Now preparations to bring water from Jalalpura to Parvati river to the city because the distance is reduced, the way of laying pipes is also straight | अब जलालपुरा से पार्वती नदी का पानी शहर तक लाने की तैयारी क्योंकि दूरी कम, पाइप बिछाने का रास्ता भी सीधा

Now preparations to bring water from Jalalpura to Parvati river to the city because the distance is reduced, the way of laying pipes is also straight | अब जलालपुरा से पार्वती नदी का पानी शहर तक लाने की तैयारी क्योंकि दूरी कम, पाइप बिछाने का रास्ता भी सीधा


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श्योपुर21 घंटे पहले

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  • चंबल से पानी लाने की योजना फेल होने के बाद पार्वती से पानी लाने की कवायद तेज
  • भोपाल से आई इंजीनियरों की टीम ने जलालपुरा, बड़ौदिया बिंदी और पार्वती एक्वाडक्ट सेंटर की साइट देखीं, इनमें जलालपुरा पहली पसंद
  • मूंझरी के लिए अहेली नदी पर बनाया जाएगा डैम, 10 हजार हेक्टेयर जमीन की हो सकेगी सिंचाई, बड़ौदा क्षेत्र के किसानों की मांग होगी पूरी

शहर में पानी लाने के लिए नगर पालिका की जलावर्धन योजना पर नई कवायद शुरू की गई है। अब चंबल के बजाए पार्वती नदी से पानी लाने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए भोपाल से आए अफसरों ने बुधवार को पार्वती नदी पर चिह्नित तीन साइटों का निरीक्षण किया। इसमें उनकी पहली पसंद पार्वती नदी स्थित जलालपुरा रहा, यहां नदी का पानी सीधे श्योपुर तक बिना अड़चन के लाया जा सकता है। भोपाल से जलावर्धन योजना को लेकर चीफ इंजीनियरों की टीम बुधवार को श्योपुर आई। इस टीम ने कलेक्टर राकेश कुमार श्रीवास्तव के साथ बैठक की। इसके बाद प्रशासन द्वारा पानी लाने के लिए पार्वती नदी पर चिह्नित की गई साइटों का निरीक्षण किया। भोपाल से आए अफसरों को पार्वती नदी एक्वाडक्ट, जलालपुरा और बड़ौदिया बिंदी गांव स्थित साइट दिखाई गई। अफसरों ने पार्वती नदी एक्वाडक्ट साइट को नक्शे में देखने कर ही फेल कर दिया, क्योंकि इसकी दूरी ज्यादा थी और लाइन बिछाने के लिए ट्रैक भी सीधा नहींं था। इसके बाद बड़ौदिया बिंदी और जलालपुरा की साइटों का निरीक्षण किया गया। इसमें टीम ने पाया कि जलालपुरा से श्योपुर शहर की दूरी महज 11 किमी है और ट्रैक भी सीधा है। इसके अलावा बड़ौदिया बिंदी साइट भी अधिक दूरी के कारण स्थगित कर दी गई। देर शाम इन साइटों के संबंध में रिपोर्ट दे दी गई। अब नगर पालिका गुरुवार से इस पर अमल करते हुए प्रोजेक्ट पर काम शुरू करेगी।

योजना- अहेली नदी पर बनाया जाएगा स्टॉप डैम, 10 हजार हेक्टेयर में हो सकेगी सिंचाई
कलेक्टर के साथ बैठक में जलावर्धन योजना और मूंझरी बांध परियोजना पर बात की गई। इसमें जलावर्धन योजना के साथ ही मूंझरी बांध के लिए अहेली नदी पर डैम बनाने की योजना तैयार की गई। अहेली नदी पर डैम बनने के साथ मूंझरी परियोजना पूरी होगी और किसानों को लगभग 10 हजार हेक्टेयर से ज्यादा रकबे में सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा जिसकी मांग बड़ौदा क्षेत्र के किसान लंबे अर्से से कर रहे हैं।

चंबल नदी से पानी लाने की अपेक्षा पार्वती नदी से दूरी होगी कम, लागत भी घटेगी
चंबल नदी से पानी लाने के लिए इंटेकवेल बनाने के साथ-साथ 24 किमी लंबी पानी की लाइन व एक बड़ा टैंक पानी स्टोरेज के लिए बनाया जाना था लेकिन पार्वती नदी से पानी लाने में ऐसा नहींं करना पड़ेगा। इंजीनियरों का कहना है कि पार्वती नदी में उन्हें इंटेकवेल बनाने की जरूरत नहींं होगी, वे अपनी मप्र की सीमा में काम करेंगे, ऐसे में उन्हें राजस्थान से भी एनओसी नहींं लेनी होगी। इसके अलावा दूरी भी 24 किमी से घटकर 11 किमी ही रह जाएगी। इससे परियोजना की 224 करोड़ रुपए की लागत भी कम होगी। इसमें वन विभाग ने परियोजना के आड़े आने वाले पेड़ों को काटने व हटाने पर सहमति जता दी है।

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