ज्योतिष: इस साल विवाह का आखिरी मुहूर्त 11 दिसंबर को; गुरु और शुक्र अस्त होने से 22 अप्रैल तक शुभ कार्यों पर रोक

ज्योतिष: इस साल विवाह का आखिरी मुहूर्त 11 दिसंबर को; गुरु और शुक्र अस्त होने से 22 अप्रैल तक शुभ कार्यों पर रोक


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  • The Last Wedding Anniversary This Year Is On 11 December; Prohibition Of Auspicious Works Till 22 April From The Death Of Guru And Venus

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छतरपुरएक घंटा पहले

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सांकेतिक फोटो

  • 15 दिसंबर से मलमास

विवाह के लिए इस साल का आखिरी शुभ मुहूर्त 11 दिसंबर को है। पंडितों के अनुसार इस बार दो मलमास, गुरु और शुक्र तारा अस्त होने से करीब साढ़े तीन महीने तक मांगलिक कार्य नहीं होंगे। बता दें कि देवशयनी एकादशी से देव प्रबोधिनी एकादशी तक चार महीने इंतजार के बाद शुभ कार्यों की शुरुआत हुई थी। इनमें 29-30 को सबसे ज्यादा विवाह हुए। अब दिसंबर में सिर्फ 4 दिन ही मुहूर्त होने से बड़ी संख्या में विवाह होने की संभावना है।

15 दिसंबर से 16 जनवरी तक रहेगा मलमास

पंडित सतानंद पांडे ने बताया 15 दिसंबर से 14 जनवरी तक मलमास रहेगा। इसके बाद 16 जनवरी से 13 फरवरी तक गुरु अस्त होने से शुभ कार्य नहीं हो पाएंगे। इसी बीच 12 फरवरी से शुक्र अस्त होंगे, यह क्रम 17 फरवरी तक रहेगा। 15 मार्च से 13 अप्रैल तक फिर से मलमास रहने से किसी भी प्रकार के शुभ कार्य को करना वर्जित माना गया है। अगले साल 22 अप्रैल के बाद ही विवाह, उपनयन, गृह प्रवेश, मंदिर निर्माण, कुएं-बावड़ी खनन किया जा सकेगा।

2020 में थे 49 मुहूर्त, 26 दिन हो पाई शादी

बता दें कि इस साल जनवरी से मार्च तक होली से पहले 19 दिन ही मुहूर्त थे। फिर 15 मार्च से मलमास शुरू हो गया। इसके बाद कोरोना संक्रमण के चलते लॉक डाउन में अप्रैल से जून तक 23 मुहूर्त निकल गए। चातुर्मास के दौरान जुलाई से 24 नवंबर तक विवाह नहीं हो पाए। देवउठनी एकादशी से मांगलिक कार्य शुरु हुए। अब 11 दिसंबर तक 5, 7, 8 और 11 दिसंबर को विवाह के मुहूर्त हैं।

बसंत पंचमी पर भी नहीं हो पाएंगी शादी, क्योंकि शुक्र हो जाएगा अस्त

आने वाले नए वर्ष में 16 फरवरी को बसंत पंचमी है। इसे विवाह का अबूझ मुहूर्त माना जाता है लेकिन इस दिन सूर्योदय के साथ शुक्र तारा अस्त हो जाएगा। इस कारण इसे विवाह मुहूर्त में नहीं गिना है। हालांकि लोक परंपरा के चलते बसंत पंचमी पर विवाह होते हैं।

2021 में केवल 51 मुहूर्त : 2021 में विवाह के लिए केवल 51 दिन रहेंगे। बृहस्पति और शुक्र ग्रह के कारण साल के शुरुआती महीनों में विवाह नहीं होंगे। संक्रांति के बाद 19 जनवरी से 16 फरवरी तक गुरु तारा अस्त रहेगा। फिर 16 फरवरी से शुक्र तारा 17 अप्रैल तक अस्त रहेगा। इस कारण विवाह का दूसरा मुहूर्त 22 अप्रैल को है। इसके बाद देवशयन से पहले यानी 15 जुलाई तक 37 दिन विवाह के मुहूर्त है।



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