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- World’s Largest Floating Seller Plant To Be Built At Omkareshwar; Will Be Ready By November 2023
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भोपाल2 घंटे पहले
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नर्मदा में पैनल्स बांधने और तैरने तक के लिए गहराई उपयुक्त, सूरज की किरणें सीधी पड़ती हैं यहां
- 3000 कराेड़ रुपए आएगी लागत, अक्टूबर तक बिड प्राेसेस हाे जाएगी
- 500 लाेगों काे मिलेगा राेजगार, तैरने वाले साेलर पैनल्स वहीं बनेंगे
ओंकारेश्वर में दुनिया का सबसे बड़े 600 मेगावाट क्षमता का फ्लाेटिंग साेलर प्लांट नवंबर 2023 तक बनकर तैयार हाे जाएगा। 3000 कराेड़ रुपए लागत के इस प्राेजेक्ट के लिए ओंकारेश्वर में ही तैरने वाले साेलर पैनल बनाए जाएंगे। यह जानकारी देते हुए ऊर्जा विकास विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे ने बताया कि इस प्राेजेक्ट के लिए इसी साल अक्टूबर तक बिड प्राेसेस पूरी कर ली जाएगी। दुबे के मुताबिक नर्मदा नदी में यहां कभी भी जल स्तर 2 मीटर से कम नहीं हाेता। इसकी गहराई उपयुक्त है। पैनल्स बांधने से लेकर तैरने तक के लिए इसकी गहराई उपयुक्त है। सूरज की किरणें सीधी पड़ती हैं।
ऊर्जा विकास निगम के चीफ इंजीनियर भुवनेश कुमार पटेल के मुताबिक 1 मेगावाट क्षमता के साेलर पैनल के लिए 5 एकड़ जमीन की जरुरत हाेती है। इस तरह 600 मेगावाट क्षमता के पैनल के लिए 3000 एकड़ जमीन हाेनी चाहिए, लेकिन यह पानी में हाेगी, इसलिए इतनी जमीन की बचत हाेगी। अप्रैल से जून तक 25- 30 एवेपरेशन लाॅस यानी पानी के वाष्पीकरण से हाेने वाली हानि कम हाे जाएगी। पैनलाें के पानी में हिलने डुलने से ऑक्सीडेशपर प्राॅपर हाे सकेगा, अशुद्धियां दूर हाे जाएंगी।
ग्वालियर में 17 किमी लंबा एलिवेटेड रोड मंजूर
ग्वालियर| बजट में ग्वालियर काे एलिवेटेड राेड सहित कुछ अन्य साैगातें मिलीं हैं। स्वर्ण रेखा नदी पर करीब 17 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड रोड से शहर के ट्रैफिक काे रफ्तार मिलेगी। इसकी लागत 829 करोड़ रुपए है। इस प्रोजेक्ट की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उपचुनाव के दौरान घोषणा की थी। घोषणा के बाद से अब तक डीपीआर को लेकर काफी काम हो चुका है। ग्वालियर में एक हजार बिस्तर के अस्पताल के लिए 140 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
जबलपुर में विज्ञान केंद्र की स्थापना का रास्ता साफ
जबलपुर| बजट में घाेषणा से विज्ञान केंद्र (तारामंडल) की स्थापना के द्वार खुल गए है। हालांकि वर्ष 2017 में जबलपुर में केंद्र बनाने की घोषणा हुई थी। भेड़ाघाट के भटिया देवी भड़पुरा में करीब सात एकड़ जमीन भी चिन्हित कर ली गई। 15.20 करोड़ की लागत से निर्माण होना था। अभी तक यह रुका था। इस प्रस्तावित साइंस सेंटर में एक इनोवेशन हब होगा। वेटरनरी विवि का बजट 5 सालों से 29 करोड़ 54 लाख था। उसे बढ़ाते हुए 40 करोड़ 19 लाख कर दिया गया है।
- मप्र के मृगनयनी, कबीरा और विंध्यावैली ब्रांड से स्थानीय उत्पादों को जोड़कर देश-विदेश में मार्केटिंग की जाएगी। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध कराया जाएगा।
- छतरपुर के जटाशंकर में रोपवे बनेगा। रतलाम, रीवा, जबलपुर में क्षेत्रीय न्यायालय विज्ञान प्रयोगशाला के नए भवन बनेंगे।
- 10 संभाग की आईटीआई को मेगा आईटीआई में बदलेंगे। दो इंजीनियरिंग और पांच पॉलिटेक्निक कॉलेज में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा।
इंदौर मेट्रो का पहला चरण 7500 करोड़ का, बजट में मिले 131 करोड़ रुपए
इंदौर |प्रदेश सरकार के बजट में इंदौर और भोपाल मेट्रो के लिए कुल 262 करोड़ की राशि रखी गई है। इसे दोनों शहरों में आधी-आधी भी बांटें तो इंदौर के हिस्से में 131 करोड़ रुपए आते हैं। इंदौर मेट्रो के पहले चरण का प्रोजेक्ट ही 31 किमी का है। उसमें भी पहला ट्रैक 5.29 किमी का है। पहले चरण की लागत है 7500.08 करोड़ रुपए। 2021-22 के बजट में यदि 131 करोड़ की राशि खर्च भी होती है तो यह पहले चरण की राशि का 10 प्रतिशत हिस्सा भी नहीं है। यानी पहले पांच किमी का काम 2023 तक पूरा हो पाएगा, इसमें संशय है। ऐसे में पहला चरण 2030 तक पूरा होना भी मुश्किल है।
26 माह में एक पिलर भी पूरी तरह तैयार नहीं हुआ
इंदौर में 27 महीने में 5.29 किमी ट्रैक तैयार होने का लक्ष्य रखा था, लेकिन 26 माह गुजरने के बाद पिलर खड़े किए जाने का काम शुरू हुआ है। मेट्रो ट्रेन के कुल 31.55 किमी के रूट में से नवंबर 2018 में 5.29 किमी रूट का टेंडर और वर्कऑर्डर हुआ था, लेकिन ठेकेदार कंपनी दिलीप बिल्डकॉन और जनरल कंसल्टेंट के विवाद और अधिकारियों की सुस्ती के कारण प्रोजेक्ट में देरी हुई।