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सागर6 घंटे पहले
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प्रतिकात्मक फोटो
- पांच अलग-अलग केटेगरी में तय होना है रैंकिंग, नगर निगम तैयारियों में जुटा
स्वच्छता सर्वेक्षण-2021 की रैंकिंग में सुधार करने के लिए नगर निगम तैयारियां में जुटा हुआ है। इस बार सर्वेक्षण में शहर की रैंकिंग के साथ ही अलग-अलग 5 केटेगरी में ग्रेडिंग भी की जाएगी। सागर नगर निगम ने इस ग्रेडिंग के तहत अनुपम (गोल्ड) के लिए दावेदारी की है। फिलहाल बड़े शहरों के मुकाबले सागर नगर निगम अभी वाटर प्लस (सीवरेज) में ही पीछे हैं। नगर निगम का सीवर प्रोजेक्ट अभी भी अधूरा है। वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट पर भी काम बेहद धीमा चल रहा है।
फिर भी नगर निगम की तैयारियां हैं कि अच्छी ग्रेडिंग को हासिल कर सकें। उधर, निगम के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं, जिन्हें पूरा नहीं करने पर ग्रेडिंग के साथ ही रैंकिंग भी प्रभावित होगी। स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 के तहत नगर निगम को 6000 अंकों की परीक्षा के साथ नया घटक प्ररेक दौड़ भी शामिल किया गया है।
इसमें 5 केटेगरी दिव्या (प्लेटिनम), अनुपम (गोल्ड), उज्जवल (सिल्वर), उदित (ब्रांच) और अरोही (कॉपर) के तहत भी ग्रेडिंग की जाएगी। सभी केटेगरी में कुछ बिंदु तय किए गए हैं, जिनके पूरे होने पर ही यह तगमा मिलेगा, जो रैंकिंग के साथ ही शहर को दिया जाएगा। अगर सागर नगर निगम की बात की जाए गोल्ड केटेगरी में जो मापदंड मांगे गए हैं, वह सभी पूरे कर रहे हैं। जबकि गोल्ड से ऊपर प्लेटिनम हैं, जिसमें वाटर प्लस बिंदु को भी जोड़ा गया है।
पहली श्रेणी में देना पड़ता वाटर प्लस का सर्टिफिकेट
प्लेटिनम (दिव्या) : निकाय के 95 % से अधिक वार्डों में कचरा पृथक्कीकरण, निकाय के पास 91% अपशिष्ट का निष्पादन, गीले-सूखे कचरे को 91 % निष्पादन, निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट का 50% से अधिक निष्पादन और 10% से कम अपशिष्ट को लैंड फिल पर भेजा जाना। वाटर प्लस का सर्टिफिकेट।
गोल्ड (अनुपम) : निकाय के 75% से अधिक वार्डों में कचरा पृथक्कीकरण, 81% अपशिष्ट निष्पादन क्षमता, गीले-सूखे कचरे को 91 % निष्पादन, निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट का 40% और 15% से कम अपशिष्ट को लैंड फिल पर भेजा जाना और ओडीएफ डबल प्लस का सर्टिफिकेट।
सिल्वर (उज्जवल) : 55 प्रतिशत से अधिक वार्डों में कचरा पृथक्कीकरण, 71% अपशिष्ट निष्पादन क्षमता, गीले-सूखे कचरे को 91% निष्पादन, निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट का 30% और 20 % से कम अपशिष्ट का लैंड फिल पर भेजा जाना और ओडीएफ प्लस का सर्टिफिकेट।
ब्रांच (उदित) : 35% से वार्डों में कचरा पृथक्कीकरण, 61% अपशिष्ट प्रसंस्करण क्षमता, गीले-सूखे कचरे का 91 % निष्पादन, निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट का 20% व 25% से कम अपशिष्ट को लैंड फिल पर भेजा जाना। इसके साथ ही ओडीएफ प्लस का सर्टिफिकेशन।
कॉपर (अरोही) : 15% वार्डों में कचरा पृथक्कीकरण, 50% अपशिष्ट के लिए प्रसंस्करण, गीले-सूखे कचरे का 50 % निष्पादन, निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट का 10 % व 25% से कम अपशिष्ट को लैंड फिल पर भेजा जाना और ओडीएफ का प्रमाणीकरण शामिल है।
सड़कों पर घूमते आवारा मवेशी
स्त्रोत कचरे का पृथकीकरण : गाड़ियों अभी भी कवर्ड नहीं हैं। वहीं सूखा और गीला कचरा घरों से अलग-अलग नहीं दिया जा रहा है।
जानवर की गंदगी : शहर के मुख्य मार्गों पर आवारा मवेशी की गंदगी सड़कों पर ही पड़ी रहती है।
गंदे पानी की निकासी : सीवरेज प्रोजेक्ट के चलते सड़कों को खोदा गया है। जिससे गंदा पानी सड़कों पर ही बह रहा है।
पानी का ड्रेनेज सिस्टम : बड़े नालों में कचरा फंसा रहता है। कई जगह पर नाले ओपन हैं, जिनसे गंदगी फैलती है।
सार्वजनिक शौचालय, यूरिनल : यूरिनल की नियमित सफाई नहीं हो रही है।