ये शहर कैसे बना देश की सीमेंट सिटी? मिनरल्स की खोज से रिवोल्यूशन तक का कहानी

ये शहर कैसे बना देश की सीमेंट सिटी? मिनरल्स की खोज से रिवोल्यूशन तक का कहानी


Last Updated:

Cement city of India: विंध्य क्षेत्र की गोद में बसा सतना आज देश के सबसे बड़े सीमेंट हब के रूप में उभर चुका है. यहां की मजबूत इंडस्ट्रियल स्ट्रक्चर, मॉडर्न टेक्नोलॉजी और मेजर इन्वेस्टमेंट ने इसे राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी पहचान दिलाई है जहां से हर दिन हजारों टन सीमेंट देशभर में सप्लाई होता है. सतना के विंध्य पठार क्षेत्र में चूना पत्थर और डोलोमाइट के विशाल भंडार पाए जाते हैं. यहां से उत्पादित सीमेंट देश के विभिन्न राज्यों के साथ साथ विदेशों तक भी भेजा जाता है. यही वजह है कि सतना आज न सिर्फ मध्यप्रदेश बल्कि पूरे भारत के सीमेंट उद्योग में एक अहम स्थान रखता है.

सतना: मध्यप्रदेश का सतना जिला आज देशभर में सीमेंट सिटी के नाम से जाना जाता है लेकिन इस पहचान के पीछे दशकों की मेहनत, प्राकृतिक संपदा और औद्योगिक दूरदर्शिता की एक लंबी कहानी छिपी है. विंध्य क्षेत्र की धरती में छिपे खनिज खजाने ने न सिर्फ इस इलाके की किस्मत बदली बल्कि इसे देश के सबसे बड़े सीमेंट उत्पादन केंद्रों में शामिल कर दिया. यह सफर 20वीं सदी की शुरुआत से शुरू होकर आज वैश्विक स्तर तक पहुंच चुका है.

सतना के विंध्य पठार क्षेत्र में चूना पत्थर और डोलोमाइट के विशाल भंडार पाए जाते हैं. सीमेंट निर्माण के लिए चूना पत्थर सबसे महत्वपूर्ण कच्चा माल होता है और यही वजह रही कि 1900 के दशक की शुरुआत में ही भू वैज्ञानिकों ने इस क्षेत्र की क्षमता को पहचान लिया था. उच्च गुणवत्ता वाले खनिजों की उपलब्धता ने इस इलाके को भविष्य के औद्योगिक विकास के लिए तैयार कर दिया. इसके साथ ही यहां बॉक्साइट, आयरन ओर और अन्य माइनर मिनरल की मौजूदगी ने इसे और भी समृद्ध बनाया.

बिरला की पहल से शुरू हुआ औद्योगिक दौर
सतना के औद्योगिक विकास की असली शुरुआत 1950 के दशक में हुई जब बिरला कॉर्पोरेशन ने इस क्षेत्र में निवेश का फैसला लिया. साल 1957 में सतना सीमेंट वर्क्स के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई और करीब तीन साल बाद 1959 में उत्पादन शुरू हो गया. उस समय यह भारत की सबसे बड़ी एकल सीमेंट यूनिट में से एक थी. इस फैक्ट्री ने न केवल स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार दिया बल्कि अन्य उद्योगपतियों का ध्यान भी इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. 1974-75 तक इस यूनिट में 1200 से अधिक लोग काम कर रहे थे जो उस दौर में एक बड़ी उपलब्धि थी.

तकनीकी बदलाव और कंपनियों का विस्तार
समय के साथ सतना की सीमेंट इंडस्ट्री में तकनीकी और संरचनात्मक बदलाव आए. 1989 में यहां की फैक्ट्रियों ने पारंपरिक वेट प्रोसेस को छोड़कर आधुनिक ड्राई प्रोसेस तकनीक को अपनाया जिससे उत्पादन क्षमता में कई गुना वृद्धि हुई और लागत भी कम हुई. इसी दौर में कई बड़ी कंपनियों ने सतना और आसपास के क्षेत्रों में अपने प्लांट स्थापित किए. प्रिज्म सीमेंट, मैहर सीमेंट, के.जे.एस. सीमेंट और भिलाई जे.पी. सीमेंट जैसी कंपनियों के आगमन ने इस क्षेत्र को एक मजबूत औद्योगिक हब में बदल दिया.

खनिज संपदा बनी मजबूती की रीढ़
सतना जिले की ताकत सिर्फ चूना पत्थर तक सीमित नहीं है. यहां मैहर और उचेहरा क्षेत्रों में बॉक्साइट के भंडार हैं जबकि कुछ हिस्सों में आयरन ओर भी पाया जाता है. इसके अलावा गेरू, फर्शी पत्थर, रेत, मुरूम, लैटेराइट और निम्न श्रेणी चूना पत्थर जैसे गौण खनिज भी यहां उपलब्ध हैं जो निर्माण और अन्य उद्योगों में उपयोगी साबित होते हैं. यही विविधता सतना और आए पास के क्षेत्रों को औद्योगिक दृष्टि से और अधिक मजबूत बनाती है.

आज का सतना, एक यूनिवर्सल सीमेंट हब
वर्तमान में सतना और मैहर क्षेत्र में करीब 10 बड़ी सीमेंट फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं. वहीं अगर सिर्फ सतना की बात करें तो यहां 6 सीमेंट की बड़ी कंपनियां संचालित हो रही है. यहां से उत्पादित सीमेंट देश के विभिन्न राज्यों के साथ साथ विदेशों तक भी भेजा जाता है. मजबूत रेलवे नेटवर्क और सड़कों का जाल इस व्यापार को और आसान बनाता है.

About the Author

Mohd Majid

with more than more than 5 years of experience in journalism. It has been two and half year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am cover…और पढ़ें



Source link