Even after being in the cognizance of the collector, the applicant has been following the RTO for a week, Sir always remains absent. | कलेक्टर के संज्ञान में होने के बाद भी आवेदक एक सप्ताह से लगा रहा आरटीओ के चक्कर, साहब हमेशा रहते हैं नदारद

Even after being in the cognizance of the collector, the applicant has been following the RTO for a week, Sir always remains absent. | कलेक्टर के संज्ञान में होने के बाद भी आवेदक एक सप्ताह से लगा रहा आरटीओ के चक्कर, साहब हमेशा रहते हैं नदारद


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टीकमगढएक घंटा पहले

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आरटीओ ऑफिस का वाहन ट्रांसफर का एक मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अधिकारी आवेदक के वाहन का ट्रांसफर करने में रूचि नहीं ले रहे है। दो साल पहले ऑफिस में दी गई फाइल भी गायब हो गई है। अब दूसरी बार दस्तावेज देने के बाद भी आवेदक अधिकारी के चक्कर काटने को मजबूर है। पिछले माह इसी काम को लेकर एसडीएम ने आरटीओ ऑफिस का निरीक्षण भी किया था।

जहां आरटीओ अधिकारी नदारद पाए गए थे। यह पूरा मामला कलेक्टर सुभाष कुमार द्विवेदी के संज्ञान में भी है। इसके बाद भी आवेदक परेशान हो रहा है। आरटीओ विभाग में लापरवाही का दौर अभी भी जारी है। सहादत खान वाहन ट्रांसफर के लिए दो साल से विभाग के चक्कर काट रहा है। जब पिछले महीने काम करवाने गया था, तब बाबूओं द्वारा फाइल गुम होने की बात कही गई थी और आरटीओ अधिकारी ऑफिस से नदारद थे। जिसकी जानकारी कलेक्टर को मिलने पर उन्होंने मौके पर एसडीएम सौरभ मिश्रा को भेजकर जांच कराई तो मामला सही पाया गया। जिस पर एसडीएम ने मौके पर जांच प्रतिवेदन बनाकर कलेक्टर को सौंपा था।

इसके बाद आवेदक ने फिर से वाहन के दस्तावेज बाबू के पास जमा किए। इसके बाद भी आरटीओ अधिकारी निर्मल कुमरावत वाहन ट्रांसफर करने में रूचि नहीं ले रहे है आवेदन एक सप्ताह से आरटीओ ऑफिस के चक्कर काट रहा है। ऑफिस में बाबू से बात करने पर साहब से मिलने की बात कह देते हैं, उधर आरटीओ साहब ऑफिस में नहीं बैठ रहे है। आवेदक को विभाग द्वारा अब मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। जब इस संबंध में आरटीओ अधिकारी निर्मल कुमरावत से बात की तो कुछ कहने को तैयार नहीं है। अगर इसी तरह विभागों में बैठे अधिकारियों का इस तरह का रवैया रहेगा तो आम व्यक्तियों के काम होना न मुनकिन होगा।

वाहन ट्रांसफर का क्या है मामला
सहादत खान ने वर्ष 2018 में आबकारी की निलामी में एक ओमनी वाहन को खरीदा था। वाहन के ट्रांसफर के लिए बीमा, टैक्स सहित अन्य दस्तावेज तैयार कर थे। फाइल को कंप्लीट कर विभाग के बाबूओं को दी गई। यहां पर वाहन की फोटो भी खींची गई, जब ट्रांसफर की बारी आई तो अधिकारी अपना रूतबा दिखाने लगे। इसके बाद वाहन का ट्रांसफर नहीं हो सका। दो साल से आरटीओ के चक्कर काटता रहा है।



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