मक्का के खेतों में तबाही मचा रहा ये कीट, जानें रोकथाम के असरदार टिप्स, समय रहते संभलें किस

मक्का के खेतों में तबाही मचा रहा ये कीट, जानें रोकथाम के असरदार टिप्स, समय रहते संभलें किस


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फसल के अंदर छिपा खतरनाक कीट! मक्का को बचाने के लिए तुरंत अपनाएं ये तरीके

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Farming Tips: मक्का किसानों के लिए फॉल आर्मीवर्म कीट बड़ी चुनौती बन गया है. यह कीट पौधे की गोभ में छिपकर पत्तियों को खाकर फसल की बढ़वार रोक देता है. पहचान के लिए पत्तियों में छेद और भूरे लार्वा देखें और नियंत्रण के लिए समय पर निगरानी, फेरोमोन ट्रैप, नीम आधारित दवा और जरूरत पड़ने पर अनुशंसित कीटनाशक का छिड़काव जरूरी है.

Farming Tips: मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में मक्के की फसल पर फॉल आर्मीवर्म नाम का खतरनाक कीट तेजी से फैल रहा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. यह कीट मक्का उत्पादकों के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरा है, क्योंकि यह सीधे पौधे की गोभ यानी अंदरूनी कोमल हिस्से पर हमला करता है. इसके कारण पौधे की बढ़वार रुक जाती है और पैदावार में भारी गिरावट आने का खतरा बना रहता है. कृषि विशेषज्ञ अवनीश पटेल के अनुसार, फॉल आर्मीवर्म एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का क्वारंटाइन पेस्ट है, जो मक्के की फसल को बहुत तेजी से नुकसान पहुंचाता है. यह कीट पौधे की गोभ में घुसकर उसे अंदर से खा जाता है और वहीं पर मलमूत्र त्यागता है. किसान जब पौधे की जांच करते हैं तो गोभ के अंदर कीट का बीट दिखाई देता है, जो इसके हमले की स्पष्ट पहचान है.

कीट को बढ़ने से कैसे रोकें
अवनीश पटेल के मुताबिक, कीट का जीवन चक्र 5 से 6 अवस्थाओं में पूरा होता है. शुरुआती अवस्था में इसका नियंत्रण आसान होता है, लेकिन जैसे-जैसे इल्ली बड़ी होती जाती है,  तो इसे नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है. अंतिम अवस्था की इल्लियां सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं और उन पर सामान्य कीटनाशकों का असर भी कम हो जाता है. इसलिए समय रहते पहचान और रोकथाम बेहद जरूरी है.

फॉल आर्मीवर्म के नियंत्रण के लिए कृषि विशेषज्ञों ने कम लागत वाला जहरीला चारा तैयार करने की सलाह दी है. इसके लिए 10 किलो भूसे को 2 लीटर पानी और गुड़ के साथ 24 घंटे तक भिगोकर रखा जाता है. इसके बाद इसमें 100 ग्राम थायोडिकार्ब मिलाया जाता है और अगले 48 घंटे बाद इसकी छोटी-छोटी गोलियां बना ली जाती हैं. इन गोलियों को शाम के समय मक्का पौधों की गोभ में डालने से कीट को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है.

अगर किसान यह चारा तैयार नहीं कर पाते हैं, तो वे इमामेक्टिन बेंजोएट जैसे कीटनाशक का छिड़काव भी कर सकते हैं, जो काटने और कुतरने वाले कीटों पर काफी असरदार माना जाता है. कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, बल्कि नियमित निगरानी करें और वैज्ञानिक तरीके अपनाएं. सही समय पर नियंत्रण उपाय अपनाकर फसल को बचाया जा सकता है और अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है.

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Deepti Sharma

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें



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