काेराेना बेकाबू, व्यवस्थाएं बीमार: अस्पतालों में पलंग और मेडिकल स्टोर पर दवाएं नहीं, बिना उपचार के लौट रहे मरीज

काेराेना बेकाबू, व्यवस्थाएं बीमार: अस्पतालों में पलंग और मेडिकल स्टोर पर दवाएं नहीं, बिना उपचार के लौट रहे मरीज


Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

होशंगाबाद26 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
  • कोरोना संक्रमितों से अस्पताल फुल, भोपाल भी किए जा रहे रैफर

कोरोना इस गति से बढ़ रहा है कि शहर के निजी और सरकारी अस्पतालों में बेड खाली नहीं हैं। फ्लू गार्ड, फेवीफ्लू, रेडमिसिविर जैसी जरूरी दवा मेडिकल स्टोर्स पर नहीं मिल रही है। मरीजों कोे बिना उपचार के लौटना पड़ रहा है। अस्पतालों में कोरोना मरीजों से पलंग भरे हैं। कई गंभीर मरीज जिन्हें भर्ती होने की आवश्यकता पड़ रही है उन्हें घर पर ही उपचार लेना पड़ रहा है।

ऐसे मरीज जो गंभीर अवस्था में पहुंच चुके हैं जिन्हें ना तो निजी अस्पतालों में और ना ही सरकारी अस्पतालों में इलाज मिल पा रहा है उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ रही है। मरीजों के परिजनों ने बताया कि ना तो घर पर उपचार के लिए ऑक्सीजन मिल रही है और ना ही दवाएं।

सीएमएचओ डॉ. दिनेश कौशल ने बताया जिले में करीब 450 बेड के कोविड केयर सेंटर तैयार किए जा चुके हैं। मरीज निरंतर बढ़ रहे हैं। इनकी वजह से बेड खाली नहीं बच रहे हैं। हमारे पास दवाएं मेडिकल बोर्ड भोपाल से उपलब्ध होती हैं जो भी दवाएं मिलती हैं उन्हें हम जिले में डिस्ट्रीब्यूटर करा रहे हैं।

उनकी दास्तां, जिन्हें नहीं मिली सुविधाएं, गई जान

केस -1 : ग्राम खोकसर के एक बुजुर्ग को परिजन मंगलवार शाम के समय तबीयत बिगड़ने पर होशंगाबाद लेकर आए। किसी भी निजी अस्पताल में पलंग खाली ना होने की वजह से उन्हें भर्ती नहीं कराया जा सका। एक निजी चिकित्सक से चेकअप करवाकर जो दवाएं मेडिकल स्टोर से मिली उनसे ही उपचार करने का प्रयास किया, लेकिन 24 घंटे के भीतर ही बुजुर्ग की मौत हो गई।

केस -2 : निजी अस्पतालों में बेड खाली ना होने की वजह से ही सिवनीमालवा की 42 वर्षीय सुनीता गौर को अपनी जान गवानी पड़ी। पिछले कुछ 2 सप्ताह से ऐसे बहुत से ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज हैं जिन्हें बिस्तर उपलब्ध ना होने की वजह से और उचित चिकित्सकीय परामर्श ना मिलने की वजह से उपचार में परेशानी हो रही है। परिजनों ने बताया मेडिकल स्टोर्स पर दवा नहीं मिल रही है।

केस -3 : इटारसी गांधीनगर में सत्संगी परिवार के 64 वर्षीय बुजुर्ग हैं। इन्हें पहले फीवर आया। सरकारी अस्पताल में आरटीपीसीआर टेस्ट हुआ। जांच के बाद रिपोर्ट पॉजिटिव आई। अस्पताल में बेड खाली नहीं होने पर दवाइयां देकर घर भेज दिया। सांस लेने में तकलीफ होने पर उनकी मौत हो गई।

केस -4 : इटारसी के बारह बंगला क्षेत्र में यह 40 वर्षीय युवक का सरकारी अस्पताल में कोविड टेस्ट नहीं हो पाया। इंजेक्शन लगाया। दवाइयां दीं। अगले दिन आने को कहा गया। घर में सांस लेने में दिक्कत आई। परिजनों ने अस्पताल ले जाने की पूरी कोशिश की लेकिन उनकी मौत हो गई। उनका कोविड टेस्ट नहीं हो पाया था।

खबरें और भी हैं…



Source link