पढ़ाई का जुनून: पिता बीमार हुए तो बढ़ा आर्थिक बोझ, भोपाल के न्यूमार्केट में लक्ष्मी जी की मूर्ति बनाकर बेचने को मजबूर अटल बिहारी वाजपेयी विवि का छात्र

पढ़ाई का जुनून: पिता बीमार हुए तो बढ़ा आर्थिक बोझ, भोपाल के न्यूमार्केट में लक्ष्मी जी की मूर्ति बनाकर बेचने को मजबूर अटल बिहारी वाजपेयी विवि का छात्र


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भोपाल16 मिनट पहले

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न्यू मार्केट में महारानी लुक वाली देवी लक्ष्मी की प्रतिमा का स्टॉल लगाकर सेल करता सृजल शुक्ला।

  • पिता के इलाज में खर्च हुए पैसे,अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय का छात्र सृजल कॉलेज की फीस भरने के लिए महारानी लुक लक्ष्मी की प्रतिमा लगाकर कर रहा सेल

राजेश गाबा।

कहते हैं कोई भी काम छोटा-बड़ा नहीं होता। जहां चाह होती है वहां राह बन ही जाती है। यह बात अटल बिहारी हिंदी विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र सृजल शुक्ला पर फिट बैठती है। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के चलते अपनी फीस भरने में असमर्थ होते सृजल ने सृजन का रास्ता अपनाया। लक्ष्मीजी की मूर्ति बनाकर न्यूमार्केट में उसे सेल कर रहे हैं ताकि फीस के पैसों का इंतजाम कर सकें।

महारानी लुक में लक्ष्मी जी की मूर्ति

न्यू मार्केट में के पास सृजल शुक्ला ने महारानी लुक वाली देवी लक्ष्मी की प्रतिमा का स्टॉल लगाया है। दिवाली पूजन में रखी जाने वाले यह प्रतिमा अमूमन मिट्टी से बनी होती है, लेकिन सृजल ने इन्हें जरी-गोटे की साड़ी, बांधनी की पगड़ी, गहने पहनाकर सजाया है।

पिता जी के हार्टअटैक के बाद खराब हो गए घर के हालात

अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय से एमए हिंदी की पढ़ाई कर रहे सृजल कहते हैं- मेरे पिता को हार्ट अटैक आया। उनके इलाज पर काफी खर्च हो गया। मेरे घर में वही कमाने वाले थे। मेरे पास अब फीस जमा करने के लिए भी पैसे नहीं है। सोचा कि जॉब करूंगा, लेकिन इतनी जल्दी सैलेरी नहीं मिलेगी। फीस के लिए रुपयों का इंतजाम करने मैंने मूर्तियां लेकर उन्हें यूनिक बनाने की कोशिश की। अभी तक काफी मूर्तियां बिक चुकी हैं। लोगों का पॉजीटिव रिस्पाॅन्स मिल रहा है। मैं अब पढ़ाई के साथ-साथ अपने इस क्रिएटिविटी को आगे बढ़ाऊंगा ताकि आत्मनिर्भर बन सकूं।

कई दिन, दिन-रात जागकर तैयार की मूर्तियां

लक्ष्मी जी की मूर्तियों को सजाकर महारानी लुक दिया। मुझे दुकानदारी नहीं आती। लेकिन धीरे-धीरे लोगों का रिस्पॉन्स मिल रहा है। कुछ मूर्तियां बिक गई हैं। नया सीखने को मिल रहा है। ज्यादातर लोग देखते हैं तारीफ करते हैं, लेकिन लेते नहीं। उम्मीद हैं कल तक बाकी बची मूर्तियां भी सेल हो जाएंगी।

मूर्तियां बिक जाएंगी तो फीस जमा कर सकूंगा

सृजल ने बताया कि मैंने महारानी लुक में लक्ष्मीजी की मूर्तियां तैयार कर लीं। लेकिन उसके स्टॉल लगाने के लिए जगह नहीं मिल पा रही थी। जहां भी जा रहा था या तो लोग स्टॉल लगाने के पैसे मांग रहे थे या फिर सीधे तौर पर मना कर रहे थे। कहीं पर भी स्टॉल लगाने की जगह नहीं मिल रही थी तो न्यू मार्केट में अनिमेश प्रेशर कुकर की शॉप वाली आंटी सीमा अग्रवाल ने मेरी समस्या तो समझा और बाहर दुकान लगाने की जगह दी। यह मूर्तियां बिक जाएंगी तो फीस जमा कर सकूंगा।

जब यह आया तो बड़ा परेशान था

अनिमेश प्रेशर कुकर शॉप की संचालिका सीमा अग्रवाल ने कहा कि सृजल शुक्ला जब हमारे पास आया। उस समय यह बड़ा परेशान था। इसने कहा कि मुझे कहीं जगह मिल जाए तो मैं अपनी मूर्तियां बेच सकूंगा, ताकि इससे मिले पैसों से अपने कॉलेज की फीस भर सकूंगा। दूसरे बच्चे सोचते हैं कि कहीं से मिल जाए, लेकिन इसमें उत्साह था कि खुद कमाऊं। इसने कहा कहीं जगह दिलवा सकते हैं। मैंने उसे अपनी दुकान के सामने स्टॉल लगाने की जगह दे दी।यह मेहनत करके आगे बढ़ना चाह रहा है। यह दूसरे बच्चों के लिए उदाहरण है ऐसे बच्चों की हम सबको मदद करनी चाहिए।



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