कुछ गुर्जर संगठन इस मांग को लेकर भी आगे आए हैं कि सचिन पायलट को अपनी अलग पार्टी बना कर सियासत करनी चाहिए. गुर्जर समाज में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि सचिन पायलट को कांग्रेस में अपमानित किया जा रहा है और अशोक गहलोत उनके ऊपर कई तरह के आरोप लगा रहे हैं. राजस्थान में उठे सियासी बवंडर को बीजेपी मध्य प्रदेश में कैश कराने की तैयारी में है. यही वजह है कि सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या विधानसभा उपचुनावों में सचिन पायलट एपिसोड कमलनाथ पर भारी पड़ सकता है?
क्या है गुर्जर वोटों का गणित?
ग्वालियर चंबल के उपचुनाव की 16 विधानसभा सीटों में से आठ पर गुर्जर वोटर निर्णायक भूमिका में हैं. वोटों के हिसाब से देखें तो मुरैना में 60,000, सुमावली में 45,000, जोरा में 18,000, दिमनी में 17,000, अंबाह में 9,000, मेहगांव में 27,000, गोहद में 23,000, ग्वालियर पूर्व में 10,000, डबरा में 10,000, ग्वालियर में 5,000, भांडेर में 10,000, बामोहरी में 5,000, मुंगावली में 5,000, अशोकनगर में 2,000 वोट गुर्जर समाज के हैं.26 विधानसभा सीटों पर होने हैं उपचुनाव
मध्य प्रदेश में आने वाले समय में विधानसभा की 26 सीटों पर उपचुनाव होना है. इनमें से सबसे ज्यादा 16 सीटें ग्वालियर चंबल संभाग की हैं. ग्वालियर चंबल में किसी भी पार्टी के लिए बढ़त बनाना उपचुनाव में निर्णायक साबित हो सकता है. यह उपचुनाव इसलिए भी अहम है क्योंकि जो पार्टी जितनी ज्यादा सीटें जीतेगी मध्य प्रदेश सरकार का भविष्य उसी पर निर्भर करेगा. ऐसे में किसी भी समाज को नाराज करने का जोखिम न तो सत्ताधारी बीजेपी लेना चाहेगी और न ही कांग्रेस. ऐसे में देखना होगा कि सचिन पायलट एपिसोड मध्य प्रदेश में कांग्रेस के वोटों पर कितना असर डालता है?