प्रशासन के खोखले दावे: अगर ऑक्सीजन की कमी नहीं तो फिर कैसे चली गई पाँच की जान..?, प्रत्यक्षदर्शियों ने सुनाई घटना से जुड़ी पल-पल की कहानी

प्रशासन के खोखले दावे: अगर ऑक्सीजन की कमी नहीं तो फिर कैसे चली गई पाँच की जान..?, प्रत्यक्षदर्शियों ने सुनाई घटना से जुड़ी पल-पल की कहानी



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जबलपुर4 घंटे पहले

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  • पुलिस ने राह चलते ऑक्सीजन वाहन को पकड़ा और अस्पताल लेकर पहुँची

प्रशासन और जिम्मेदारों द्वारा लगातार यह दावा किया जा रहा है कि शहर में ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी, इसके बाद भी गैलेक्सी हॉस्पिटल में 5 मरीजों की जान चली गई। प्रत्यक्षदर्शी और गैलेक्सी अस्पताल में अपने रिश्तेदार महाराजपुर निवासी अमित कुमार की मौत से व्यथित शैलेश कुमार शुक्ला ने बताया कि रात दो बज रहे थे, तभी वार्ड में मरीजों को साँस लेने में कठिनाई हाेने लगी। ऑक्सीजन बंद हो गई थी।

पहले एक मौत हुई, तो डॉक्टरों ने उसे सामान्य बता दिया। देखते ही देखते चार मौतें और हो गईं, तब हड़कंप मचा। डॉक्टर और स्टाफ भागकर नीचे ऑक्सीजन सप्लाई के पास पहुँचे। देखा तो ऑक्सीजन खत्म हो चुकी थी। चीख-पुकार सुनकर हम और दूसरे परिजन बेसमेंट में पहुँचे, तो स्टाफ वहाँ से भाग निकला। हम डॉक्टरों को फोन लगाते रहे। कोई रिस्पांस नहीं मिला। हमारी आँखों के सामने लोग दम तोड़ रहे थे। सामने एक मेडिकल स्टोर्स की दुकान है। दवाएँ उसी के यहाँ से खरीदते हैं। मदद के लिए उसे आवाज लगाई, तो वह शटर गिराकर भाग गया। फिर डायल-100 पर पुलिस को खबर दी।

रात्रि में रूटीन गश्त पर गई थी पुलिस, ऑक्सीजन वाली गाड़ी को रोका
सीएसपी कोतवाली दीपक मिश्रा कहते हैं, रात्रि गश्त थी। ऑक्सीजन की परेशानी को देखते हुए रात मैंने लाइफ मेडिसिटी, ग्लोबल और गैलेक्सी अस्पतालों में पुलिस को रूटीन गश्त के लिए भेजा। जब टीम गैलेक्सी पहुँची तो वहाँ ऑक्सीजन खत्म होने की जानकारी मिली। उस वक्त दो बजे थे, मैं बस स्टैण्ड पहुँचा था, तभी मोबाइल की घंटी पर गैलेक्सी अस्पताल में ऑक्सीजन समाप्त होने की खबर मिली। इसके बाद अलग-अलग थानों से बल बुलाया गया। पुलिस टीम ने दूसरे अस्पताल का ऑक्सीजन लेकर निकली एक गाड़ी को राह चलते रोका। वह ऑक्सीजन वहाँ तड़पते हुए मरीजों के काम में आया। इसके बाद उस गाड़ी को दूसरा ऑक्सीजन अधारताल से दिलवाया गया।

पुलिस ने तड़पते लोगों की जिंदगी बचा ली, कंधे पर ढाेए सिलेंडर
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कोतवाली सीएसपी के साथ लार्डगंज थाने के 15-16 आरक्षक भगवान बनकर पहुँचे। उन्होंने ऑक्सीजन का इंतजाम किया। एक गाड़ी ऑक्सीजन सिलेंडर से भरकर लाए। फिर पुलिस वाले ही गाड़ी से सिलेंडर कंधे पर ढोकर बेसमेंट तक लेकर गए, तब कहीं जाकर बाकी लोगों की जिंदगी बच सकी।
जबलपुर पर अन्य जिलों के मरीजों का भी दबाव, कम पड़ रहे संसाधन
गैलेक्सी हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की कमी से जान गँवाने वाले 5 मरीजों में से 3 मरीज अन्य जिलों से थे। इसी तरह शहर के लगभग सभी अस्पतालों में आस-पास के जिलों के मरीज बड़ी संख्या में भर्ती हैं। जबलपुर इस वक्त पूरे महाकोशल, विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र का दबाव झेल रहा है। ऐसे में प्रशासन द्वारा जुटाए जा रहे संसाधन बौने साबित हो रहे हैं। जिले में मिलने वाले नए संक्रमित मरीजों के अलावा अन्य जिलों में आ रहे नए संक्रमित मरीज भी जबलपुर इलाज के लिए पहुँच रहे हैं, जिसके चलते अस्पतालों में बिस्तरों कमी हो रही है।

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