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इंदौरएक मिनट पहले
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चिड़ियाघर में सैनिटाइजेश के साथ अलग-अलग दवाओं का छिड़काव भी किया जा रहा है।
डेली कॉलेज परिसर में सोमवार को छह और मृत कौवे मिले। इसके साथ ही अब मृत कौवों की संख्या 154 हो गई है। वहीं, दुकानों में बिकने वाले 40 मुर्गों के सैंपल जांच के लिए भोपाल भेजे गए हैं। बर्ड फ्लू की आशंका के बीच डेली कॉलेज के आसपास के एरिया में सक्रियता बढ़ा दी गई। वहीं, इंदौर चिड़ियाघर काे भी सर्विलांस एरिया मानते हुए दवाइयों का छिड़काव शुरू कर दिया गया है। यहां पर सुबह-शाम पक्षियों के पिंजरे, जालियों सहित मुख्य स्थानों पर एंटी वायरल ड्रग का भी स्प्रे करवाया जा रहा है।
जू प्रबंधन पशु-पक्षियों को दिए जाने वाले पेय और खाद्य पदार्थों में इम्यूनाल मिला रहा है, जिससे उसकी रोक प्रतिरोधक क्षमता बढ़ सके। भोपाल भेजे गए सैंपलों की जांच में एच-5एन-8 एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस की पुष्टि हुई है। यह वर्ड फ्लू का एक टाइप तो है, लेकिन यह घातक नहीं है। क्योंकि इसका असर पक्षियों तक सीमित है, यह मनुष्य में नहीं फैलता है। इसके अलावा पोल्ट्री फार्म में भी एहतियात के लिए कुछ सैंपल लिए गए, लेकिन किसी प्रकार का संक्रमण सामने नहीं आया है।

सुबह शाम पूरे परिसर को सैनिटाइज भी किया जा रहा है।
एहतियात के तौर पर एक किमी के एरिए का सर्वे किया गया
डेली कॉलेज में संक्रमण मिलने के बाद पशु विभाग के साथ ही स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है। डेली कॉलेज के आसपास के क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की सर्वे टीम पहुंची और संक्रमण के बारे में पता लगाया। इसमें पालदा नाक, मूसाखेड़ी, आजाद नगर, रेसीडेंसी सहित कुछ और क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा कुछ पोल्ट्री फाॅर्म से भी सैंपल लिए गए हैं। सैंपल के जरिए यह पता किया गया कि मुर्गे-मुर्गिंयों में तो यह वायरस नहीं पहुंचा है। हालांकि अब तक इस प्रकार के कोई लक्षण यहां नजर नहीं आए हैं। इसके अलावा क्षेत्र में दुकानों में भी बिकने वाले मुर्गों के सैंपल लिए गए। जानकारों के अनुसार तीन-चार साल में इस प्रकार का वायरस पक्षियों में देखने को मिल जाता है। हालांकि यह मनुष्यों के लिए नुकसान दायक नहीं है।
जू प्रबंधन भी सतर्क, पेड़ों तक पर नहीं बैठने दे रहे बाहरी पक्षियों को
जू प्रबंधन तो हाई अलर्ट पर है। यहां दवाओं के छिड़काव के साथ ही बीमार पक्षियों का तत्काल इलाज किया जा रहा है। आसपास के पेड़ों के पास कर्मचारियों को भी तैनात कर दिया गया है, जिससे वे बाहरी पक्षियों को पेड़ पर बैठने से रोक सकें। इसके अलावा मृत पक्षियों का भी प्रोटोकॉल के साथ अंतिम संस्कार किया जा रहा है। जू प्रभारी डॉक्टर उत्तम यादव ने बताया कि चिड़ियाघर में बड़ी संख्या में पक्षी मौजूद हैं। जो बर्ड फ्लू वायरस डेली कॉलेज परिसर में मिला है। उस कारण हमारी टीम सतर्कता बनाए हुए हैं। वायरस की जानकारी मिलते ही प्राणी संग्रहालय को लगातार सैनिटाइज करवाया जा रहा है। सुबह-शाम अलग-अलग दवाई का छिड़काव हो रहा है। पक्षियों के खाने में भी इम्यूनाल मिलाया जा रहा है, जिससे इनकी प्रतिरोधक क्षमता मैं बढ़ोतरी हो सके। हमारे सारे पक्षी सुरक्षित हैं और किसी भी तरह का कोई संक्रमण फिलहाल नहीं है।
नमक और चूने के मिश्रण को डालकर दफना रहे मृत कौवों को
पशु चिकित्सा विभाग के अनुसार सोमवार को मिले मृत 6 कौवों के साथ अब इनकी संख्या 154 तक पहुंच गई है। सोमवार को जहां-जहां मृत कौवे मिले और जहां-जहां वे बैठकर गंदगी फैलाते हैं, सभी जगह को सैनिटाइज करने के साथ ही नमक और चूने का मिश्रण बनाकर छिड़काव करवाया गया। इसके अलावा मृत कौवों को दफनाने का भी काम किया गया। पक्षियों को डेली कॉलेज परिसर में ही गड्ढा खोदकर दफनाया जा रहा है। सबसे पहले गड्ढा खाेदकर उसमें नमक और चूना डाला जा रहा है। इसके बाद कौवाें को रखकर फिर से यह मिश्रण डालकर मिट्टी से दबाया जा रहा है। जहां तक संक्रमण के फैलने की बात करें तो फिलहाल किसी अन्य क्षेत्र में इसका वायरस नहीं फैला है। इंसानों में यह वायरस नहीं फैलता है।