पिंक बॉल टेस्ट वाले मैच में तेज गेंदबाजों का बोलबाला रहता है. लेकिन अहमदाबाद में स्पिनरों का बोलबाला रहा.
Pink ball test match in Ahmedabad: जब जब डे नाइट टेस्ट मैच होता है, पिंक बॉल चर्चा में आ जाती है. ऐसे में कई क्रिकेट फैंंस के मन में ये सवाल आता है कि आखिर दिन रात के टेस्ट मैच में पिंक बॉल का इस्तेमाल ही क्यों होता है. वहीं डे नाइट वनडे और टी20 मैच सफेद बॉल से होते हैं.
- News18Hindi
- Last Updated:
February 25, 2021, 12:12 PM IST
क्रिकेट की शुरुआत लाल बॉल से हुई. लेकिन जब डे नाइट मैचों का आगमन हुआ, तो सफेद बॉल ने क्रिकेट के मैदान में दस्तक दे दी. लाल बॉल दिन में अच्छी तरह से दिखती है तो सफेद बॉल रात में खिलाडियों को अच्छी तरह से दिखाई देती है. लेकिन जब दिन रात के टेस्ट मैच की बात आई तो पिंक बॉल को तरजीह दी गई. ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि दोनों बॉल की ड्यूरेबिलिटी में अंतर होता है.
सफेद बॉल का इस्तेमाल क्यों नहीं
टेस्ट मैच में बॉल को एक पारी में करीब 80 ओवर तक रखना होता है. उसके बाद ही नई बॉल ले सकते हैं. सफेद बॉल में उसका रंग जल्दी उडने लगता है. रंग उडने के बाद इसे देख पाने में खिलाडियों को दिक्कत होती है. टेस्ट मैच में 80 ओवर तक सफेद गेंद से खेल संभव नहीं हो सकता.रंग जल्दी उडने लगता है
सफेद बॉल डे नाइट मैच के लिए बिल्कुल मुफीद होती है. लेकिन ये अपना रंग भी जल्दी छोडती है. 30 ओवर के बाद कोटिंग उतरने लगती है. टी 20 और वनडे में तो कोई दिक्कत नहीं होती, लेकिन टेस्ट मैच में गेंद को 80 ओवर तक रखना होता है. ऐसे में टेस्ट मैच में सफेद बॉल से खेल संभव नहीं होता.
इसलिए पिंक बॉल का इस्तेमाल
पिंक बॉल को बनाने में उसमें कलर का काफी ख्याल रखा जाता है. उसमें रंग की कई परत चढाई जाती है. ऐसे में काफी देर तक उसका रंग नहीं उडता. उसकी विजिबिलिटी काफी अच्छी रहती है. इसी कारण टेस्ट मैच में पिंक बॉल का इस्तेमाल किया जाता है.
लाल और पिंक बॉल को बनाने की प्रक्रिया में होता है ये अंतर
डे नाइट टेस्ट मैच में पिंक बॉल का इस्तेमाल होता है. पिंक बॉल और लाल बॉल में सबसे बड़ा अंतर कलर कोटिंग को लेकर होता है. लाल बॉल के लेदर पर रंग का इस्तेमाल डाय के द्वारा किया जाता है. वहीं पिंक बॉल पर कई परत का इस्तेमाल होता है. और इन कोटिंग्स को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए गुलाबी गेंद को लाख की अतिरिक्त परत के साथ समाप्त किया जाता है. कोलकाता में जब भारत ने पहली बार डे नाइट टेस्ट मैच का आयोजन किया था, उस समय खिलाड़ियों ने कहा था कि पिच और हवा में पिंक बॉल उम्मीद से ज्यादा तेज आ रही थी. इतना ही नहीं फील्डर्स को ज्यादा सख्त और भारी भी लगी थी. लंबे समय तक चलने वाली चमक के कारण गेंद को स्विंग करने में भी मदद मिलती है. कभी कभी तो उम्मीद से ज्यादा.