उज्जैन में ‘मौत के कागज’ से 8 करोड़ का इंश्योरेंस खेल, 40 पर FIR

उज्जैन में ‘मौत के कागज’ से 8 करोड़ का इंश्योरेंस खेल, 40 पर FIR


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उज्जैन में 8 करोड़ के बीमा (इंश्योरेंस) घोटाले की साजिश का खुलासा हुआ है. जांच में सामने आया कि मृत और बीमार लोगों के नाम पर पॉलिसियां लेकर फर्जी डेथ सर्टिफिकेट के जरिए क्लेम की साजिश रची गई. इस मामले में 27 पॉलिसियां संदिग्ध पाई गई हैं और करीब 40 लोगों को आरोपी बनाया गया है. EOW ने जांच शुरू कर दी है.

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उज्‍जैन आर्थिक अपराध शाखा ने जांच शुरू कर दी है.

उज्जैन.  जिले में एक बड़े और संगठित बीमा (इंश्योरेंस) घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसने सरकारी सिस्टम और निजी बीमा प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच में सामने आया है कि करीब 8 करोड़ रुपये के बीमा क्लेम को फर्जी तरीके से हासिल करने की साजिश रची गई. इस पूरे खेल में बीमा एजेंट, पॉलिसीधारक, उनके नॉमिनी और पंचायत स्तर के जिम्मेदार लोग शामिल पाए गए हैं. मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है. इस मामले में पंच-सरपंच, बैंक एजेंट समेत 40 लोगों पर एफआईआर हुई है.

इस घोटाले की खास बात यह है कि इसमें मृत व्यक्तियों और गंभीर रूप से बीमार लोगों के नाम का इस्तेमाल कर पॉलिसियां ली गईं और बाद में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर क्लेम की कोशिश की गई. जांच एजेंसी के अनुसार यह पूरी तरह से संगठित नेटवर्क था, जिसमें सरकारी दस्तावेजों का दुरुपयोग कर बीमा कंपनियों को चूना लगाने की कोशिश की गई. EOW ने इस मामले में केस दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है और आने वाले दिनों में बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है.

मृत व्‍यक्तियों के नाम पर बीमा पॉलिसी की शिकायत 
EOW को 3 सितंबर 2025 को शिकायत मिली थी कि उज्जैन और मंदसौर क्षेत्र में मृत व्यक्तियों के नाम पर बीमा पॉलिसियां जारी की जा रही हैं. प्रारंभिक जांच में ही बड़े फर्जीवाड़े के संकेत मिल गए थे. जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने ऐसे लोगों के नाम पर बीमा पॉलिसियां लीं जो या तो पहले से गंभीर रूप से बीमार थे या जिनकी पहले ही मौत हो चुकी थी. इसके बाद उन्हें जीवित दिखाकर दस्तावेज तैयार किए गए.

फर्जी डेथ सर्टिफिकेट से क्लेम की कोशिश 
पॉलिसी जारी होने के बाद आरोपियों ने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाए. पंचायत स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत से दस्तावेजों को वैध दिखाया गया. इसके आधार पर बीमा कंपनी में क्लेम प्रस्तुत किए गए. EOW के अनुसार कुल 27 बीमा पॉलिसियां संदिग्ध पाई गई हैं. इनमें 19 मामलों में बीमारी छुपाई गई, जबकि 8 मामलों में मृत व्यक्तियों के नाम पर पॉलिसी जारी की गई. इस मामले में करीब 40 लोगों को आरोपी बनाया गया है.

बीमा एजेंट, सरपंच, सचिव और नॉमिनी पर संदेह  
जांच में बीमा (इंश्योरेंस) एजेंट, ब्रोकर्स, पंचायत के सरपंच, सचिव और सहायक सचिव की भूमिका सामने आई है. साथ ही कई नॉमिनी को भी आरोपी बनाया गया है, जिन्होंने क्लेम प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई. आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश की धाराओं में केस दर्ज किया गया है. इसमें IPC की धारा 417, 420/511, 467, 468, 471 और 120B के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 भी शामिल है. EOW अब दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कर रहा है. साथ ही आरोपियों से पूछताछ जारी है. जांच एजेंसी को शक है कि यह नेटवर्क और भी बड़ा हो सकता है. आने वाले समय में और नाम सामने आ सकते हैं.

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Sumit verma

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें



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