टेस्ला की भारत में एंट्री
टेस्ला भारत में अपनी इलेक्ट्रिक कार को लेकर काफी चर्चा में बनी हुई है. कंपनी मॉडल 3 के इम्पोर्ट और बिक्री जल्द ही शुरू कर सकती है.
रियायत और छूट देने की कही बात-
रायटर्स को दिए गए इंटरव्यू में गडकरी ने बताया की कंपनी कार की असेंमबलिंग की बजाय लोकल वेंडर्स के साथ काम करके पूरी मैन्युफैक्चरिंग भारत में ही कर सकती है. इसमें हम कंपनी को बेहतर रियायतें और छूट दे सकते हैं. उन्होंने कहा कि भारत की सरकार ये सुनिश्चित करेगी की टेस्ला की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट भारत में किसी भी देश की तुलना में कम हो, फिर भले वो चीन ही क्यों न हो.
प्रदूषण में कमी लाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों पर फोकस-भारत अपने मुख्य शहरों में महंगे इम्पोर्ट में कमी और प्रदूषण में कमी लाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी), बैटरी और लोकल निर्माण को बढ़ावा देना चाहता है. अन्य कार निर्माता कंपनी भी अब इलेक्ट्रिक कार मैन्युफैक्चरिंग में आगे आ रही हैं, जो की भारत में कार्बन के फैलाव को रोकने के लिए एक अच्छा कदम है.
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भारत में टेस्ला कार मैन्युफैक्चरिंग अभी भी एक चैलेंज साबित हो सकता है क्योंकि टेस्ला द्वारा मैन्युफैक्चरिंग को लेकर अपने प्लान के बारे में भारत सरकार द्वारा भेजे गए ईमेल का जवाब अभी तक नहीं दिया है.
ज्यादा कीमत की वजह से बिक्री में कमी-
पिछले साल भारत में आयी 24 लाख कारों में से सिर्फ 5000 इलेक्ट्रिक कारें ही बाजार में बिकी. इसकी मुख्य वजह थी इसकी ज्यादा कीमत और इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन का पर्याप्त मात्रा में न होना. इसके विपरीत चीन में जहाँ टेस्ला पहले से ही कार बनाता है , वहां पिछले साल 2020 में 2 करोड़ कारों में से 12 लाख इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहन बिके हैं. जो की टेस्ला की ग्लोबल सेल का एक तिहाई है.
भारत के पास अभी चीन जैसी इलेक्ट्रिक व्हीकल पालिसी नहीं है, चीन अभी दुनिया का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल मार्केट है. गडकरी ने आगे कहा कि एक बड़ा बाजार होने के नाते, भारत एक निर्यात केंद्र हो सकता है, विशेष रूप से लिथियम आयन बैटरी के लिए क्यूंकि लगभग 80% बैटरी अब लोकल स्तर पर बनायीं जा रहीं हैं.
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टेस्ला के लिए फायदे की डील-
गडकरी के अनुसार “टेस्ला के लिए यह फायदे की डील है, हम दिल्ली और मुंबई के बीच एक अल्ट्रा हाई-स्पीड हाइपरलूप बनाने के लिए भी टेस्ला के साथ जुड़ना चाहते थे”. अच्छे एनर्जी के सोर्स ढूंढ़ना और गाड़ियों से होने वाले प्रदुषण को कम करना भारत के लिए बहुत जरुरी है. भारत ने पिछले साल कार निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों तक लाने के लिए कठिन कानून नियम जारी किए हैं और अप्रैल 2022 से कड़े फ्यूल एफिशिएंसी रूल लागु करेगी. जिससे कि कार निर्माताओं को इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड मॉडल अपने पोर्टफोलियो में लाने के लिए मजबूर करेगी.