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Khandwa News: ‘श्री दादाजी ग्रीन नर्सरी’ की शुरुआत उन्होंने 5 से 7 लाख रुपये से की थी. शुरुआती वक्त में उन्हें उधारी पर पौधे लाने पड़े लेकिन धीरे-धीरे काम बढ़ा और आज उनका कारोबार करोड़ों तक पहुंच चुका है.
खंडवा. मध्य प्रदेश के खंडवा के एक रिटायर्ड प्रोफेसर ने यह साबित कर दिया कि जुनून और मेहनत के सामने उम्र कभी बाधा नहीं बनती. पॉलीटेक्निक कॉलेज के प्रोफेसर रहे बीडी सनखरे (भगवान दास सनखरे) ने रिटायरमेंट के बाद आराम करने के बजाय एक नई शुरुआत की और आज उनकी मेहनत रंग ला रही है. महज एक एकड़ जमीन से शुरू हुई उनकी ‘श्री दादाजी ग्रीन नर्सरी’ आज न सिर्फ खंडवा बल्कि पूरे मध्य प्रदेश और देश के कई राज्यों में अपनी पहचान बना चुकी है. यहां से सजावटी, औषधीय और फलदार पौधों की सप्लाई बड़े स्तर पर की जा रही है और यह छोटा सा प्रयास आज करोड़ों के कारोबार में बदल चुका है. बीडी सनखरे का पौधों के प्रति लगाव नया नहीं है. जब वह पॉलीटेक्निक कॉलेज में प्रोफेसर थे, तब भी उन्होंने कॉलेज परिसर सहित शहर और अपने गांव में बड़े स्तर पर वृक्षारोपण किया था. वह हमेशा से लोगों को पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करते रहे. रिटायरमेंट के बाद उनका यह जुनून और बढ़ गया. वह खंडवा को हरा-भरा बनाने के मिशन से जुड़े और लगातार पौधारोपण के कार्य में सक्रिय रहे.
बीडी सनखरे लोकल 18 को बताते हैं कि कोरोना काल में जब लॉकडाउन लगा, तब उनके बेटे भी घर पर आ गए. उस समय उन्होंने खाली समय का उपयोग करते हुए पौधे तैयार करने का काम शुरू किया. कुछ ही महीनों में उन्होंने दो से ढाई लाख पौधे तैयार कर लिए. जब पौधे तैयार हो गए, तो सबसे बड़ी चुनौती थी उन्हें बेचने की. तभी उनके बेटे ने नर्सरी खोलने का सुझाव दिया और साल 2020 में ‘श्री दादाजी ग्रीन नर्सरी’ की शुरुआत हुई.
संघर्ष के बाद मिली पहचान
शुरुआत आसान नहीं थी. वह खुद कहते हैं कि किसी भी व्यापार को दो-तीन दीवाली दिखानी पड़ती हैं, यानी शुरुआती समय में संघर्ष करना पड़ता है. कई लोगों ने उनके काम में बाधाएं डालने की कोशिश भी की लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने अपने ग्राहकों को भगवान मानते हुए हमेशा गुणवत्ता पर ध्यान दिया. उनका लक्ष्य रहा कि जो भी पौधा ग्राहक तक पहुंचे, वह स्वस्थ और बेहतर हो. यही कारण है कि धीरे-धीरे उनकी नर्सरी की पहचान बनती गई.
देशभर में पहुंचा कारोबार
आज ‘श्री दादाजी ग्रीन नर्सरी’ से पौधे मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, गोवा, मुंबई, जयपुर, जोधपुर, यूपी, दिल्ली और अहमदाबाद जैसे शहरों तक भेजे जा रहे हैं. उन्होंने ऑनलाइन सप्लाई भी शुरू कर दी है, जिससे उनका नेटवर्क और मजबूत हुआ है. सनखरे बताते हैं कि उनके पास कुछ ऐसे खास पौधे भी हैं, जो देश में बहुत कम जगह मिलते हैं. उन्होंने बड़े ग्रुप्स जैसे ताज होटल को भी पौधे सप्लाई किए हैं और अब गुजरात के जामनगर स्थित बड़े प्रोजेक्ट्स से भी उनकी बातचीत चल रही है.
छोटे निवेश से करोड़ों का सफर
इस नर्सरी की शुरुआत उन्होंने महज 5 से 7 लाख रुपये की पूंजी से की थी. शुरुआती समय में उन्हें उधारी पर पौधे लाने पड़े लेकिन धीरे-धीरे काम बढ़ा और आज यह कारोबार करोड़ों तक पहुंच चुका है. उनका लक्ष्य आने वाले समय में 10 करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल करना है.
पर्यावरण के लिए भी काम
सनखरे सिर्फ व्यवसाय तक सीमित नहीं हैं बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए भी काम कर रहे हैं. वह अपने गांव हरदा जिले के गोपालपुरा में मंदिरों और श्मशान घाटों में पौधारोपण करने की योजना बना रहे हैं. उनका उद्देश्य है कि हर जगह हरियाली फैले.
बीडी सनखरे की कहानी यह बताती है कि अगर इरादा मजबूत हो और काम के प्रति लगाव हो, तो रिटायरमेंट के बाद भी नई ऊंचाइयां हासिल की जा सकती हैं. उन्होंने यह साबित कर दिया कि सफलता उम्र की मोहताज नहीं होती बल्कि सोच और मेहनत पर निर्भर करती है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.