2018 के विधान सभा चुनाव में बुरहानपुर की नेपानगर विधानसभा सीट से कांग्रेस की सुमित्रा कास्डेकर चुनी गयीं थीं. लेकिन सिंधिया समर्थकों के इस्तीफे और फिर बीजेपी सरकार बनने के बाद उन्होंने दल बदल लिया और बीजेपी में चली गयीं. पार्टी ने उन्हें टिकट भी दे दिया और वो फिर चुनाव मैदान में उतर गयीं. सुमित्रा बीजेपी के टिकट पर जीत भी गयीं. उनकी इस जीत के साथ ही नेपानगर विधानसभा सीट का वो मिथक भी बना रहा कि यहां से जिस दल का विधायक चुना जाता है, प्रदेश में सरकार भी उसी दल की बनती है.यह मिथक 43 साल से बना हुआ है .
मतदाताओं ने बनाए रखा मिथक
इस उपचुनाव में बीजेपी कांग्रेस दोनों अपनी अपनी जीत का दावा कर रहे थे. राजनैतिक जानकार कह रहे थे कि दोनों दलों में प्रत्याशियों को लेकर गहरा असंतोष और विरोध है. ऐसे में यह कह पाना काफी मुश्किल है कि यह मिथक जारी रहेगा या टूटेगा.लेकिन मतदाताओं ने अपने विधान सभा क्षेत्र से जुड़ा ये दिलचस्प मिथक बनाए रखा.नेपानगर सीट का इतिहास
1977 में नेपानगर विधानसभा क्षेत्र अस्तित्व में आया. पहले चुनाव में जनता पार्टी के ब्रजमोहन मिश्रा विधायक बने और प्रदेश में जनता पार्टी की सरकार बनी.
-1980 में कांग्रेस पार्टी के तनवंत सिंह कीर विधायक चुने गए और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी.
-1985 में कांग्रेस पार्टी के तनवंत सिंह कीर दोबारा विधायक चुने गए. उस साल फिर से प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी.
-1990 में बीजेपी के ब्रजमोहन मिश्रा विधायक बने और प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनी.
-1993 में कांग्रेस के तनवंतसिंह कीर फिर लौटकर आए और जनता ने उन्हें फिर से अपना विधायक चुन लिया.
-1998 में कांग्रेस के रघुनाथ चौधरी विधायक चुने गए – प्रदेश मेंकांग्रेस की सरकार बनी.
-2003 में बीजेपी की अर्चना चिटनीस विधायक बनीं और प्रदेश में बीजेपी की उमा भारती सरकार बनी.
-2008 में नेपानगर सीट एसटी वर्ग के लिए आरक्षित हुई और 2008 में राजेंद्र दादू बीजेपी के विधायक बने – प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनी रही.
-2013 में राजेंद्र दादू दोबारा बीजेपी के विधायक चुने गए.- प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनी
-2016 विधायक राजेंद्र दादू की सडक दुर्घटना में मौत हो गयी. उनकी जगह मंजू राजेंद्र दादू को टिकट दिया गया और वो विधायक चुन ली गयीं. प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनी रही.
-2018 में कांग्रेस की सुमित्रा कास्डेकर विधायक चुनी गयीं और इसी के साथ 15 साल बाद मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार सत्ता में लौटी.
9 चुनाव, 2 उप चुनाव
नेपागनर में विधानसभा के नौ चुनाव और दो उपचुनाव हो चुके हैं. इनमें छह विधायक चुने गए. उनमें से तीन विधायक एक से अधिक बार जीते और तीन विधायकों को मंत्री बनने का अवसर मिला.नेपानगर से कांग्रेस के तनवंतसिंह कीर तीन बार और भाजपा के बृजमोहन मिश्र और राजेंद्र दादू दो-दो बार विधायक चुने गए. कांग्रेस के रघुनाथ और भाजपा की अर्चना चिटनीस एवं मंजू दादू एक-एक बार विधायक रहे.
नेपानगर के मंत्री
वर्ष 1977 में पहली बार हुए चुनाव में जनता पार्टी के टिकट के पर बृजमोहन मिश्र चुनाव जीते और सरकार भी जनता पार्टी की बनी. उसमें मिश्र को वन मंत्री बनाया गया. वर्ष 1980 के चुनाव के कांग्रेस के तनवंतसिंह कीर जीते सरकार कांग्रेस की आई और कीर स्वास्थ्य मंत्री बनाए गए. वर्ष 1985 में कांग्रेस से तनवंतसिंह कीर फिर जीते सरकार भी कांग्रेस की रही और कीर नगरीय प्रशासन मंत्री बने. वर्ष 1990 मे भारतीय जनता पार्टी से बृजमोहन मिश्र विधायक बने. इस बार सरकार भाजपा की आई और मिश्र विधानसभा अध्यक्ष बने. वर्ष 1993 के चुनाव में कांग्रेस से तनवंतसिंह कीर जीते सरकार कांग्रेस की आई और कीर फिर नगरीय प्रशासन मंत्री बने.वर्ष 1998 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर रघुनाथ चौधरी जीते सरकार कांगेस की रही. वर्ष 2003 में भाजपा से अर्चना चिटनीस जीती सरकार भाजपा की बनी और उसमें चिटनीस को पशुपालन मंत्री की जिम्मेदारी मिली. वर्ष 2008 में भाजपा से राजेंद्र दादू जीते और सरकार भाजपा की रही. वर्ष 2013 में भी भाजपा के राजेंद्र दादू के हाथों बाजी रही और सरकार भाजपा की कायम रही.दादू की सडक दुर्घटना में मौत पर वर्ष 2016 में हुए उपचुनाव में उनकी पुत्री मंजू दादू भाजपा के टिकट पर विधायक चुनी गई.