झाबुआ34 मिनट पहले
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- शुक्रवार से शुरू हो गया अधिकमास, इस माह में भगवान विष्णु और कृष्ण की आराधना की जाती है
शुक्रवार से अधिकमास शुरू हो गया। लक्ष्मी और शक्ति के दिन से शुरू हुआ ये मास समृद्धि में वृद्धि करने वाला है। इस महीने में भगवान विष्णु और कृष्ण की आराधना होती है। ग्रंथों का कहना है, पुरुषोत्तम मास में जो कुछ भी करें, उसे भगवान कृष्ण को समर्पित करके करें। जाप, पूजन, व्रत, दान से लेकर कोई वस्तु खरीदने तक आप सभी कुछ कृष्ण को समर्पित करते हैं, तो ये हमारे वैभव में बढ़ोतरी करने वाला होता है। शास्त्रों में केवल मांगलिक कार्यों के लिए अधिकमास को वर्जित माना है।
पं. शुक्ल ने बताया अधिकमास को कुछ स्थानों पर मलमास भी कहते हैं। इसकी वजह ये है कि इस माह में मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं, सूर्य संक्रांति न होने स यह महीना मलिन माना जाता है। इस कारण इसे मलमास भी कहते हैं। पं. शुक्ल के अनुसार आध्यात्मिक उत्थान के लिए यह कालखंड सर्वोत्तम है, निष्काम कर्म का अनंत गुना फल मिलता है। इसमें सभी तिथियों का विशेष महत्व है। क्योंकि इन सभी का घटित होने का योग तीन वर्ष में एक बार ही आता है। अधिक माह में 2 एकादशी आएगी जिन्हें पुरुषोत्तम कमला एकादशी कहा जाता है।
पुराणों के अनुसार : धन, संतान सुख सहित सारे वैभव देता है पुरुषोत्तम मास। अधिकमास वह श्रेष्ठ समय है जब हम स्वाध्याय और स्वभावगत परिवर्तनों से अपने आप को परमशक्ति के पास ले जा सकते हैं। पुराण कहते हैं-
येनाहमर्चितो भक्त्या मासेस्मिन् पुरुषोत्तमे। धनपुत्रसुखं भुकत्वा पश्चाद् गोलोकवासभाक्।।
अर्थात- पुरुषोत्तम मास में भगवान की पूजा करने से वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तिपूर्वक उन भगवान की पूजा करने वाला यहां धन, पुत्र आदि के सुख भोगकर मृत्यु के बाद भगवान के दिव्य गोलोक में निवास करता है।
एक महीने बाद शुरू होगी शारदीय नवरात्रि
पं. हिमांशु शुक्ल ने बताया अधिकमास एक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है। जबकि एक चंद्र वर्ष 354 दिनों का। दोनों के बीच 11 दिनों का अंतर होता है। ये अंतर हर 3 वर्ष में एक माह के बराबर हो जाता है। इसे दूर करने के लिए हर तीन साल में एक चंद्रमास अतिरिक्त आता है इसलिए इसे अधिकमास नाम दिया है। पं. शुक्ल ने बताया शारदीय नवरात्रि एक माह बाद 17 अक्टूबर से शुरू होगी।
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