The age of farmers, who have been troubled for three decades for the rights of farmers suffering from sealing, passed through the rounds of the officers to redeem their sealing land. | अपनी सीलिंग की जमीन छुड़ाने अिधकारियों के चक्कर काटते-काटते गुजर गई किसानों की उम्र, सीलिंग पीड़ित कृषक हक के लिए तीन दशकों से हो रहे परेशान

The age of farmers, who have been troubled for three decades for the rights of farmers suffering from sealing, passed through the rounds of the officers to redeem their sealing land. | अपनी सीलिंग की जमीन छुड़ाने अिधकारियों के चक्कर काटते-काटते गुजर गई किसानों की उम्र, सीलिंग पीड़ित कृषक हक के लिए तीन दशकों से हो रहे परेशान


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जबलपुर2 घंटे पहले

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सीलिंग की भूमि और खसरों में अन्य मदों की प्रविष्टि दर्ज होने के कारण किसान परेशान हैं। वे अधिकारियों के चक्कर लगाकर थक चुके हैं। कई तो ऐसे भी हैं जिनकी सारी उम्र सीलिंग की भूमि मुक्त कराने बीत रही है। उनका कहना है कि जब देश के अन्य प्रदेशों में सीलिंग एक्ट काे समाप्त कर दिया गया तो यह मप्र के जबलपुर में ही अभी क्यों लागू है। सबकी यह शिकायत है कि भूमि स्वामी का नाम दर्ज होने के बाद भी कॉलम नंबर 12 से सीलिंग क्यों नहीं हटाई जा रही, जबकि वर्षों से किसानों के कब्जे में जमीनें हैं और उसमें खेती भी कर रहे हैं।

पूरी की पूरी जमीन सीलिंग की भेंट चढ़ी, 20-30 साल से लगा रहे चक्कर

17 एकड़ में से बची 15 हजार वर्गफीट जमीन

महाराजपुर निवासी जवाहर जायसवाल ने बताया कि उनके पास महाराजपुर क्षेत्र में ही 17 एकड़ जमीन थी। यह जमीन 1990 में सीलिंग में चली गई। हमारे हक में सिर्फ 15 हजार वर्गफीट जमीन ही नाम पर दर्ज है। इस जमीन के भी देखे जायें तो 5 हिस्से हैं, क्योंकि दो उनके बड़े भाई हैं और दो बहनें हैं। बड़े भाई तो अब नहीं रहे, लेकिन उनके बच्चे और हम इस जमीन में खेती कर रहे हैं। मेरी उम्र भी 70 वर्ष हो गई है। कई वर्षों से इस जमीन को सीलिंग से अलग कराने संघर्ष चल रहा है, लेकिन कुछ हो नहीं रहा है, जबकि हमारी जमीन सिंचित भी है और टयूबवेल भी लगे हैं। इस मामले में कलेक्टर कार्यालय के भी चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकला है।

खसरा निकाला तो पता चला जमीन चली गई

तिलहरी में रहने वाले सुरेन्द्र पटेल ने बताया कि मेरे परिवार में 14 सदस्य हैं और हमारी तिलहरी क्षेत्र में ही अलग-अलग जगह पर लगभग 20 एकड़ जमीन थी। इस जमीन पर हम खेती भी कर रहे थे इसी से परिवार की गुजर-बसर भी होती है। हमने इस जमीन पर कुआँ खुदवाया और अन्य काम भी कराये। वर्ष 1998 में जब हमने कुछ काम से खसरा की नकल निकलवाई तब पता चला की हमारी जमीन तो सीलिंग में चली गई है। इसके बाद हम भटकते रहे, लेकिन जमीन का कोई फैसला नहीं हो रहा है, जबकि अधिकारी भी कई बार कह चुके हैं कि जल्द ही जमीन के संबंध में कुछ निराकरण निकलेगा, लेकिन 22 साल बीतने के बाद भी कुछ नहीं हुआ। हमारा परिवार भूमि को लेकर मानसिक रूप से परेशान है। अब समझ में नहीं आ रहा है कि कहाँ जायें। पी-4



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