विदिशा13 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
- आज घर-घर में होगी मिट्टी के हाथी की पूजा, पकवानों से बने आभूषणों से होगा महालक्ष्मी का शृंगार
आश्विन कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि पर पुत्र की दीर्घायु, आरोग्य तथा सर्वाधिक कल्याण के लिए जीवित्पुत्रिका जितिया और हाथी पूजा एवं महालक्ष्मी पूजा करने का विधान है। इस बार महालक्ष्मी पूजन 10 सितंबर गुरुवार को घर- घर में पार्थिव हाथी के साथ महालक्ष्मी जी का पूजन किया जाएगा। धर्माधिकारी गिरधर शास्त्री ने बताया कि गुरुवार को घर-घर में श्री महालक्ष्मी पूजन होगा। इस मौके पर पकवानों से बने आभूषणों से श्रीमहालक्ष्मी जी का श्रृंगार किया जाएगा। पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार इस व्रत में प्रदोष काल का समय पूजन के लिए शुभ बताया गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि प्रदोष समये स्त्रीभिः पूज्यो जीमूतवाहनः। सप्तम्यामुदिते सूर्ये परम अष्टमी भवेत्। तत्र व्रतोत्सवं कुयार्न्न कुयार्दपरेsहनि। जिस दिन प्रदोष व्यापिनी अष्टमी तिथि हो वही ग्रहण करना चाहिए। यदि सप्तमी उपरांत अष्टमी हो तो लक्ष्मी पूजा के लिए बहुत शुभ मानी गई है। गड़े में सोलहवी गांठ लगाने का विधान: धर्माधिकारी पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि इस दिन महिलाएं इस व्रत को करती हैं। व्रत रखने वाली महिलाएं किसी जलाशय में जाकर सोलह बार दूर्वा से तर्पण करती हैं और प्रदोष काल में हाथी सहित महालक्ष्मी का पूजन करती हैं। यह व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से प्रारंभ हो जाता है और गड़ा में प्रतिदिन एक गांठ लगाई जाती है। आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी को गड़े में सोलहवी गांठ लगाने का विधान है। इस व्रत में सोलह का विशेष महत्व है। सोलह गांठ, सोलह बार मुंह धोना, सोलह बार तर्पण, सोलह दीपक, सोलह बोल की कहानी, सोलह श्रंगार, सोलह दिन का व्रत, सोलह दूर्वा, सोलह डुबकी लगाने का विधान है। अष्टमी तिथि पर 10 सितंबर को प्रदोष काल में हाथी और महालक्ष्मी जी का पूजन किया जाएगा।यह व्रत अपने पुत्र, पौत्रों की लंबी आयु एवं सुंदर स्वास्थ्य की कामना से महिलाओं विशेषकर सुहागिनों को इस व्रत का अनुष्ठान अवश्य करना चाहिए।
ये है पूजन का विधान
प्रातकाल किसी जलाशय में जाकर दूर्वा से तर्पण करके प्रदोष काल में पूर्व दिशा की ओर एक पटा पर हाथी सहित महालक्ष्मी जी को बैठाकर पकवानों के साथ रोली, चावल, धूप ,दीप, नैवेद्य, फल, फूल से पूजन करना चाहिए। पोथी पढ़ना चाहिए। सोलह बोल की कहानी कहना चाहिए। हाथी एवं महालक्ष्मी जी को गंगाजल पिलाना चाहिए। पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि यह व्रत सप्तमी युक्त अष्टमी में प्रदोष के समय किया जाता है।
0