न काम करते थे न शादी हो रही थी! शराब से परेशान हुई महिलाएं तो बनाए अनोखे नियम

न काम करते थे न शादी हो रही थी! शराब से परेशान हुई महिलाएं तो बनाए अनोखे नियम


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बुजुर्गों से लेकर युवा तक शराब की चपेट में आने से गांव की महिलाएं शराब और उसके आतंक से परेशान थी. गांव के हालात खराब होते जा रहे थे फिर यहां की महिलाओं ने जिम्मेदारी संभाली और कुछ महिलाओं ने मिलकर कड़ी प्लानिंग की, अब गांव नशे से मुक्ति की राह पर है.

एक तरफ बालाघाट में महिलाएं शराब दुकानों का विरोध कर रही है. तो दूसरी तरफ सामाजिक प्रयासों से गांव में बड़ा बदलाव आया है. दरअसल, बालाघाट के बैहर तहसील के आने वाले ग्राम कदला में शराब के विरोध में साल भर पहले अभियान छिड़ा. गांव में बुजुर्गों से लेकर युवा तक शराब की चपेट में आ चुके थे. गांव की महिलाएं शराब और उसके आतंक से परेशान थी. फिर महिलाओं ने कड़ी प्लानिंग की, अब गांव नशे से मुक्ति की राह पर है. ऐसे में इस गांव की महिलाओं ने क्या तरकीब निकाली, जिससे बदली गांव की सुरत, जानिए लोकल 18 की खास रिपोर्ट में…

बैहर ब्लॉक के कदला गांव में शराब की लत की वजह से लोगों के बसे बसाए घर परिवार टूट जाते थे. बहुएं मायके चली जाती थी. वहीं, गांव की युवाओं की लत की वजह से लोग इस गांव में बेटी ब्याहने से डरते थे. ऐसे में बड़ी उम्र तक युवा बिन ब्याहे ही रह जाते थे. शराब ही एक वजह थी, जिससे गांव में कई रिश्ते टूट गए. बच्चों की पढ़ाई रुक गई. महिलाओं को हिंसा झेलनी पड़ी है, इसलिए सभी ने एक मत होकर शराबबंदी करने का निर्णय लिया. इसके परिणाम एक माह के भीतर ही मिलने लगे हैं.

कच्ची शराब बनी तबाही का कारण
ग्रामीण बताते हैं कि गांव के लोग सालों से कच्ची महुआ की शराब बनाते आ रहे है. वहीं, बचपन से ही लड़कों को शराब का चस्का लग जाता था. बड़ी उम्र आते-आते यह चस्का लत में बदल गई और काम कर युवा जिंदगी संवारने के बजाए गांव में नशे में घूमते रहते थे.

14 महिलाओं की शुरुआत फिर पूरा गांव हुआ शामिल
शराब बंद करने के लिए सबसे पहले 14 महिलाएं सामने आई. इसके बाद हर घर की महिलाओं को शराब के नुकसान बताए गए हैं. इसमें जागरूक पुरुषों ने भी मदद किया है. जिसका नतीजा है कि शराब बनाने पर पाबंदी लगी है. ग्राम कदला में 400 मकानों में 1460 आबादी है. अब जल्द ही ग्राम पंचायत कदला के अंतर्गत हीरापुर जिसमें 250 मकान में आबादी 900, नवलपुर 200 मकान में 650 आबादी है. इन दोनों गांव में भी शराबबंदी की जाएगी.

ऐसे बदली गांव की तस्वीर
शुरुआत में जब महिलाओं ने लोगों को समझाइश देना शुरू किया. तब कोई बात नहीं मानता था. महिलाएं एक मत थी. ऐसे में गांव की सरपंच लक्ष्मी मेरावी ने महिलाओं के साथ नई तरकीब सोची. इसमें महिलाओं ने शराब पीने वालों पर कड़ी नजर रखी, जिसके बाद महिलाओं ने आर्थिक दंड का प्रावधान भी रखा, जिसमें शराब बनाने वालों पर 10 हजार रुपए और नशे की हालत में पाए जाने पर 2500 रुपए का आर्थिक दंड रखा. नतीजतन, महिलाओं ने 10 शराबियों से महज एक महीने में 10 हजार रुपए वसूल लिए है. महिलाओं का कहना है कि इन पैसों को गांव की जरूरत के मुताबिक खर्च करेंगी.

एक महीने में आया बदलाव
महिलाओं का कहना है कि गांव में अब लोग सुधर रहे हैं. कम ही लोग है, जो शराब के नशे में दिखते हैं. वहीं, गांव में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह है. यह बदलाव महज एक महीने में आया है. अब वह इस अभियान को और आगे बढ़ाना चाहती है, जिससे गांव ही नहीं देश भी उन्नति कर सकें.

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Mohd Majid

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