4 बसों की आगजनी के मामले में नया मोड़:: पानी की जगह जल्दबाजी में मैकेनिकों ने डाला ताडपिन, चिंगारी उठते ही बन गया आग का गोला

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रीवाएक घंटा पहले

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इस तरह रीवा के ट्रांसपोर्ट नगर में जली थी चार बसें

  • चारों बसें तैयार खड़ी ​थी अपने अपने नंबरों पर चलने के लिए, मैकेनिकों ने उम्मीदों में फेरा पानी

रीवा शहर के ट्रांसपोर्ट नगर में बीते दिन चार बसों के जलने के मामले में नया मोड़ आया है। भास्कर रिपोर्टर जब शनिवार की बीती रात 11 बजे बस स्टैंड पहुंचा तो ड्राइवरों में जन चर्चा थी कि मोटर मालिकों को मैकेनिकों ने कबाड़ी बना दिया। जो बसे आज से अपने अपने नंबरों पर चलने वाली थी। वे सभी बसें एक छोटी सी लापरवाही के कारण आगजनी की शिकार हो गई। दावा किया गया कि जिस बस से आग लगने की शुरुआत हुई वो एकदम तैयार थी। हल्का सा आगे साइड की एक सीट का ज्वाइंट खुला था। जिसको मैकेनिक ने वेल्डिंग कर जोड़ने की कोशिश की। इसी बीच वेल्डिंग की चिंगारी उठी और सीट में आग पकड़ ली। आग लगते ही अन्य मैकेनिक दौड़ और पानी की जगह ताडपिन डाल दिया। जो कि एक तरह का कैमिकल होता है। जिसका उपयोग पेंट और वारनिस के लिए किया जाता है। ज्वलनशील पदार्थ ताडपिन के कारण आग की लपटे तेजी से फैली और देखते ही देखते पूरी बस जलने लगी। इसके बाद क्रमश: एक से दो और दो से चार बसें जल गई।

ऐसे क्रमश: जली बसें
मैकेनिकों की मानें तो सबसे पहले आग बस क्रमांक एमपी 18 पी 1455 में लगी थी। इसके बाद बगल में खड़ी बस क्रमांक एमपी 17 पी 1105 में आग तेजी से फैली। फिर बस क्रमांक एमएच 04 जी 9998 ​और पीछे खड़ी बस क्रमांक यूपी 70 डीटी 0735 भी तेजी से जलने लगी। इस तरह कुह ही मिनटों में एक साथ चार बसें जलने लगी। हालांकि आनन फानन में मैकेनिकों ने बाल्टी औ डिब्बों से पानी बुझाने का प्रयास किया। लेकिन आग कम नहीं हुई और पूरे ट्रांसपोर्ट नगर में भगदड़ मच गई।

तो जल जाता पूरा शहर
पुलिस का कहना है कि आगजनी की घटना में किसी भी बस का डीजल टैंक नहीं फटा है। क्योकि डीजल टैंक के उपर चददर की मोटी परत होती है। जिसमे पूरी बस की बाड़ी रखी रहती है। इस चददर की प्लेट के कारण बस दो हिस्सों में रहती है। उपर का हिस्सा बस का होता है। जिसमे यात्री बैठते है। जबकि नीचे का हिस्सा चेचिस बौर बाडी होती है। जिसमे नीचे का हादसा उपर जाने से रोकता है। वहीं उपर का हादसा नीचे नहीं होने देता है। अगर कुछ देर और फायर ब्रिगेड नहीं आती तो डीजल टैंक फट जाता और पूरे ट्रांसपोर्ट में डीजल की लपटें जाती। ऐसे में बड़ा हादसा हो सकता था।

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