बैंकिंग लोकपाल की सालाना रिपोर्ट: बैंकों के खिलाफ ग्राहकों की शिकायतें 137% बढ़ीं, सुनवाई का खर्च 3 करोड़; सिर्फ एक ग्राहक को मिली राहत, बाकी 14,446 शिकायतें रद्द

बैंकिंग लोकपाल की सालाना रिपोर्ट: बैंकों के खिलाफ ग्राहकों की शिकायतें 137% बढ़ीं, सुनवाई का खर्च 3 करोड़; सिर्फ एक ग्राहक को मिली राहत, बाकी 14,446 शिकायतें रद्द


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भोपालकुछ ही क्षण पहले

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मप्र और छग से आईं 14,510 शिकायतों में से 62% सुनवाई के काबिल ही नहीं समझी गईं

  • बैंकिंग लोकपाल के भोपाल के जोनल कार्यालय का मामला

बैंकिंग सेवाओं से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई करने वाले बैंकिंग लोकपाल के भोपाल स्थित जोनल कार्यालय ने 2020 में ग्राहकों की शिकायतों की सुनवाई पर 3 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए। लेकिन मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ से आईं 14,510 शिकायतों में से 62% सुनवाई के काबिल ही नहीं समझीं गईं। जिन 5,544 शिकायतों को सुनवाई योग्य माना गया, उनमें से केवल एक ही फैसला ग्राहक के हक में आया। शेष 14,446 शिकायतें रद्द कर दी गईं। यह स्थिति तब है, जब बैंकिंग सेवाओं से असंतुष्ट ग्राहकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

पिछले एक साल में बैंकिंग सेवाओं से जुड़ी शिकायतों में 137% की बढ़ोतरी देखने को मिली है। डिजिटल लेनेदन बढ़ने के बाद आरबीआई ने केवल डिजिटल लेनदेन से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई के लिए अलग से एक बैंकिंग लोकपाल की नियुक्ति की है। भोपाल में इससे जुड़ी शिकायतों में 779% की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन अवॉर्ड एक मामले में भी नहीं दिया।

जानकारों का कहना है कि बैंकिंग लाेकपाल ज्यादातर मामले मध्यस्थता से निपटाने की कोशिश करते हैं। जैसे ही ग्राहक और बैंक के बीच कोई समझौता हो जाता है तो शिकायत को रद्द कर दिया जाता है। इसके साथ ही अधिकतर लोगों को शिकायत करने की सही प्रक्रिया का ज्ञान नहीं है। नियमानुसार ग्राहकों को पहले अपनी बैंक में शिकायत करनी होती है। वहां से समाधान न मिलने के बाद ही वह लोकपाल के दफ्तर में शिकायत कर सकता है, लेकिन ज्यादातर ग्राहक सीधे ही शिकायतें लेकर आ जाते हैं। बैंकिंग लोकपाल इन शिकायतों को पहले ही चरण में रद्द करके सुनवाई के योग्य ही नहीं मानते।

हालांकि ग्राहक हित के लिए काम करने वाली संस्थाओं का मानना है कि बैंकिंग लोकपाल बैंकों द्वारा स्थापित संस्था है। अगर वे किसी मामले में ग्राहकों को अवॉर्ड देते हैं तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के कॅरियर पर इसका प्रतिकूल असर पड़ता है। बैंकिंग लोकपाल अक्सर बैंकों को सीधे जिम्मेदार ठहराने के बजाय बीच का रास्ता निकालने की कोशिश करते हैं, लेकिन हर मामले की सुनवाई का खर्च 2 से 3 हजार रुपए के बीच रहता है।

किस सेवा को लेकर क्या हैं शिकायतें

  • एटीएम/ डेबिट कार्ड से जुड़े लेनदेन, एटीएम में धाेखाधड़ी।
  • फिशिंग के जरिए एटीएम और डेबिट कॉर्ड से अनाधिकृत लेनदेन, कॉर्ड की क्लोनिंग।
  • क्रेडिट कार्ड जारी करने में पारदर्शिता का अभाव। बिल न देने पर उत्पीड़न। सिबिल में गलत रिपोर्टिंग।
  • यूपीआई के लेनदेन में धोखाधड़ी, फिशिंग, संदेहास्पद लिंक। ग्राहकों को लुभाने गलत क्यूआरकोड/एसएमएस/ ई-मेल भेजकर धोखाधड़ी।
  • गलत खातों में पैसा ट्रांसफर करना।

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