श्योपुर7 घंटे पहले
- कॉपी लिंक
दिव्यांग संगठन के सदस्य, दिव्यांग को घर जाकर यूनिक कार्ड देते हुए।
- दिव्यांग बोले- समस्याओं का निराकरण करने जिले में 15 साल से नहीं हुआ शिविरों का आयोजन
जिले में अपने पैरों पर खड़े होकर आत्मनिर्भर बनने की ख्वाहिश लेकर भटक रहे दिव्यांगों को सहारा चाहिए। लेकिन सामाजिक न्याय विभाग खुद प्रभार की बैसाखी पर चल रहा है। यूनिक डिसेबिलिटी आईडी कार्ड, पेंशन व ट्राइसिकिल के लिए सैकड़ों दिव्यांग दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं। कलेक्टोरेट के प्रथम तल पर संचालित सामाजिक न्याय विभाग कार्यालय की सीढ़ियां चढ़ते-चढ़ते दिव्यांग थक जाते हैं।
रैम्प बनाने के लिए विभाग बजट पास नहीं कर सकता है। पीडब्ल्यूडी को यह रैम्प बनानी है। वर्तमान में दिव्यांगों की सबसे ज्यादा समस्या यूनिक आईडी कार्ड की है। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार जिले में कुल 5 हजार दिव्यांगों में 83 प्रतिशत हितग्राहियों के यूनिक कार्ड बन चुके है। लेकिन हकीकत यह है कि जिले में 2018 में बनकर तैयार 4150 यूनिक आईडी कार्ड अभी तक बांटे ही नही गए थे।
हाल ही में सरकार की ओर से बस किराए में 50 फीसदी छूट की सुविधा शुरू होने के बाद कार्यालय पहुंचने वाले दिव्यांगों की संख्या एकाएक बढ़ी है। इसके बाद जिम्मेदारों को कार्ड पहुंचाने की याद आई है। इसमें भी शहरी क्षेत्र के 440 कार्ड बांटने के लिए जिला विकलांग संघ के कार्यालय पर भेज दिए गए। विकलांग संघ के अध्यक्ष खुद यह कार्ड संबंधित लोगों को वितरित कर रहे है।
इसके अलावा 200 यूनिक आईडी कार्ड पोस्ट ऑफिस पर पता ठिकाने पर पहुंचने का इंतजार शहरी क्षेत्र के हितग्राही कर रहे है। उधर ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की शिकायत है कि अधिकांश लोगों के कार्ड अभी तक नहीं बनाए गए है। जिनके बने है उन्हें उनका अतापता नही है।विभागीय रवैये से जिला विकलांग बल संगठन के लोगो में असंतोष है।
उनका कहना है कि जिले में दिव्यांग हितग्राहियों की तादाद सरकारी रिकॉर्ड से ज्यादा है। जिले में 2005 के बाद कोई कैम्प नहीं लगने की वजह से हजारों की संख्या में दिव्यांग को हक से वंचित रहना पड़ रहा है। 15 साल से दिव्यांगों से जुड़ी समस्याओं के निराकरण के लिए वास्तविक हकदार थक कर बैठ गए है।
उधर सामाजिक न्याय विभाग के प्रभारी जिलाधिकारी रिशु सुमन का कहना है ग्रामीण क्षेत्र में जिनके कार्ड नहीं बने है उनके आवेदन जनपद पंचायत में लिए जा रहे है। उन्होंने कोरोना संक्रमण के हालात सामान्य होने पर विभाग द्वारा विशेष शिविर लगाने की बात कही है।
प्रशासन को बताई दिव्यांगों से जुड़ी आठ समस्याएं
जिले में दिव्यांगों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे जिला विकलांग बल संगठन ने प्रशासनिक अनदेखी को समस्याओं की जड़ बताया है। उनकी पीडा है कि जिला प्रशासन को बताई गई दिव्यांगों की 8 प्रमुख समस्याएं 4 चार से अनसुलझी है। विकलांग निराश्रित महिलाएं को अपने बच्चों के जीवन निर्वाह के लिये भटक रही है। प्रमाणपत्र बनवाने के लिए चक्कर काटने और कई लोगो का आर्थिक शोषण भी होता है। जिन लोगों को विकलांग पेंशन नहीं मिल रही है या जिन लोगो की पेंशन बंद कर दी गई है उन्हें हर माह पेंशन दी जाए।
जिले में विकलांग जनों के लिए खेल प्रतियोगिता, सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते है लेकिन यहाँ ऐसे कोई कार्यक्रम नही कराए जाते है। प्रत्येक वर्ष विकलांगों के विवाह के लिए जोड़े बनवाने हेतु परिचय सम्मेलन का आयोजन हो। शासन की योजना के अंतर्गत किसी विकलांगजन से विवाह पर दी जाने वाली 2 लाख की आर्थिक सहायता हमारे जिले में इस योजना से वंचित है। परिवहन विभाग में विकलांगों को ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए कैम्प लगाया जाए । इन मांगों का निराकरण नहीं किया जा रहा है।
दिव्यांगों को नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ
पूरे जिले में हजारों विकलांग जन को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। दिव्यांगों को यूनिक आईडी कार्ड के बिना दिक्कत आ रही है। दो साल से तैयार कार्ड बांटने के लिए 8 मांगे ऐसी हैं जो 4 साल से हल नहीं की जा रही है।
विनोद पाठक, जिलाध्यक्ष विकलांग बल संगठन श्योपुर
अब 17 फीसदी यूनिक आईडी कार्ड बनना शेष
जिले में 83 फीसदी दिव्यांगों के यूनिक कार्ड बन गए हैं। शेष हितग्राहियों को कार्ड ग्रामीण क्षेत्र में जनपद पंचायत के माध्यम से बनाए जा रहे हैं। समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। कोरोना की स्थिति सामान्य होते ही जिले में विशेष शिविर का आयोजन किया जाएगा।
रिशु सुमन, प्रभारी अधिकारी सामाजिक न्याय विभाग श्योपुर