जबलपुर. क्या मरीज़ों (Patients) के इलाज में लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाना अपराध बन गया है? कोरोना (Corona crisis) संकटकाल से जूझ रहे एक मरीज के परिवार के लिए इन दिनों ऐसे ही हालात बन गए हैं. जबलपुर में एक मरीज के परिवार ने निजी अस्पताल की लापरवाही के खिलाफ आवाज उठायी तो अस्पताल वालों ने उनके ही खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा दी. मामला जबलपुर का है. यहां एक निजी अस्पताल ने एक महिला के खिलाफ थाने में शिकायत कर दी और पुलिस ने भी तत्परता दिखाते हुए महिला के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज कर ली.
निगेटिव को कोरोना पीड़ित बताकर इलाज पूरा मामला बीती 22 अप्रैल का बताया जा रहा है. शहर के सिटी अस्पताल में स्वाति तिवारी नाम की महिला अपने पिता को इलाज के लिए लेकर पहुंची थीं. वहां महिला के पिता को कोरोना मरीज बताकर इलाज शुरू कर दिया गया. लेकिन जब बाद में मरीज के दूसरे टेस्ट कराए गए तो उन रिपोर्ट्स के मुताबिक पता चला कि मरीज कोरोना संक्रमित था ही नहीं. ऐसे में महिला ने डॉक्टरों और स्टाफ के खिलाफ आवाज उठाई.
वीडियो वायरल महिला ने घटना का पूरा वीडियो बनाया. इसमें साफ देखा जा सकता है कि महिला बार बार कह रही है कि जब उसके पिता संक्रमित नहीं थे तो क्यों उन्हें संक्रमित बताया गया. स्वाति तिवारी ने डॉक्टर का वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था. वीडियो में नजर आ रहा है कि डॉक्टर अपनी गलती मानने की जगह महिला से ही उलझ रहा है और उनसे अस्पताल से बाहर निकालने की बोल रहा है.
वीडियो वायरल करने पर नाराज़गी ओमती पुलिस ने इस शिकायत पर महिला के खिलाफ केस दर्ज करते हुए जांच में लिया. जल्द ही महिला को गिरफ्तार करने की भी बात कही जा रही है.