बीजेपी यह आरोप लगाती रही है कि जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो 15 महीनों के अंदर अधिकारियों के थोक बंद तबादले किए गए. (फाइल फोटो)
मध्य प्रदेश विधानसभा का सत्र (Assembly session) 21 सितंबर से शुरू हो रहा है और यह 23 सितंबर तक चलेगा. सत्र में तबादलों को लेकर BJP और कांग्रेस के बीच सवाल-जवाब से सियासी पारा चढ़ाना तय है.
दरअसल, बीजेपी नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा ने कांग्रेस सरकार के दौरान 15 दिसम्बर 2018 से लेकर जून 2019 तक हुए तबादलों की जानकारी तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान मांगी थी. इसमें तबादलों पर हुए ख़र्च और उनके लिए आई सिफारिशों के बारे में भी जानकारी मांगी गई थी. लेकिन तब सरकार की ओर से जानकारी अधिक विस्तृत होने का हवाला देते हुए जवाब देने से इनकार कर दिया था. लेकिन अब सत्ता में बीजेपी आ चुकी है और 21 सितम्बर से विधानसभा का सत्र शुरू हो रहा है तो सीताशरण शर्मा के सवाल को ग्राह्य करते हुए सवाल का जवाब तैयार किया जा रहा है. वहीं, इसका काउंटर करने के लिए कांग्रेस ने कमर कस ली है और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा की ओर से ध्यानाकर्षण लगाकर बीजेपी की सरकार में अब तक हुए तबादलों की जानकारी मांगी गई है.
तबादला, सत्र और सियासत
मध्य प्रदेश विधानसभा का सत्र 21 सितंबर से शुरू हो रहा है और यह 23 सितंबर तक चलेगा. सत्र में तबादलों को लेकर सवाल जवाब से सियासी पारा चढ़ाना तय है. बीजेपी यह आरोप लगाती रही है कि जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो 15 महीनों के अंदर अधिकारियों के थोक बंद तबादले किए गए. अधिकारियों के ट्रांसफर पोस्टिंग पर शासन का करोड़ों रुपए भी बर्बाद हुआ. वहीं, कांग्रेस की माने तो बीजेपी के आरोप निराधार हैं और खुद बीजेपी की सत्ता आते ही ट्रांसफर पोस्टिंग का खेल जारी हो गया है. ऐसे में अब देखना यह है कि क्या इन सवालों के बीच विधानसभा में बाकि मुद्दे हंगामे की भेंट तो नहीं चढ़ जाएंगे.