत है और एक छोटे गांव के बड़े सपनों की जीत है.



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