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- The Budget Is Lacking, Yet The Office Is Decorated At A Cost Of Millions, The Bungalow Of The British Era Was Maintained Under The Supervision Of The Forest Minister.
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जबलपुर13 मिनट पहले
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वन विभाग के कई जनहितकारी प्रोजेक्ट वर्षों से अटके हुए हैं। इसके पीछे बजट की कमी का रोना रोया जा रहा है। वहीं राज्य वन अनुसंधान संस्थान (एसएफआरआई) में अंग्रेजों के बँगले के नाम से मशहूर भवन को लाखों रुपए खर्च करके रेनोवेट कराया जा रहा है। जानकार बताते हैं कि इसकी मॉनीटरिंग खुद प्रदेश के वन मंत्री विजय शाह कर रहे हैं, इसके लिए वे हाल ही में कई बार दौरे भी कर चुके हैं। जानकार लोग दबी जुबान अब इसके औचित्य पर सवाल भी उठाते नजर आ रहे हैं। उनका तर्क है कि बजट की कमी के कारण एक तरफ वन विभाग और एसएफआरआई में कई अहम प्रोजेक्ट अधूरे पड़े हैं। वहीं दूसरी तरफ ऐशगाहनुमा इस भवन के रेनोवेशन में लाखों रुपए का खर्च किए जा रहे हैं, जो समझ से परे हैं।
उल्लेखनीय है कि कुछ वर्ष पूर्व ही यहाँ पर रेंजर कॉलेज खाली होने के बाद लाखों की लागत से वीआईपी गेस्ट और रेस्ट हाउस बनाए जा चुके हैं। जानकार बताते हैं कि वन विभाग के कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जिन्हें बजट की कमी का हवाला देकर रोक दिया गया है। इनमें ठाकुरताल के नगर वन में बनने वाले वॉच टॉवर, अतिक्रमण मुक्त हुईं मदन महल की पहाड़ियों में वन्य प्राणियों की देखरेख और इलाज के लिए बनने वाला अस्पताल, बिलपुरा तालाब में मगर सेंचुरी के साथ कई ऐसी योजनाएँ हैं, जो सालों से अटकी पड़ी हैं। इन प्रोजेक्टों के पूरा होने से जबलपुर में टूरिज्म के साथ वन्य प्राणियों की सुरक्षा और देखरेख के लिए बड़े सेंटर बन सकते हैं।
कैंप ऑफिस से कई जिलों के पार्कों की होगी मॉनीटरिंग
एसएफआरआई में बनने वाले वन मंत्रालय के कैंप ऑफिस को लेकर कहा जा रहा है कि यहाँ से कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, पन्ना जैसे नेशनल पार्कों और सागर, रीवा, जबलपुर रीजन के वन क्षेत्रों के कामकाज की समीक्षा होगी। महीने में एक सप्ताह के लिए वन मंत्री समेत मंत्रालय के अधिकारी भी यहाँ बैठकर समीक्षाएँ करेंगे।
एसएफआरआई के एक पुराने बँगले में वन मंत्रालय का कैंप ऑफिस का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। वन मंत्री के मार्गदर्शन में सभी निर्माण कार्य चल रहे हैं।
-एमएल बरकड़े, रेंजर जबलपुर