कौवैक्सीन ट्रायल में हुई कथित मौत पर कॉलेज ने स्पष्टीकरण दिया है. (प्रतिकात्मक फोटो)
कॉलेज डीन ने कहा कि कौवैक्सीन ट्रायल डोज के 9 दिन के बाद इस प्रकार की मृत्यु होना वैक्सीन से संबंधित होने की संभावना नहीं लगती. वैक्सीन के फेस 3 के ट्रायल में 12 दिसंबर को पूरे प्रोटोकॉल के साथ वॉलंटियर दीपक मरावी को उसकी स्वेच्छा से आईपी का एक डोज दिया गया.
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January 11, 2021, 7:51 AM IST
दीक्षित ने कहा कि कौवैक्सीन ट्रायल डोज के 9 दिन के बाद इस प्रकार की मृत्यु होना वैक्सीन से संबंधित होने की संभावना नहीं लगती. वैक्सीन के फेस 3 के ट्रायल में 12 दिसंबर को पूरे प्रोटोकॉल के साथ वॉलंटियर दीपक मरावी को उसकी स्वेच्छा से आईपी का एक डोज दिया गया. इसके बाद 7 दिन तक फोन द्वारा उनकी जानकारी ली गई, जिसमें उन्होंने किसी भी प्रकार की तकलीफ होने की जानकारी नहीं दी. 21 दिसंबर को उनके बेटे ने उनकी मृत्यु होने की जानकारी फोन के माध्यम से सेंटर को दी.
वैक्सीन के ट्रायल पर हो रहा भ्रामक प्रचार
अनिल दीक्षित ने यह भी बताया कि मृत परिवार के साथ पूरी सहानुभूति रखते हुए दृढ़ निश्चय के साथ ट्रायल को पूरी प्रतिबद्धता के साथ करने के कृत संकल्पित है. यह मैं यह भी सूचित करना चाहता हूं कि कोविड-19 स्वास्थ्य आपदा को नियंत्रित करने हेतु की जा रही वैक्सीन ट्रायल पर इस तरह के भ्रामक सूचना प्रसार से विपरीत असर होता है एवं इस कार्य में लगे लोग हतोत्साहित होते हैं।निगरानी संस्था को हर जानकारी भेजी
डीन ने कहा कि ड्रग्स एवं क्लिनिकल ट्रायल के नए नियमों के अनुसार किन्ही भी सीरियस एडवर्स इफ़ेक्ट की रिपोर्ट इंस्टीट्यूट एथिक्स कमेटी एवं सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाइजेशन एवं डाटा मॉनिटरिंग सेफ्टी बोर्ड (NDCT) को देनी होती है. हमने भी प्रावधान के अनुसार ये रिपोर्ट दे दी है. डीन ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के शरीर किसी चीज के गंभीर प्रभाव होने के कई कारण हो सकते हैं. हमने हर तरह की जानकारी संस्था को भेज दी है.
दावा- हर तरह के निर्दशों का हो रहा पालन
दिक्षित ने अपने बयान में कहा कि भारत बायोटेक एवं नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी के सम्मिलित तत्वधान में बनाई गई को-वैक्सीन का फेस 3 ट्रायल देश के विभिन्न भागों में नवंबर माह से प्रारंभ हुआ. भोपाल के पीपुल्स हॉस्पिटल को इस ट्रायल के लिए चयनित किया गया. सेंटर में 27 नंवबर से ट्रायल प्रारंभ हुआ. यह एक ट्रायल है इसमें लोगों को वैक्सीन और आधे लोगों को प्लेसिबो लगाया जा रहा है. इसकी दो डोज 28 दिन के अंतराल में दी जा रही है. इस ट्रायल में आईसीएमआर भारत बायोटेक के द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन किया जा रहा है. हर दिन संस्था निगरानी रख रही है.