Cold will begin from November 15, due to La Nina effect, one and a half months will be a cold winter | 15 नवंबर से होगी ठंड की शुरुआत, ला नीना प्रभाव के चलते डेढ़ महीने पड़ेगी कड़ाके की सर्दी

Cold will begin from November 15, due to La Nina effect, one and a half months will be a cold winter | 15 नवंबर से होगी ठंड की शुरुआत, ला नीना प्रभाव के चलते डेढ़ महीने पड़ेगी कड़ाके की सर्दी


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जबलपुरएक घंटा पहले

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मौसम विभाग के मुताबिक नवम्बर और दिसम्बर के पहले सप्ताह तक गुलाबी ठंड रहेगी। जनवरी के आखिरी तक कड़ाके की ठंड पड़ेगी- फाइल फोटो।

  • दिसम्बर के आखिरी और जनवरी के पहले सप्ताह में गिर सकते हैं ओले

ला-नीना के प्रभाव के चलते इस बार डेढ़ महीने कड़ाके की ठंड पड़ेगी। मौसम विभाग के मुताबिक इस बार दिसम्बर के दूसरे सप्ताह से लेकर पूरी जनवरी ठंड पड़ेगी। पिछले साल की तुलना में इस बार 15 दिन अधिक ठंड रहेगी। जबलपुर समेत महाकौशल में 15 नवम्बर के लगभग ठंड की एंट्री होगी। इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई 28 अक्टूबर को हुई है। इससे पहले वर्ष 2016 में इतना लेट हुआ था। 28 सितम्बर को राजस्थान से इसकी शुरूआत हुई थी और पूरे एक महीने लगे। ऐसा 30 वर्ष पहले 1975 में हुआ था।

मौसम केंद्र भोपाल में रडार इंचार्ज वेदप्रकाश सिंह ने बताया कि धीरे-धीरे दिन का तापमान 30 डिग्री से कम होगा और रात का 16 से 18 के बीच रहेगा। नवम्बर से जम्मू-कश्मीर के ऊपर पश्चिमी विक्षोभ का असर रहेगा। जैसे-जैसे यह उत्तर भारत के मैदानी इलाकों की ओर शिफ्ट होगा ठंड का असर बढ़ता जाएगा। पूरा नवम्बर और दिसम्बर के पहले सप्ताह तक गुलाबी ठंड रहेगी। जनवरी के आखिरी तक कड़ाके की ठंड पड़ेगी। जनवरी में पाला पडऩे का अनुमान है। इसका असर पहले से तीसरे सप्ताह तक रहेगा। वहीं दिसम्बर के आखिरी और जनवरी के पहले सप्ताह में ओला वृष्टि का अनुमान है।

ऐसे समझें ला-नीना का प्रभाव
प्रशांत महासागर में पानी और हवा के सतही तापमान से ही बारिश, गर्मी और ठंड का पैटर्न तय होता है। ला-नीना प्रभाव में प्रशांत महासागर में दक्षिणी अमेरिका से इंडोनेशिया की तरफ हवाएं चलती हैं, जो सतह के गरम पानी को उड़ाने लगती हैं। इसका असर ये होता है कि सतह पर ठंड पानी उठने लगता है। जिससे सामान्य से ज्यादा ठंडक पूर्वी प्रशांत के पानी में देखी जाती है। ला नीना प्रभाव के चलते ठंड में हवाएं तेज चलती हैं। इससे भूमध्य रेखा के पास सामान्य से ज़्यादा ठंड हो जाती है। इसी का असर मौसम पर पड़ता है।



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