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- 26 Crore Increase In Property Tax Collection; Kolar Bhel And Hoshangabad Road Get Highest Tax
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भोपाल4 घंटे पहले
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4.5 लाख संपत्ति कर खातों में से 2 लाख 19 हजार ने जमा किया प्रॉपर्टी टैक्स
- पिछले साल 130 करोड़ के मुकाबले इस बार 156 करोड़ रुपए किए गए वसूल
होशंगाबाद रोड, भेल और कोलार रोड क्षेत्र से सबसे ज्यादा प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली हुई है। पिछले साल नगर निगम ने 130 करोड़ रुपए टैक्स इकट्ठा किया था। आंकड़ों के अनुसार इस बार 156 करोड़ रुपए प्रॉपर्टी टैक्स जमा हुआ है। यानी वसूली में 26 करोड़ से अधिक की वृद्धि हुई है।
इस आंकड़े में अभी और वृद्धि होने का अनुमान है, क्योंकि अंतिम दो-तीन दिन के आंकड़ों का एनालिसिस अभी पूरा नहीं हुआ है। सबसे ज्यादा वृद्धि होशंगाबाद रोड, भेल और कोलार क्षेत्र में दर्ज हुई है। शहर में लगभग साढ़े चार लाख संपत्ति कर के खाते हैं। इनमें से 2 लाख 19 हजार 481 ने इस बार टैक्स जमा किया है। पिछले साल 1,74,810 ने प्रॉपर्टी टैक्स जमा किया था। यानी एक साल में 44,671 की वृद्धि हुई है।
निगम ने इस साल प्रॉपर्टी टैक्स में दस फीसदी की वृद्धि कर दी है। शहर में प्रॉपर्टी टैक्स की यह वृद्धि आखिरकार ईमानदार टैक्स पेयर्स पर ही भारी पड़ेगी। वित्त वर्ष के समापन पर नगर निगम ने जोन और वार्ड स्तर पर वसूली का प्रारंभिक एनालिसिस किया है। इस एनालिसिस में यह बात सामने आई कि पिछले साल की तुलना मेंं वसूली में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
इन क्षेत्रों से मिलता है सबसे ज्यादा प्राॅपर्टी टैक्स
- होशंगाबाद रोड, नारायण नगर, साकेत नगर और एम्स के आसपास का एरिया
- इंद्रपुरी, सोनागिरी, अवधपुरी, मिनाल, जेके रोड, अयोध्या बायपास
- एमपी नगर
- न्यू मार्केट के आसपास का क्षेत्र
- कोलार रोड।
यहां से प्रॉपर्टी टैक्स की बहुत कम वसूली
शाहजहांनाबाद, चांदबड़, सेमरा, करोंद, ऐशबाग, मंगलवारा, बरखेड़ा पठानी, अशोका गार्डन, जहांगीराबाद, कमला पार्क और आसपास का क्षेत्र, छोला, करोंद, नरेला शंकरी।
85 में से 11 वार्डों में घटी वसूली
जोन- 8 जिसमें ऐशबाग और आसपास का क्षेत्र आता है वहां प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली पिछले साल की तुलना में 0.91% कम हुई है। इसी से लगे जोन- 11 में केवल 2.73 प्रतिशत टैक्स बढ़ा। कोटरा, भदभदा रोड और श्यामला हिल्स क्षेत्र यानी जोन नंबर 6 में केवल 3.80 प्रतिशत ही टैक्स बढ़ा। वार्ड 3,18, 25, 28, 31, 34, 37, 40, 59, 70 और 76 एेसे हैं जहां वसूली पिछले साल की तुलना में कम हुई। वार्ड-34 में वसूली में 26.55 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है।
पिछले कुछ सालों में नगर निगम की वसूली के ट्रेंड को देखें तो समझ में आता है कि शहर के कई इलाकों से प्रॉपर्टी टैक्स और पानी के बिल की वसूली नगर निगम के लिए परेशानी का सबब है। लंबे समय बाद इस बार निगम प्रशासन ने वसूली पर फोकस किया। जोनल अधिकारियों और वार्ड प्रभारियों को टारगेट देने और नियमित समीक्षा करने का परिणाम यह रहा कि इस बार रिकॉर्ड 350 करोड़ की वसूली हुई है।
यह भी पहला मौका है जब 4.50 लाख संपत्ति कर के खातों में से लगभग 2.25 लाख यानी 50% ने टैक्स जमा किया है। पिछले वित्त वर्ष में नगर निगम ने 1.72 लाख लोगों ने प्रॉपर्टी टैक्स जमा किया था जो कि लगभग 38% होता है। इसके पहले के वर्षों में 30 से 35% लोग ही प्रॉपर्टी टैक्स जमा कर रहे थे।
सितंबर में तय हो गई थी वृद्धि
राज्य शासन ने पिछले साल सितंबर में दो नोटिफिकेशन जारी कर नगरीय निकायों को प्रॉपर्टी टैक्स और पानी का बिल सहित अन्य यूजर चार्ज में वृद्धि का अधिकार दे दिया था। प्रॉपर्टी टैक्स की गणना कलेक्टर गाइडलाइन के आधार पर और यूजर चार्जेस की गणना उन पर होने वाले खर्च के आधार पर तय की जाना थी। बजट के बाद निगम प्रशासन ने कच्चा निर्माण और आवासीय उपयोग की खुली भूमि को छोड़कर सभी संपत्ति पर एक समान 10% टैक्स बढ़ा दिया गया है।
40% से ज्यादा लोग टैक्स नहीं देते
नगर निगम के नए बजट में प्रॉपर्टी टैक्स में 10% की वृद्धि कर दी गई है। पूरा जोर लगा कर भी नगर निगम इस बार 50% लोगों से प्रॉपर्टी टैक्स जमा करा पाया है। पिछली बार तो यह आंकड़ा 38% पर था। यदि यह मान लिया जाए कि 10% लोग टैक्स कैलकुलेशन में गड़बड़ी के कारण राशि जमा नहीं कर रहे हैं तब भी 40% लोग तो ऐसे हैं जिनकी रुचि टैक्स जमा करने में नहीं है।
सरकार पर आरोप
पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने टैक्स दोगुना करने का किया विरोध
पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने कहा है कि भाजपा की कथनी और करनी में अंतर है। यही वजह है कि शिवराज सरकार जहां जनता पर पेट्रोल-डीजल के रूप में करों का भार डाल रही है, वहीं नगर पालिक निगमों में जनता को मिलने वाली जलदर और संपत्ति कर की राशि दोगुनी कर दी है।
इस बात को लेकर उन्होंने विधायक संजय शुक्ला के साथ मिलकर आपत्ति भी दर्ज कराई थी। सरकार का ध्यान जनता की इन मूलभूत सुविधाओं की ओर न होकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणाएं पूरी करने पर है। पटवारी का कहना है कि एक ओर तो सरकार नगरीय निकाय चुनाव नहीं करवा रही है, वहीं दूसरी ओर जनता पर स्थानीय निकायों द्वारा करों का बोझ लादा जा रहा है।
पटवारी ने कहा कि नगर निगम द्वार रोपित करों को यथावत रखने का आश्वासन निगम के अधिकारियों ने दिया था, लेकिन नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा निकाले गए आदेश में सिर्फजय प्रदाय, मल-जल तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सेवाओं काशुल्क यथावत करने का आदेश जारी किया गया है।