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- If Earth (Earth) Is Not In Vain, It Is Necessary To Conserve The Earth, Take A Pledge To Make The Earth Green And Full Of Natural Resources; Environmentalist Dr. Prerna Mitra Said
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खंडवा15 मिनट पहले
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“विश्व पृथ्वी दिवस” प्रतिवर्ष 22 अप्रैल को मनाया जाता है, वर्ष 2021 की थीम है “रीस्टोर दी अर्थ” जिसका मुख्य उद्देश्य है, मनुष्य द्वारा पर्यावरण को पहुंचाए गए नुकसान की भरपाई करना। तथा पर्यावरण के प्रति जागरूक रहते हुए पृथ्वी का संरक्षण करना हैं। क्योंकि मनुष्य के द्वारा विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों का आवश्यकता से अधिक दोहन किया जाता रहा हैं। इनके मूल कारणों पर गौर किया जाए तो हम पाएंगे कि पहला कारण तेजी से बढ़ती संख्या और दूसरा उपभोक्तावादी संस्कृति का होना l
प्राकृतिक संसाधनों के ऊपर दबाव बहुत अधिक बढ़ता जा रहा है। क्योंकि इनके दोहन की गति इसके पुनर्निर्माण की गति से काफी कम है, इसके अलावा लोगों का वन और पर्यावरण सुरक्षा कानूनों का पालन ना करना, पर्यावरण जैसे मुद्दों के प्रति कम जागरूकता, पेड़ को काटना और नदियों, तालाबों को गंदा करना, पॉलीथीन का अधिक इस्तेमाल करना, समुद्र में तेल फैलने की घटनाएं, नदियों में फैक्ट्री का गंदा पानी डालने वाली कंपनियों को, जहरीला कूड़ा इधर-उधर फेंकने आदि पर रोक ना हो पाने के परिणामस्वरूप प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता जा रहा हैं। प्रकृति के दोहन से जो पर्यावरण असंतुलन पैदा हुआ है, उसी का परिणाम है कि प्राकृतिक आपदाएं – कहीं सूखा, तो कहीं अत्यधिक बाढ़, कहीं भूस्खलन, तो कहीं भूकंप की मार हैं। मौसम के बदलते मिजाज ने तो सारा ऋतु चक्र ही गड़बड़ा दिया है l कार्बन उत्सर्जन दुनियाभर के लिए चुनौती बना हुआ है ऐसे में इसे नियंत्रित करने के लिए और ग्रीन हाउस प्रभाव को कम करने के उपाय करना आवश्यक हो गया है। जिससे ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याओं से बचा जा सके। जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों के कारण ग्लेशियर पिघल रहे हैं, वहीं समुद्र का स्तर भी बढ़ने लगा है। प्राकृतिक आपदाओं की मार बढ़ती जा रही है l प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने का नतीजा हमारे सामने हैं आज पूरी दुनिया कोरोना की समस्या से जूझ रही है, याद रखिए प्रकृति और उसका पर्यावरण ‘पूर्ण’ है और वह वर्तमान मनुष्य के विलोपन के बाद पुनः नया मनुष्य सृजन करने का सामर्थ्य रखती है।
यदि मनुष्य अभी भी सचेत हो जाए तो हम हमारी मां समान पृथ्वी को बचा सकते हैं। हमें हमारी जीवन शैली में परिवर्तन लाना होगा और मनुष्यों को जंतुओं पेड़-पौधों के साथ सहजीवन की कला सीखनी होगी। क्योंकि यह ‘अर्थ’ जितनी हमारी है उतनी ही दूसरे जीव जंतुओं की भी है। पृथ्वी हमारी धरोहर है, इसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। वक्त की मांग है कि पर्यावरण ह्रास के प्रति हम जीरो टॉलरेंस की नीति को अपनाएं l हम सबको सिंगल यूज प्लास्टिक खत्म करने का संकल्प लेना होगा, सौर ऊर्जा का अधिक से अधिक प्रयोग करने पर जोर देना होगा, पशु पक्षियों का ध्यान रखना, प्रदूषण कम से कम करना, स्वच्छता का ध्यान रखना एवं पेड़-पौधे लगाना होगा, ज्यादा से ज्यादा पानी बचाने का प्रयास करने होंगे, रेन वाटर हार्वेस्टिंग के द्वारा भूजल स्तर काफी हद तक बढ़ाया जा सकता है, स्वच्छता का ध्यान रखना भी आवश्यक है।
रिफ्यूज, रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकिल, रोट के साथ-साथ हमें मिनिमलिस्ट जीवन शैली को अपनाना चाहिए। सरकार के लिए जरूरी है कि वह पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त से सख्त कार्यवाही करें। आज विश्व पृथ्वी दिवस पर हम सभी को संकल्प लेना होगा कि हम हमारी धरती को हरा-भरा और प्राकृतिक संसाधन से भरपूर बनाएंगे। जिससे भावी पीढ़ियों को प्राकृतिक संसाधन से भरपूर पृथ्वी मिल सकेंl
डॉ. प्रेरणा मित्रा, पर्यावरणविद, – असिस्टेंट प्रोफेसर, पीजी कॉलेज, मंदसौर