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हाेशंगाबाद43 मिनट पहले
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- 200 साल पुरानी परंपरा टूटेगी, हर साल आते हैं 2 से 2.50 लाख लोग
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कार्तिक पूर्णिमा पर 30 नवंबर काे नर्मदा-तवा के संगम बांद्राभान में लगने वाला मेला इस साल नहीं लगेगा। संगम स्थल सहित नर्मदा के सभी घाटाें पर स्नान पर भी सख्त राेक रहेगी। लाेग कार्तिक पूर्णिमा पर बांद्राभान संगम पर न पहुंचे इसके लिए हाेशंगाबाद जनपद पंचायत सभी गांवाें में मेला नहीं लगने और स्नान नहीं हाेने की मुनादी करवा रही है।
संगम पहुंच मार्ग पर प्रशासनिक अमला और पुलिस तैनात रहेगी। जनपद पंचायत सीईओ नमिता बघेल ने बताया मेला स्थगित किया गया है। लाेगाें काे मेला स्थल पर नहीं पहुंचने और स्नान नहीं करने के लिए मुनादी करवाई जा रही है।
संगम स्थल पर मेला नहीं लगेगा और न ही कर्तिक पूर्णिमा का स्नान करने दिया जाएगा। एसडीएम भारती मेरावी ने बताया कि काेराेना महामारी के कारण मेले पर राेक लगाई गई है। मेले में ग्रामीण क्षेत्राें की भीड़ आती है। लाेगाें को रोकने के लिए प्रशासनिक अमला तैनात रहेगा।
सूरजकुंड में भी स्नान पर रहेगा प्रतिबंध :12 अक्टूबर काे हुई शांति समिति की बैठक में बांद्राभान मेला नहीं लगाने पर निर्णय हुआ था। ऐसा 200 साल में पहली बार होगा। बांद्राभान संगम के साथ सूरजकुंड और पर्वों पर स्नान पर रोक लगाई है।
घाटों पर तैनात रहेंगे होमगार्ड के जवान
नर्मदा नदी में श्रद्धालु स्नान नहीं कर सकेंगे। डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट आरएसके चाैहान ने बताया बांद्राभान में 8, 10 सेठानी घाट, 5 काेरी घाट, 4 पाेस्ट ऑफिस घाट, 3 सर्किट हाउस घाट, 3 गाेंदरी घाट, 2 हाेमगार्ड जवान मंगलवारा घाट पर तैनात रहेंगे।
बांद्राभान मेले का महत्व : नर्मदा और तवा नदी का संगम है। ऐसी किवदंती है कि एक राजा को वानर की आकृति से यहां मोक्ष मिला था। तभी से मेला लगता है। कार्तिक पूर्णिमा पर संगम स्थल पर डुबकी लगाने से मनोकामना पूरी होती हैं।