स्मृति शेष: महाराष्ट्र समाज में पुरुषों को ही लोकपाल बनाने की परंपरा, इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला शोभावती नहीं रहीं

स्मृति शेष: महाराष्ट्र समाज में पुरुषों को ही लोकपाल बनाने की परंपरा, इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला शोभावती नहीं रहीं


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शिवपुरी4 घंटे पहले

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शोभादेवी चित्तले।

  • शिक्षाविद शोभावती चितले का निधन, उत्कृष्ट शिक्षा के लिए मिला था राज्यपाल सम्मान
  • कलेक्टर ने 1 अक्टूबर को उन्हें पेंशनर्स सम्मान कार्यक्रम में सम्मानित किया था।

शिक्षाविद शोभावती चितले अब नहीं रहीं। महाराष्ट्र समाज में पुरुषों को ही लोकपाल बनाने की परंपरा है। वे पहली महिला थीं जो अपनी योग्यता और जीवटता से इस पद पर पहुंचीं। उन्हें उत्कृष्ट शिक्षण कार्य के लिए 1983 में तत्कालीन राज्यपाल ने उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान भी दिया था।

शहर में फोरेस्ट रेंज ऑफिस के सामने रहने वालीं शिक्षाविद सेवानिवृत प्रधान अध्यापक शोभावती चितले का शनिवार सुबह ब्रह्ममूहूर्त में निधन हो गया। वे 86 साल की थीं। शहर में हजारों ऐसे लोग हैं जिन्होंने शेाभावती चित्तले से सरकारी स्कूल में शिक्षा प्राप्त की। इनमें कई लोग आज विभिन्न शासकीय पदों पर भी हैं। उनके अंतिम संस्कार में सैकड़ों लोग शामिल हुए।

हाल ही में 1 अक्टूबर 2020 को अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर आयोजित सम्मान समारोह में वे विशिष्ट अतिथि रही थीं और कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह ने उन्हें 75 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनर्स के सम्मान कार्यक्रम में सम्मानित भी किया था।

पेंशनर्स के लिए थीं आयरन लेडी
पेंशनर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अशोक सक्सेना का कहना है कि शिवपुरी में पेंशनर्स एसोसिएशन के गठन करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वे पेंशनर्स के लिए जुझारू रहीं, इसलिए हम सभी उन्हें आयरन लेडी कहते थे।

1983 में मिला था उत्कृष्ट शिक्षक का सम्मान
शिक्षाविद चितले ज्यादातर वक्त पुरानी शिवपुरी स्थित सरकारी स्कूल में पदस्थ रहीं। साल 1983 में प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल भगवतदयाल शर्मा ने उन्हें 5 सितंबर शिक्षक दिवस पर सम्मानित किया था। भोपाल में हुए समारोह में जब उन्होंने पूछा कि मुझे सम्मान किसलिए मिला है जो उन्हें बताया गया कि आपने लगातार अपने विद्यालय का परिणाम शत प्रतिशत दिया और बच्चों को बेहतर संस्कार दिए इसलिए आपको सम्मान दिया। इस पर वह सहजता से बोलीं थीं कि इसमें मैंने कुछ नहीं किया। शासन ने मुझे जो काम सौंपा, उसे ईमानदारी और कर्मठता से पूरा करने का प्रयास कर रही हूं। वे 1994 में प्रधानाध्यापक पद से सेवानिवृत हुईं।

समाज ने बनाया था लोकपाल
महाराष्ट्र समाज के अध्यक्ष रहे विनय राहुरीकर ने बताया कि आमतौर पर महाराष्ट्र समाज में लोकपाल पुरुषों को ही बनाया जाता था। वह भी ऐसा पुरुष सदस्य जिसका समाज में प्रभाव हो। लोकपाल इंग्ले जी के बाद पहली बार किसी महिला के रूप में शोभवती चितले को लोकपाल बनाया गया। इस पद पर वह अपनी योग्यता और काबलियत की वजह से पहुंची थीं और महाराष्ट्र समाज ने इस निर्णय को तत्समय का सर्वश्रेष्ठ निर्णय माना था।



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