भिंड जिले में बकरी पालन योजना की सब्सिडी में फर्जीवाड़ा सामने आया है। पशुपालन विभाग ने ऐसे लोगों के नाम पर सब्सिडी जारी कर दी, जिन्होंने न तो योजना के तहत कोई लोन लिया और न ही आवेदन किया। जांच में सामने आया कि बीते 6 माह में अलग-अलग हितग्राहियों के नाम पर कुल 9 लाख 60 हजार रुपए 460 अटेर की सहकारी बैंक में ट्रांसफर हुए। यह खाता यूको बैंक शाखा अटेर में संचालित है। बाद में इस राशि को सहकारी बैंक के शाखा प्रबंधक ने चेक के जरिए नकद निकाल लिया। पूरे मामले में गंभीर बात यह है कि सब्सिडी ट्रांसफर कराने के लिए यूको बैंक अटेर शाखा का फर्जी पत्र लगाया गया। इसी पत्र के आधार पर पशुपालन विभाग ने ट्रेजरी के माध्यम से राशि जारी करा दी। जबकि यूको बैंक अटेर शाखा ने साफ कहा है कि उनकी शाखा से बकरी पालन योजना के तहत अब तक कोई ऋण मंजूर ही नहीं हुआ और न ही ऐसा कोई पत्र जारी किया गया। कब किस हितग्राही के नाम पर फर्जी सब्सिडी जारी हुई.. जानिए… क्या है बकरी पालन योजना राज्य सरकार की बकरी पालन योजना के तहत हितग्राही अधिकतम 10 मादा और 1 नर बकरी पाल सकता है। योजना में अधिकतम 77,455 रुपए की बकरियां शामिल होती हैं। अनुसूचित जाति वर्ग के हितग्राही को 60% और ओबीसी व सामान्य वर्ग के हितग्राही को 40 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। नियम के मुताबिक हितग्राही को पहले बैंक से लोन स्वीकृत होता है। इसके बाद सब्सिडी की राशि उसी बैंक को भेजी जाती है, जिसने ऋण दिया हो। पशुपालन विभाग की संलिप्तता
पशुपालन विभाग ने न तो इस पत्र का सत्यापन बैंक से कराया और न ही इसे रजिस्टर्ड डाक या आधिकारिक ईमेल से मंगाया। यह पत्र एक ‘निजी व्यक्ति’ के जरिए फाइल में लगवाया गया। पकड़े जाने पर ‘सेवा’ का प्रलोभन
जब सहकारी बैंक के शाखा प्रबंधक देशराज नरवरिया से इस बारे में सवाल किए गए, तो वे कैमरे के सामने निरुत्तर हो गए। वहीं बैंक कर्मचारी शिवकुमार पुरोहित ने मामले को दबाने के लिए रिपोर्टर को ‘सेवा’ (रिश्वत) देने की पेशकश तक कर डाली। यूको बैंक के फर्जी पत्र में 3 बड़ी खामियां
पत्र पर अमृत महोत्सव का लोगो नहीं है।
बैंक की सील केवल अंग्रेजी में, जबकि सामान्यतः हिंदी और अंग्रेजी दोनों में होती है।
हस्ताक्षर गलत हैं। पत्र पर जावक क्रमांक भी नहीं है। ग्राउंड रिपोर्ट: कागजी निकले लाभार्थी
भास्कर टीम जब प्रतापपुरा, परा और उदोतगढ़ जैसे गांवों में पहुंची, तो पता चला कि रिकॉर्ड में दर्ज कई लोग वहां रहते ही नहीं हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में ‘नरवरिया’ परिवार का कोई अस्तित्व ही नहीं है। स्पष्ट है कि कागजों पर फर्जी नाम तैयार कर सरकारी खजाना लूटा गया। पल्ला झाड़ते नजर आए जिम्मेदार हमें बैंक से ऋण मंजूरी का पत्र मिला था, हमने उसी आधार पर सब्सिडी भेजी। इसमें विभाग की क्या गलती? – डॉ. संजय राठौर, उप संचालक, पशुपालन विभाग हमारी शाखा ने बकरी पालन का एक भी लोन स्वीकृत नहीं किया है। विभाग को दिया गया पत्र पूरी तरह फर्जी और जाली है। -मनोज सक्सेना, शाखा प्रबंधक, यूको बैंक अटेर यह गंभीर मामला है। पशुपालन विभाग और बैंक से जानकारी मंगवाई जा रही है। जांच के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी। -किरोड़ीलाल मीना, कलेक्टर, भिंड
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