बुजूर्ग किसान एक खेत में 3 फसलें उगाकर कमा रहे लाखों, जानें पूरा फार्मूला

बुजूर्ग किसान एक खेत में 3 फसलें उगाकर कमा रहे लाखों, जानें पूरा फार्मूला


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बुजूर्ग किसान एक खेत में 3 फसलें उगाकर कमा रहे लाखों, जानें पूरा फार्मूला

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Agriculture News: सीधी जिले के किसान मनसुख लाल कुशवाहा मिश्रित खेती के जरिए एक ही खेत से भिंडी, मूली और धनिया पत्ती की तीन फसल लेकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. सहफसली अपनाकर वे एक बीघा में खेती कर रहे हैं, जिससे लागत आधी और कमाई तीन गुना हो गई है. यह नवाचार अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गया है.

मध्य प्रदेश के सीधी जिले में सब्जियों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. पिछले कुछ वर्षों में सहफसली खेती का प्रचलन तेजी से बढ़ा है. इस तकनीक के जरिए किसान एक साथ कई प्रकार की सब्जियां उगा कर बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं. यह तकनीक न केवल खेत की खाली पड़ी जमीन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करती है, बल्कि एक ही समय में कई फसलों से अतिरिक्त मुनाफा भी दिलाती है.

एक साथ कर रहे तीन फसल की खेती
गर्मी के मौसम में मूली, हरी धनिया और भिंडी जैसी सब्जियों की सहफसली खेती किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है. इन फसलों की बाजार में अच्छी मांग रहती है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिल जाते हैं. खास बात यह है कि अलग-अलग अवधि में तैयार होने वाली इन फसलों से लगातार आय बनी रहती है.सीधी जिले के किसान मनसुख लाल कुशवाहा इस बदलाव की एक सफल मिसाल बनकर उभरे हैं. उन्होंने पारंपरिक फसलों की खेती छोड़कर सहफसली खेती की शुरुआत की.आज वे इससे अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. मनसुख लाल करीब आधे एकड़ जमीन में मूली, हरी धनिया और भिंडी की खेती कर रहे हैं. इस तकनीक से उन्हें एक फसल में ही डेढ़ से 2 लाख रुपए तक का लाभ मिल रहा है.

एक साथ कर रहे भिंडी, मूली और धनिया पत्ती की खेती
मनसुख लाल कुशवाहा ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि एक बीघा में इस खेती की लागत करीब 7 से 8 हजार रुपए आती है, जो अन्य खेती की तुलना में काफी कम है. वहीं, उत्पादन अधिक होने से मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है. मनसुख लाल की खेती पूरी तरह प्राकृतिक और आईपीएम (एकीकृत कीट प्रबंधन) विधि पर आधारित है, जिससे फसलों में कीट और रोग का खतरा कम हो जाता है.फसल की अच्छी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए वे घनजीवा अमृत और वर्मी कंपोस्ट जैसी जैविक खाद का उपयोग करते हैं. इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और उत्पादन बेहतर होता है, साथ ही लागत भी कम आती है.

खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे
सहफसली खेती की प्रक्रिया भी बेहद सरल है. सबसे पहले खेत की गहरी जुताई कर जैविक खाद डाली जाती है। इसके बाद खेत में मेड बनाकर मूली के पौधे लगाए जाते हैं. पौधों के बीच बची जगह में हरी धनिया और भिंडी की बुवाई की जाती है. हरी धनिया लगभग एक महीने में तैयार हो जाती है, मूली एक महीने में और भिंडी 70 से 75 दिनों में तैयार होती है. इस तरह किसान एक ही खेत से अलग-अलग समय पर तीन फसलों का उत्पादन लेकर लगातार आय प्राप्त करते है. मनसुख लाल का अनुभव बताता है कि सहफसली खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी जरिया बन सकती है, जो कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा देने में सक्षम है.



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