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- Judge Overturned By Victim Victim Statement, Judge Sentenced To Ten Years In Jail On DNA Report
भोपाल(कीर्ति गुप्ता)32 मिनट पहले
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- ज्यादती मामले में फरियादी नाबालिग लड़की, पिता और बड़ी बहन सहित 9 गवाह पलटे
- आदिवासी नाबालिग लड़की ज्यादती के शिकार होने के बाद गर्भवती हुई और एक मासूम बच्ची को जन्म दिया
ज्यादती के आरोपी हनीफ उर्फ हन्नू को बचाने के लिये फरियादी नाबालिग लड़की सहित 9 गवाह अदालत में अपने पुलिस बयान से पलट गये लेकिन जज ने सिर्फ डीएनए रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को दोषी मानते हुए उसे दस साल जेल की सजा सुनाई। बुधवार को सीहोर में पदस्थ विशेष न्यायाधीश विजय चंद्रा ने यह फैसला सुनाया। इस घटना में ज्यादती की शिकार नाबालिग लड़की आदिवासी थी और उसने एक मासूम बच्ची को जन्म दिया था। आरोपी ने जमानत लेने के लिये हाइकोर्ट में झूठा शपथ पत्र देकर कहा था कि वह फरियादी लड़की और मासूम को साथ रखना और उनकी देखभाल करना चाहता है। इसके चलते आरोपी को हाइकोर्ट से जमानत भी मिल गई थी। लेकिन जेल से छूटने के बाद न तो आरोपी ने फरियादी लड़की को साथ रखा और न ही मासूम को अपनाया। फरियादी आज भी अपनी मासूम बेटी के साथ अपने पिता के घर में रह रहीं है।
बच्ची के जन्म से हुआ था खुलासा
नसरूल्लागंज में रहने वाली आदिवासी लड़की की मां बचपन में ही गुजर गई थी। घर के पास एक निर्माणाधीन भवन में काम करने वाले आरोपी हनीफ उर्फ हन्नू की पहचान लड़की से हो गई। हनीफ 7 जुलाई 2017 से 7 दिसंबर 2017 तक लड़की को अपनी हवस का शिकार बनाता रहा। 7 दिसंबर को लड़की ने हनीफ को बताया कि वह गर्भवती हो गई है तो हनीफ उर्फ हन्नू ने लड़की को डरा धमकाकर उससे संबंध खत्म कर लिये। इसके बाद अगस्त 2018 के पहले सप्ताह में नाबालिग लड़की ने अपने ही घर में एक मासूम बच्ची को जन्म दिया। इसके बाद लड़की की हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया। जहां से डाक्टरों ने पुलिस को सूचना दी और पूरे मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद पुलिस ने नाबालिग लड़की की शिकायत पर हनीफ उर्फ हन्नू के खिलाफ धारा 376 व अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था।
अदालत की कार्रवाई
मामले में नसरूल्लागंज एसडीओपी अनिल त्रिपाठी ने चालान पेश करने के पहले ही आरोपी, ज्यादती की शिकार लड़की और उसकी मासूम बेटी का ब्लड सेंपल लेकर उसे डीएनए रिपोर्ट के लिये सागर भेज दिया था और रिपोर्ट आने के बाद 16 गवाहों के साथ चालान अदालत में पेश किया। न्यायाधीश विजय चंद्र के फैसले के मुताबिक अभियोजन ने 16 में से 14 गवाहों के बयान दर्ज कराये। खास बात यह रहीं कि अदालत में फरियादी लड़की, उसके पिता और बड़ी बहन सहित 9 गवाह अपने पुलिस बयान से पलट गये और उन्होंने आरोपी को बचाने के लिये उसे पहचानने से इंकार कर दिया। वहीं डाक्टर और पुलिस ने अपने बयान दर्ज करायें। न्यायाधीश विजय चंद्रा ने फैसले में लिखा कि एफएसएल सागर की फोरेसिंक लैब की ओर से पेश डीएनए रिपोर्ट से यह बात साबित होती है कि आरोपी ही मासूम बच्ची का पिता है। ऐसी स्थिति में आरोपी द्वारा नाबालिग लड़की से ज्यादती करने की बात स्वतः: ही सिद्ध होती है। अदालत ने वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर आदिवासी नाबालिग से ज्यादती करने वाले युवक हनीफ को ज्यादती का दोषी माना। न्यायाधीश विजय चंद्रा ने फैसले में लिखा कि कानून का उद्देश्य सच्चाई का पता लगाना था और अदालत में पेश डीएनए रिपोर्ट से सच्चाई सामने आ गई। डीएनए रिपोर्ट के आधार पर आरोपी हनीफ उर्फ हन्नू को दस साल जेल की सजा सुनाई जाती है।
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