Last Updated:
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले से महज कुछ किलोमीटर दूर स्थित बोरगांव खुर्द आज पूरे देश में पहलवानों का गांव के नाम से अपनी अलग पहचान बना चुका है. यहां करीब 3300 की आबादी वाले इस छोटे से गांव ने अब तक 250 से ज्यादा पहलवान देश को दिए हैं, जिनमें कई खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर गांव और देश का नाम रोशन कर चुके हैं
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले से महज कुछ किलोमीटर दूर स्थित बोरगांव खुर्द आज पूरे देश में “पहलवानों का गांव” के नाम से अपनी अलग पहचान बना चुका है. करीब 3300 की आबादी वाले इस छोटे से गांव ने अब तक 250 से ज्यादा पहलवान देश को दिए हैं, जिनमें कई खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर गांव और देश का नाम रोशन कर चुके हैं. खास बात यह है कि यहां सिर्फ लड़के ही नहीं, बल्कि बेटियां भी बराबरी से अखाड़े में उतरकर अपने दमखम का प्रदर्शन कर रही हैं.
इस गांव की मिट्टी में ही जैसे कुश्ती बसती है. यहां हर घर से कोई न कोई पहलवान जरूर निकलता है। कोई सरकारी नौकरी में है, तो कोई देश के लिए मेडल जीत रहा है. खेतों की मिट्टी में खेलते-खेलते यहां के बच्चों ने अखाड़े तक का सफर तय किया और आज राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना रहे हैं। यही वजह है कि बोरगांव खुर्द को अब कुश्ती का पावरहाउस कहा जाने लगा है.
गांव के 60 से अधिक खिलाड़ी नेशनल लेवल तक पहुंचे
गांव में कुश्ती की इस परंपरा को आगे बढ़ाने में कोच जगदीश पटेल की भूमिका बेहद अहम रही है। वे खुद भी पहलवान रह चुके हैं. लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के कारण इस खेल को आगे नहीं बढ़ा सके। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और गांव के बच्चों को तैयार करने का जिम्मा उठा लिया. मजदूरी करके अपने बच्चों को पढ़ाया और कुश्ती की ट्रेनिंग दिलाई। आज वे गांव के बच्चों को निशुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं. उनके प्रयासों का ही परिणाम है कि अब तक गांव के 60 से अधिक खिलाड़ी नेशनल लेवल तक पहुंच चुके हैं, जिनमें 30 से ज्यादा खिलाड़ी नेशनल मेडलिस्ट हैं. कई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.
रोजाना 150 से ज्यादा खिलाड़ी कर रहे अभ्यास
इस गांव की एक और खासियत यह है कि यहां बेटियों को भी बेटों के बराबर अवसर दिए जाते हैं। माधुरी पटेल इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर 11 और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 2 पदक अपने नाम किए हैं. इसके अलावा नीरज पटेल, छाया पटेल, पवन पटेल, पायल पटेल, मुस्कान पटेल और उदित प्रकाश पटेल जैसे कई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं. पहले जहां गांव के लोग कुश्ती को केवल शौक के तौर पर अपनाते थे. वहीं अब यहां बेहतर सुविधाएं भी उपलब्ध हो चुकी हैं. गांव में मैट पर प्रशिक्षण की व्यवस्था है, जहां करीब 100 से 150 ज्यादा खिलाड़ी रोज अभ्यास करते हैं. इनमें गांव के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के खिलाड़ी भी शामिल हैं.खंडवा जिला कुश्ती संघ के पदाधिकारी भी इन खिलाड़ियों को हर संभव सहयोग दे रहे हैं, जिससे उन्हें आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं. किसानों ने भी अपने बच्चों को प्रोत्साहित किया और उन्हें खेतों से निकालकर अखाड़े तक पहुंचाया.