Administration’s question – Why virtual rally is not possible? The only answer of the parties – no network in the village | प्रशासन का सवाल- वर्चुअल रैली क्यों संभव नहीं?, पार्टियों का एक ही जवाब- गांव में नेटवर्क ही नहीं

Administration’s question – Why virtual rally is not possible? The only answer of the parties – no network in the village | प्रशासन का सवाल- वर्चुअल रैली क्यों संभव नहीं?, पार्टियों का एक ही जवाब- गांव में नेटवर्क ही नहीं


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ग्वालियर-चंबल अंचल21 मिनट पहले

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करैरा से भाजपा प्रत्याशी जसमंत जाटव के समर्थन में शनिवार काे नरवर के मुख्य बाजार का रास्ता बंद कर सभा की गई

  • हाईकोर्ट के आदेश के बाद तीन दिन में स्टार प्रचारकों की 15 से ज्यादा सभाएं निरस्त
  • हकीकत: जहां चुनावी सभाएं होती हैं, वहां इंटरनेट नेटवर्क का कोई संकट है ही नहीं

चुनावी सभाओं में उमड़ रही भारी भीड़ पर हाईकोर्ट के नए आदेश के बाद राजनीतिक दलों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। तीन दिन में स्टार प्रचारकों की 15 से ज्यादा सभाएं निरस्त हो चुकी हैं। इनमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी शामिल हैं। कोर्ट के निर्देश के बाद स्थानीय स्तर पर प्रशासन भी इतना सख्त हो गया है कि पार्टियों को सभाओं की अनुमति बड़ी मुश्किल से मिल रही है। राजनीतिक दलों की मुश्किल सिर्फ अनुमति लेने तक सीमित नहीं है।

अनुमति के समय पूछे जाने वाले प्रशासन के सवाल भी मुश्किल पैदा कर रहे हैं। रिटर्निंग ऑफिसर का पहला सवाल रहता है कि नेताजी की वर्चुअल रैली क्यों संभव नहीं..? जवाब एक ही है कि गांव में नेटवर्क नहीं आता… कार्यकर्ताओं के पास एंड्राइड मोबाइल नहीं… लेकिन हकीकत यह है कि अधिकतर सभाएं कस्बों व उन क्षेत्रों में हो रही हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब अधिकारियों ने मौके पर जाकर परीक्षण करना जरूरी कर दिया है। करैरा एसडीएम कहते हैं कि जिन इलाकों में नेटवर्क न आने की बात कही जा रही है, वहां जाकर देखेंगे कि क्या वाकई यही स्थिति है।

बिना अनुमति मंत्री कुशवाह ने सभा की, छह पर केस दर्ज

करैरा के नरवर कस्बे में 22 अक्टूबर को उद्यानिकी मंत्री भारत सिंह कुशवाह ने बिना अनुमति तीन सभाएं की। इसके बाद छह भाजपा नेताओं के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इनमें भाजयुमो मंडल अध्यक्ष रामलखन कुशवाह भी शामिल हैं।

खर्च ज्यादा न दिखाना पडे़, इसलिए कम भीड़ बता रहे

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि जितनी भी भीड़ सभा में आएगी, उसकी संख्या अनुमति के आवेदन में स्पष्ट करना होगी। अनुमति मिलने के बाद सभा में आने वाले लोगों के लिए प्रति व्यक्ति 20 रुपए के हिसाब से सैनिटाइजर और मास्क का खर्च नगरीय निकाय या पंचायत (सभा स्थल जिसके अधिकार क्षेत्र में आता है) को जमा करना होगा। राजनीतिक दलों के लोग अधिकतम 400 से 1000 के बीच ही सभा में आने वालों की संख्या बता रहे हैं। क्योंकि मास्क और सैनिटाइजर पर होने वाला खर्च प्रत्याशी के चुनावी खर्च में जुड़ेगा।

इनकी सभाएं रद्द हुईं

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान : 22 अक्टूबर को भांडेर के बस्वाहा व अशोकनगर जिले के शाढ़ौरा में तथा 24 अक्टूबर को मेहगांव की सभा के लिए चुनाव आयोग से अनुमति नहीं मिली।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल : 23 अक्टूबर को दिमनी, भांडेर, ग्वालियर और ग्वालियर पूर्व में सभा करनी थी।

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर : 22 अक्टूबर को पोहरी के गोवर्धन और बमोरी क्षेत्र में आमसभा करनी थी लेकिन अनुमति नहीं मिल पाई।

सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया : 22 अक्टूबर को मेहगांव के रौन और गोहद के बाराहेड में सभा की अनुमति नहीं मिली तो रोड शो किया।

जिन मामलों में तात्कालिक निर्णय की जरूरत, वहां काम प्रभावित

चुनाव के बीच निर्वाचन प्रक्रिया में न्यायालय के इस तरह के दखल से जुड़ा यह संभवत: पहला मामला है। वैसे न्यायालय का जो आदेश है, वह नियमों के परे नहीं हैं, जो भी नियम-कानूनों का पालन करेगा, उसे कोई दिक्कत नहीं होना चाहिए।

आयोग का उद्देश्य कभी राजनीतिक दलों को अनावश्यक रूप से परेशान करना नहीं रहता। निष्पक्षता और पारदर्शिता कायम रखने के लिए ही सख्ती की जाती है।

जहां तक निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली का सवाल है तो सभी शिकायतों और अनुमतियों का अंतिम निराकरण तो मुख्य निर्वाचन कार्यालय स्तर पर ही होता है, इसमें कोई बड़ी भारी दिक्कत नहीं आना चाहिए।

इतना जरूर है कि जिन मामलों में तात्कालिक निर्णय या कार्यवाही की जरूरत होती है, वह काम प्रभावित हुआ होगा, क्योंकि जो अफसर (कलेक्टर) मौके पर है, वह परिस्थितियों के हिसाब से बेहतर निर्णय लेने में सक्षम होता है। अब वह कोई निर्णय नहीं कर पा रहा है।

एक्सपर्ट व्यू: जेएस माथुर, पूर्व मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मप्र



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