सांकेतिक तस्वीर
बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) ने भी खर्च घटाने के लिए द्विस्तरीय मॉडल पर विचार करने की सलाह दी है.
- News18Hindi
- Last Updated:
January 30, 2021, 12:38 PM IST
बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) ने भी खर्च घटाने के लिए द्विस्तरीय मॉडल पर विचार करने की सलाह दी है. प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों का कंप्यूटरीकरण होने के बाद माना जा रहा है कि इसके बीच की कड़ी यानी कि जिला बैंक की जरुरत नहीं है.
बता दें कि प्रदेश में किसानों को रबी और खरीफ की फसलों के लिए प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के जरिए अल्पकालीन कृषि ऋण दिया जाता है. हर साल दस हजार करोड़ रुपये के आसपास कर्ज दिया जाता है. बीते कार्यकाल में शिवराज सरकार में सभी जिला बैंकों में कोर बैंकिंग व्यवस्था लागू कर चुकी है. जिसके बाद अब समितियों का कम्प्यूटरीकरण करने का फैसला किया है.