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Agriculture News: किसान चितरंजन चौरसिया ने लोकल 18 से कहा कि किसानों के पास गोबर और गोमूत्र आसानी से उपलब्ध हो जाता है. जैविक और प्राकृतिक खेती से किसानों को यह फायदा होता है कि खेती में लागत कम हो जाती है. किसान केवल 100 रुपये में जीवामृत तैयार कर सकते हैं.
छतरपुर. मध्य प्रदेश के छतरपुर के प्रगतिशील किसान चितरंजन चौरसिया सालों से प्राकृतिक और जैविक खेती कर रहे हैं. वह दूसरे किसान भाइयों को प्रशिक्षण भी देते हैं. किसान चितरंजन चौरसिया लोकल 18 से बातचीत में बताते हैं कि प्राकृतिक खेती और जैविक खेती दोनों अलग हैं. हमारे यहां कृषि विभाग द्वारा प्राकृतिक खेती और जैविक खेती प्रशिक्षण के शिविर भी लगाए जाते हैं. उन्होंने बताया कि जैविक खेती वह होती है, जिसमें रासायनिक उर्वरकों की जगह जैविक खाद का प्रयोग किया जाता है, जैसे- वर्मी कंपोस्ट, केंचुआ खाद आदि बनाते हैं. ये जैविक खेती के अंतर्गत उपयोग किए जाते हैं. आजकल जैविक खेती का चलन तेजी से बढ़ रहा है. छतरपुर जिले में हजारों लोग जैविक खाद बनाने का प्रशिक्षण ले चुके हैं.
उन्होंने आगे बताया कि प्राकृतिक खेती प्राकृतिक संसाधनों से की जाती है. प्राकृतिक संसाधनों से जो खाद निर्मित होती है, उसे प्राकृतिक खेती कहते हैं. इसमें प्राकृतिक तरीके से ही कीटनाशक तैयार करते हैं, जैसे- जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत और सप्तधान्य. ये प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले खाद और कीटनाशक हैं.
उन्होंने कहा कि हमारे यहां समय-समय पर जैसे इनकी आवश्यकता होती है, इन्हें तैयार किया जाता है. तैयार करने के बाद हम इनका खेत में उपयोग करते हैं. इसका मुख्य सूत्र यह है कि प्राकृतिक खाद डालने से जमीन के अंदर करोड़ों बैक्टीरिया पैदा होते हैं. ये खेत की उपज को बढ़ाते हैं.
प्राकृतिक खेती है फायदेमंद
किसान चितरंजन बताते हैं कि किसानों के पास गोबर और गोमूत्र आसानी से उपलब्ध होता है. ये दोनों चीजें किसानों के पास रहती हैं. इस खेती से किसानों को फायदा यह होता है कि उनकी खेती में लागत कम आती है. चितरंजन बताते हैं कि किसान 100 रुपये में ही जीवामृत तैयार कर सकते हैं. यह जीवामृत गुड़ और बेसन से तैयार किया जाता है. एक एकड़ में 200 लीटर डाल सकते हैं. सिंचाई के साथ में ही इसे डाल सकते हैं.
कृषि एक्सपर्ट ने बताई सच्चाई
वहीं कृषि एक्सपर्ट डॉ कमलेश अहिरवार लोकल 18 को बताते हैं कि जैविक और प्राकृतिक खेती को केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार तक बढ़ावा दे रही है क्योंकि शरीर को स्वस्थ और लंबे समय तक जीवित रहना है, तो प्राकृतिक और जैविक खेती को अपनाना होगा. आप जैविक खेती करें या प्राकृतिक खेती, दोनों में शुरुआत में आपको उत्पादन कम मिलता है लेकिन आप इसे छोटी सी जगह में अपने खाने के लिए तो तैयार कर ही सकते हैं. जैविक और प्राकृतिक खेती दोनों में लागत नाम मात्र की आती है लेकिन शुरुआत के तीन साल तक उत्पादन भी कम मिलता है. हालांकि इसके बाद उत्पादन बढ़ता है. इसे हम सस्टेनेबल फार्मिंग भी कह सकते हैं.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.