ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर जोर, सीएम बोले-प्रकृति के साथ चलना आज की जरूरत

ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर जोर, सीएम बोले-प्रकृति के साथ चलना आज की जरूरत


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भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विकास और पर्यावरण के संतुलन पर जोर देते हुए ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट को अपनाने की बात कही. उन्होंने प्राचीन भारतीय विज्ञान और राजा भोज की तकनीक को आज भी प्रासंगिक बताते हुए भोपाल की संरचना को सुरक्षित बताया.

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सीएम मोहन यादव

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को लेकर अहम बयान दिया. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट को अपनाया है, ताकि विकास के साथ-साथ पर्यावरण का भी संतुलन बना रहे. उन्होंने स्पष्ट किया कि आज के दौर में ग्लोबल वार्मिंग का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है, ऐसे में हमें विकास के साथ प्रकृति का भी ध्यान रखना होगा.सीएम ने अपने संबोधन में प्राचीन भारतीय ज्ञान और विज्ञान की सराहना करते हुए कहा कि हमारा पुरातन विज्ञान बेहद अद्भुत और उन्नत रहा है. उन्होंने भोपाल के प्रसिद्ध भोजताल का जिक्र करते हुए कहा कि यह केवल एक जल स्रोत नहीं, बल्कि खगोलीय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में जल संरचनाएं और शहरों का निर्माण बेहद वैज्ञानिक तरीके से किया जाता था.

डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नदियों की दिशा और प्राकृतिक संरचना के आधार पर तांत्रिक और सिद्ध पूजाओं की परंपरा भी रही है, जो हमारे सांस्कृतिक और वैज्ञानिक ज्ञान को दर्शाती है. उन्होंने उज्जैन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह शहर काल गणना का प्रमुख केंद्र रहा है, जहां से समय की गणना की जाती थी. मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भोपाल शहर का निर्माण राजा भोज की उन्नत तकनीक के आधार पर किया गया है, जो आज भी प्रासंगिक है. इसी मजबूत और वैज्ञानिक आधार के चलते आने वाले हजार वर्षों तक भोपाल को किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं है.

ग्रीन बिल्डिंग और पर्यावरण संरक्षण पर जोर
सीएम के इस बयान के बाद पर्यावरण और विरासत संरक्षण को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि प्राचीन तकनीकों और आधुनिक विज्ञान के समन्वय से ही सतत विकास संभव है.सरकार द्वारा ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट को बढ़ावा देने की पहल को भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल ऊर्जा की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी.फिलहाल, मुख्यमंत्री के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मध्यप्रदेश सरकार विकास के साथ-साथ अपनी ऐतिहासिक धरोहर और पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिए गंभीर है और आने वाले समय में इस दिशा में और ठोस कदम उठाए जा सकते हैं.



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