भास्कर इंटरव्यू: शिक्षा मंत्री बोले- ऐसा नहीं है कि बगैर पढ़ाई 5वीं और 8वीं के स्टूडेंट्स पास हो जाएंगे, प्रोजेक्ट वर्क भी एक तरह की परीक्षा ही होगी

भास्कर इंटरव्यू: शिक्षा मंत्री बोले- ऐसा नहीं है कि बगैर पढ़ाई 5वीं और 8वीं के स्टूडेंट्स पास हो जाएंगे, प्रोजेक्ट वर्क भी एक तरह की परीक्षा ही होगी


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भोपाल25 मिनट पहले

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स्कूल शिक्षामंत्री इंदर सिंह परमार।

  • प्राइवेट स्कूल पूरे साल केवल ट्यूशन फीस ही ले पाएंगे, शिकायत आई तो कलेक्टर को कार्रवाई का अधिकार दे रखा है
  • 9वीं और 11वीं तक की परीक्षा का पैटर्न बदला जाएगा, ट्रांसफर पॉलिसी नए शिक्षा सत्र में 1 अप्रैल से लागू होगी

स्कूल शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार ने कहा है कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण पहली से आठवीं तक के स्कूल 31 मार्च तक बंद रहेंगे लेकिन माध्यमिक शिक्षा मंडल के अधीन आने वाले सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में पांचवीं और आठवीं के विद्यार्थियों का प्रोजेक्ट वर्क के आधार पर मूल्यांकन होगा। यह एक तरह से परीक्षा ही होगी। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि बिना पढ़ाई के उन्हें पास कर दिया जाएगा। दरअसल, शुक्रवार को शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में निर्णय लिया गया था कि 5वीं एवं 8वीं बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। ऐसे सभी सवालों को लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने दैनिक भास्कर के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने बताया कि कक्षा 9वीं व 11वीं तक के स्टूडेंट को स्कूल जाने की बाध्यता नहीं होगी। लेकिन परीक्षा होगी, इसके लिए पैटर्न बदला जाएगा। इसी तरह 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं होंगी, जनरल प्रमोशन नहीं होगा।

क्या सीबीएसई से एफिलेटेड स्कूल भी बंद रहेंगे?
सीबीएसई के स्कूल पूरे देश में बंद हैं। जिन राज्यों में स्कूल खोलने के प्रयास किए गए, वहां कोरोना फैला है। हालांकि हर राज्य में अलग-अलग परिस्थितियां हैं। दिल्ली में मप्र से ज्यादा हालत खराब है। फिर भी हम चाहते हैं कि 9 वीं से 12 वीं तक के माध्यमिक शिक्षा मंडल से संबद्ध स्कूलों के लिए जो नियम है, वही सीबीएसई के स्कूलों के लिए भी होना चाहिए।

प्राइवेट स्कूल सिर्फ टयूशन फीस लेंगे। इसके लिए कोई आदेश जारी होगा‌?
जब कोरोना संक्रमण फैलना शुरु हुआ था, तब मुख्यमंत्री ने सरकार की मंशा साफ कर दी थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने भी निर्देश दिए हैं। सरकार ने तय किया है कि कोई भी प्राइवेट स्कूल सिर्फ टयूशन फीस ही लेंगे। सभी जिलों के कलेक्टरों को अधिकृत किया है कि वे यह सुनिश्चत करेंगे कि स्कूल केवल टयूशन फीस ही लेंगे, इसके अलावा अन्य कोई फीस नहीं वसूली जाएगी। यदि कोई शिकायत करता है तो कलेक्टर कार्रवाई करेंगे।

स्कूलों में ट्रांसफर को लेकर कोई पॉलिसी लागू होगी‌?
कमलनाथ सरकार में ट्रांसफर पॉलिसी बनी थी। उसके नियम तोड़कर बड़े पैमाने पर ट्रांसफर हुए थे। परिणाम यह हुआ कि कई स्कूल टीचर विहीन हो गए। आलीराजपुर के लगभग ढाई सौ स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है। झाबुआ में 200 स्कूलों में पढ़ाने के लिए टीचर नहीं है। ट्रायबल एरिया खरगौन में कई स्कूलों में टीचर नहीं हैं।

कमलनाथ सरकार में शिक्षा विभाग में कितने ट्रांसफर हुए। कोई आंकड़ा है‌?
कमलनाथ सरकार ने तबादला उद्योग चलाया था। 15 माह के कार्यकाल में 35 हजार से ज्यादा ट्रांसफर हुए। लेकिन शिवराज सरकार में बहुत कम ट्रांसफर किए। अब तक के 9 माह के कार्यकाल में 2 हजार से भी कम ट्रांसफर किए गए हैं।

ट्रांसफर पॉलिसी कब तक लागू होगी?
हम स्थाई रूप से ट्रांसफर पॉलिसी लागू करेंगे। इसके लिए हरियाणा, गुजरात और तामिलनाडू की पॉलिसी का अध्ययन किया जा रहा है। हम चाहते हैं कि हर स्कूल में टीचर रहे। यह पॉलिसी स्टूडेंट आधारित होगी। जिसे नए शिक्षा सत्र में 1 अप्रैल 2021 से लागू किया जाएगा।

स्कूलों में कितने पद खाली हैं। इनको भरने का कोई प्लान बना है?
नए टीचर भर्ती करने की प्रक्रिया पहले से चल रही है। दरअसल प्रमोशन को लेकर हाईकोर्ट में एक पिटिशन लंबित है। इसका निराकरण कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए कानून राय ली जा रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में कई वर्षों से टीचर पदस्थ हैं। उनकी शहरी क्षेत्रों में पोस्टिंग क्यों नहीं होती?
सामान्यता ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में कई टीचर जाना नहीं चाहता है। यही वजह है कि कई ग्रामीण स्कूलों में टीचर 20 साल से जमे हुए हैं। ऐसे ही शहरी स्कूलों में टीचर जहां भर्ती हुआ, वहीं से रिटायर हो जाता है। इसको लेकर सरकार गंभीर है। जल्दी ही कोई नीतिगत निर्णय किया जाएगा।



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